नारनौल में यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण के विरोध में स्वर्ण समाज लामबंद, आंदोलन की रणनीति तैयार

नारनौल में यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और जातिगत आरक्षण के विरोध में स्वर्ण समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। यह बैठक राव बंशी सिंह पार्क में सोमवार के दिन संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. मामचंद शर्मा द्वारा की गई। बैठक के दौरान सभी वक्ताओं ने संबंधित प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद समाज को इनके कथित दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का बड़ा निर्णय लिया गया।
आंदोलन की आगामी रणनीति और कमेटियों का गठन
बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति को पूरी तरह तैयार करने के लिए चार अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है। खेमचंद शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि इन कानूनों और प्रावधानों से होने वाले कथित शोषण के खिलाफ समाज को अब एकजुट होना होगा। इसके साथ ही सभी को मिलकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
वक्ताओं के विचार और विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा
एडवोकेट गोबिंद शर्मा ने बैठक में यूजीसी से जुड़े हुए विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। संदीप नुनीवाल ने इस दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन प्रावधानों की आड़ में बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। गजेंद्र बोहरा ने इन प्रावधानों का सनातन और हिंदू वैदिक परंपराओं पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई। डॉ. धीरज शर्मा ने कहा कि स्वर्ण समाज के इन सभी मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की भूमिका बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि आगामी चुनाव के समय स्वर्ण समाज इन नेताओं को इसका पूरा जवाब देगा।
संरक्षक मंडल और विभिन्न कमेटियों की घोषणा
बैठक में कुल 11 वरिष्ठ सदस्यों को मिलाकर एक नया संरक्षक मंडल बनाया गया है। इसके अलावा बैठक में 31 सदस्यों की एक कोर कमेटी का भी गठन किया गया है। एडवोकेट गोबिंद शर्मा और एडवोकेट हेमंत शर्मा के सानिध्य में 11 सदस्यीय लीगल एडवाइजरी कमेटी बनाई गई है। महिलाओं के लिए भी विशेष रूप से 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस महिला कमेटी में सरोज बाला शर्मा, मधु चौहान और रेणु शर्मा को शामिल किया गया है।