नरवाना के आर्य समाज में चतुर्वेदी प्रायण यज्ञ हवन का आयोजन, पर्यावरण शुद्धि में दिया योगदान

नरवाना में 3 सितंबर को आर्य समाज में चतुर्वेदी प्रायण यज्ञ हवन का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान प्राध्यापक सुनील के साथ उपस्थित सभी विद्यार्थियों, स्टाफ सदस्यों एवं आर्य गणों ने आहुतियां डालीं। सभी ने इस प्रकार पर्यावरण शुद्धि में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भजन और गीतों के माध्यम से हुआ ईश्वर गुणगान
इस अवसर पर डॉक्टर प्रताप सिंह, धर्मपाल और यशपाल आर्य ने भजन एवं गीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने इसके माध्यम से ईश्वर स्तुति, प्रार्थना और उपासना की। साथ ही आर्य समाज और महर्षि दयानंद के समाज व राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान का खुलकर गुणगान किया गया।
वैदिक ज्ञान विज्ञान और भारतीय संस्कृति
इस अवसर पर चंद्रकांत आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि महाप्रयाण यज्ञ और चतुर्वेद पाठ की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। चारों वेदों के सांगोपांग विद्वान और ऋषि-मुनि गांव-गांव में जाकर आम जनमानस को शिक्षित किया करते थे। वैदिक ज्ञान विज्ञान ही हमेशा से भारतीय संस्कृति की असली आधारशिला रही है। भारतीय संस्कृति में ही धर्म शास्त्रों के साथ सभी विषयों पर सत्य, तथ्य, कथ्य और तर्क करने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
योगेश दत्त ने दी ईश्वर भक्ति पर व्यापक जानकारी
मुख्य वक्ता योगेश दत्त ने इस कार्यक्रम में ईश्वर के गुण, कर्म और स्वभाव के अनुसार सगुण और निर्गुण भक्ति के बारे में व्यापक जानकारी साझा की। उन्होंने वेद मंत्रों के आधार पर आम जनमानस को सरल भाषा में जीवन उपयोगी ज्ञान और विज्ञान आधारित शिक्षा प्रदान की। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र महाराज, योगी राज श्री कृष्ण चंद्र, शिवाजी और शिवजी इत्यादि महापुरुषों के शुद्ध सात्विक चरित्र का अनुपालन करना ही उनकी सच्ची पूजा है। मूर्तिमान जीवित माता-पिता, आचार्य, विद्वान, पति के लिए पत्नी और पत्नी के लिए पति पूरी तरह पूजनीय हैं। इन सभी की पूजा करना पूरी तरह वेद निहित है।
जयपाल सिंह आर्य के विचार और पाखंड पर प्रहार
इस अवसर पर जयपाल सिंह आर्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि वेद में यह साफ-साफ लिखा गया है। रचनाकार, पालनहार, सर्व अंतर्यामी, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी और सर्व हितकारी महान यश वाले परमात्मा की कोई भी प्रतिमा नहीं है। मूर्ख और पाखंडी लोगों ने ही महापुरुषों की प्रतिमा को प्रतिस्थापित करके उनके नाम पर अपने गोरख धंधे चला रखे हैं। इस भव्य आयोजन के दौरान राजवीर, रामकुमार, बलबीर सिंह, वेदपाल, प्राचार्य मीना गर्ग, मनोज कुमार, सीमा एवं अन्य स्टाफ सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।