नरवाना के आर्य समाज मंदिर में चतुर्वेदी यज्ञ पारायण कार्यक्रम के तहत भव्य यज्ञ का आयोजन

आर्य समाज में चतुर्वेदी यज्ञ पारायण कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम बृहद यज्ञ का आयोजन
नरेंद्र जेठी/नरवाना /02 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
आर्य समाज नरवाना में चतुर्वेदी यज्ञ पारायण कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम वृहद यज्ञ का आयोजन किया गया है। इस यज्ञ हवन में आर्य गण, स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर आहुतियां डालीं। सभी ने पर्यावरण शुद्धि में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रात्रि कालीन सत्र में भजन उपदेशक के विचार
कल रात्रि कालीन सत्र में भजन उपदेशक योगेश दत्त जी ने जीवन में कर्म के सिद्धांत का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कवि भारवि का उदाहरण देते हुए सभी को समझाया। उन्होंने बताया कि जिस कर्म को सत्य, न्याय, धर्म, धैर्य, संयम, चिंतन, मनन और विवेक के साथ किया जाता है, उसका प्रतिफल हमेशा उत्तम होता है। वेद में 100 वर्ष तक निस्वार्थ भाव से कार्य करते हुए जीवन जीने का स्पष्ट विधान बताया गया है।
प्रातः कालीन सत्र में ईश्वर के गुण और कर्मों की चर्चा
आज प्रातः कालीन सत्र में ईश्वर के गुण, कर्म, स्वभाव, शक्ति और सामर्थ्य का विशेष उल्लेख किया गया। बताया गया कि परमात्मा सृष्टि का ब्रह्मा के स्वरूप में रचनाकार है। परमात्मा विष्णु स्वरूप में पालनहार, शिव स्वरूप में कल्याणकारी एवं शंकर स्वरूप में व्यवस्थापक है। विद्यार्थियों को जीवन में आदर्श मूल्य धारण करने का आह्वान किया गया। उन्हें सत्यनिष्ठा से पठन-पाठन और अध्ययन करके श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रधान चंद्रकांत आर्य के विचार और पारिवारिक मूल्य
प्रधान चंद्रकांत आर्य ने इस अवसर पर कहा कि भारत आदिकाल से ही ज्ञान विज्ञान में सर्वोत्तम रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न जैसे आदर्श भाई, पुत्र, राजा और मित्र आज भी वंदनीय तथा पूजनीय हैं। मां संतान का निर्माण करती है और पिता संरक्षण करता है। आचार्य ज्ञान विज्ञान से पारंगत करके श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण करता है। प्रथम संतान का गुरुकुल घर होता है, दूसरा समाज और तीसरा आचार्य का गुरुकुल होता है। यहीं राष्ट्र के श्रेष्ठ नागरिक तैयार होते हैं। महाभारत में शांतनु पुत्र भरत गुरुकुल में मां के सानिध्य में रहते हुए सभी विधाओं में पारंगत हो गए थे।
जयपाल सिंह आर्य के विचार और वैदिक शिक्षा का महत्व
इस अवसर पर जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि जो मनुष्य अपने से बड़े धार्मिक, विद्वान, कृतज्ञ और प्रबुद्ध नागरिकों का सम्मान करता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं। नारी मनुष्य, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का मुख्य आधार है। वैदिक शिक्षा में ही संस्कारों से नैतिक, मर्यादित और चारित्रिक मूल्य विकसित होते हैं। इससे श्रेष्ठ एवं सभ्य मनुष्यों का निर्माण होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोग
इस अवसर पर पुरोहित मिथिलेश शास्त्री, धर्मपाल, वेदपाल, किताब सिंह, राजवीर, रामकुमार, डॉक्टर प्रताप सिंह, सतपाल, बलबीर सिंह और यशपाल उपस्थित रहे। इनके अलावा प्राचार्य मनोज सहपत्नी, मीना गर्ग एवं अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।