नरवाना में उन्नत भारत अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए 2100 पौधे रोपे गए

नरवाना में उन्नत भारत अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए 2100 पौधे रोपे गए

पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन कार्यक्रम को उन्नत भारत अभियान के माध्यम से हरियाली खुशहाली के लिए पौधारोपण

नरेंद्र जेठी/नरवाना /27 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन कार्यक्रम को उन्नत भारत अभियान के माध्यम से हरियाली खुशहाली के लिए पौधरोपण के रूप में नरवाना एवं आसपास के क्षेत्र में व्यापक आधार पर विद्यार्थियों एवं समाज सेवियों के सहयोग से चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम जयपाल सिंह प्राध्यापक रसायन शास्त्र राजकीय महाविद्यालय नरवाना के द्वारा संचालित किया जा रहा है।

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12 जुलाई से आज तक जामुन, अमरूद, सहजन, शहतूत, शीशम, नीम, गुड़हल, गुलाब, आंवला, इमली, पापड़ी, कड़ी पत्ता इत्यादि प्रजातियों में औषधियों, फूल, फल एवं छाया के लिए लगभग 2100 पौधों का प्रत्यारोपण किया गया है। विद्यार्थियों एवं समाजसेवियों ने नरवाना खापड़, अमरगढ़, शेर सिंह खेड़ी, इस्माइलपुर, खरल, अलीपुर, धरोदी, फूलिया कलां एवं खुर्द तथा कुंभा खेड़ा के आसपास के गांव में दादा-पोता वाटिका के अंतर्गत पौधारोपण किया है। यह पौधारोपण वातावरण को हरा भरा बनाकर जीव-जंतु और जलवायु को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए किया गया है।

पर्यावरण प्रदूषण और घटती वनस्पतियाँ

इस अवसर पर जयपाल सिंह आर्य ने बताया कि हरियाणा में लगभग तीन प्रतिशत सघन वन क्षेत्र है। हरियाणा सहित उत्तर भारत का अधिकतर क्षेत्र अक्टूबर से दिसंबर तक पर्यावरण प्रदूषण के कारण गैस चैंबर में बदल जाता है। प्रदूषण के कारण जन स्वास्थ्य के साथ वनस्पतियों और जीव जंतुओं के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

लुप्तप्राय होती औषधियां और पेड़-पौधे

कीट एवं पौध नाशक दवाइयों के साथ हानिकारक रसायन, पॉलीथिन, प्लास्टिक इत्यादि के प्रयोग और मौसम के बदलाव के कारण अनेकों प्रकार की जड़ी बूटियां, औषधियां, फल, फूल और छायादार वनस्पतियां समाप्त हो गई हैं या समाप्त होने के कगार पर हैं। स्थानीय देसी कीकर, कैंम, कैन, केंदु, खैर, कोंदरा, चौलाई, कागा रोटी, पुआड़, सरवाई, गोमा इत्यादि वनस्पतियों के साथ स्थानीय पशु-पक्षियों की प्रजातियां भी लुप्तप्राय हो गई हैं। इन सभी के आशियाने और आसरा जंगल और पेड़-पौधे होते हैं। वनस्पतियां एवं जंगल वर्षा, जल संरक्षण, पर्यावरण शुद्धि के साथ संपूर्ण प्राणी जगत के जीवन का आधार हैं।

कार्यक्रम में सहयोग देने वाले विद्यार्थी

इस कार्यक्रम में प्रोफेसर शैलेंद्र नैन, चंद्रकांत आर्य प्रधान आर्य समाज नरवाना, मोहन आर्य, रवि फूलिया, अंकित दनोदा, चंदन, गौरव, निखिल, पायल, परमजीत, जतिन, दिनेश, विकास, मानसी, प्रिया इत्यादि विद्यार्थियों का सहयोग एवं समन्वय रहा है।

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