नरवाना: रसायन शास्त्र प्रयोगशाला में हुआ 375 भूमि नमूनों का परीक्षण, बिना पेड़-पौधों वाली जमीन मिली कठोर

रसायन शास्त्र प्रयोगशाला में किया लगभग 375 भूमि के नमूना का परीक्षण ।
जहां पेड़ पौधे नहीं हैं, जमीन कठोर होती है तथा वहां पोषक तत्वों की भारी कमी मिली-प्रो0 जयपाल आर्य।
नरवाना/ 17 अगस्त 2026 /नरेन्द्र जेठी/ अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरित भारत, स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवन शैली में खेती-बाड़ी पशुपालन के साथ खेत क्यारों में पेड़ पौधे का प्रत्यारोपण सरंक्षण एवं संवर्धन करने का का विधान वैदिक संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। जमीन की उर्वरा शक्ति, जल संरक्षण और पर्यावरण शुद्धि के लिए पेड़ पौधे एवं अन्य वनस्पतियों का सर्वोत्तम योगदान है।
इस अवसर पर जयपाल सिंह ने आम जनमानस को जागृत करते हुए बताया कि महाविद्यालय की रसायन शास्त्र प्रयोगशाला में शोध में पाया गया है कि जिन खेतों में पेड़ पौधे या वनस्पतियां अधिक हैं, उनमें स्थिर कार्बन, नाइट्रोजन,फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, लौह,अभ्रक, तांबा, मैंगनीज और बोरोन व अन्य पोषक तत्व संतुलित मात्रा में पाए गए, क्योंकि जिस खेत में कार्बन अधिक होता है, वहां पर केंचुआ, मित्र कीट- पतंगे, जीवाणु भूमि को पोली, हवादार बना देते हैं। इससे जमीन में पौषण तत्वों के साथ जल संरक्षण भी अधिक होता है।दूसरी और जहां पेड़ पौधे नहीं हैं, जमीन कठोर होती है तथा वहां पोषक तत्वों की भारी कमी मिली है।
इस वर्ष जून, जुलाई, अगस्त माह में महाविद्यालय की रसायन शास्त्र प्रयोगशाला में लगभग 375 भूमि के नमूना का परीक्षण किया गया है। भारत सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम में विज्ञान संकाय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर 55 विद्यार्थियों को इंटर्नशिप कोर्स के माध्यम से भूजल एवं कृषि भूमि के नमूनों का प्रशिक्षण दिया गया। कोई भी किसान या अन्य कृषि भूमि या भूजल का परीक्षण करवाना चाहे, वह सीधा महाविद्यालय रसायन शास्त्र विभाग में संपर्क कर सकता है।
भूमि की उर्वरा शक्ति एवं आहार या खाद्यान्न की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए किसानों को खेत के मेढ़ों, नालियों पर, शीशम ,सहजन, शहतूत, अमरूद, जामुन, नीम, अमरूद, बेलपत्र, आंवला, नींबू, गुलमोहर, पारिजात, कढ़ी पत्ता इत्यादि के पेड़ पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते हुए जयपाल सिंह आर्य ने प्रोफेसर शैलेंद्र के सहयोग से खरल गांव में बच्चे बालक युवा वरिष्ठ नर -नारी के द्वारा लगभग 230 पौधों का प्रत्यारोपण करवाया।
इसके साथ ही सिरसौद बिचपड़ी, नरवाना एवं फुलिया खुर्द में भी पौधारोपण कार्यक्रम दादा पोता वाटिका अभियान में आयोजित किया गया। ऐसा ही कार्यक्रम जुलाई माह में सुदकैन कलां गांव में आयोजित किया गया था। अब तक इस मौसम में लगभग 515 पौधों का प्रत्यारोपण पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत किया गया है ।पौधारोपण कार्यक्रम में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों एवं महिलाओं तक सभी वर्गों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई है। बच्चों में अपने ही अंदाज में पौधों का संरक्षण एवं संवर्धन करने का जोश भविष्य के पर्यावरण संरक्षण के लिए मिल का पत्थर साबित होगा।इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका निखिल, चेतन, चंदन, मोहन आर्य, अजित सिंह इत्यादि की रही है।