नरवाना में आर्य समाज द्वारा वन महोत्सव और चरित्र निर्माण कार्यक्रम आयोजित, 600 पौधों का हुआ वितरण

आर्य समाज में साप्ताहिक सत्संग व पर्यावरण शुद्धि एवं समृद्धि के लिए यज्ञ हवन का आयोजन
नरेंद्र जेठी /नरवाना / 23 अगस्त 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो
अग्नि देव आचार्य और चंद्रकांत आर्य के निर्देशन में नरवाना में पर्यावरण संरक्षण और चरित्र निर्माण को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन आर्य समाज नरवाना संबद्धता आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा दयानंद मठ रोहतक द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को प्राचीन काल से ज्ञान विज्ञान और संस्कृत शिक्षा प्रदान करने के विधान के बारे में जानकारी दी गई।
चरित्र निर्माण और वैदिक शिक्षा का महत्व
अग्नि देव आचार्य ने विद्यार्थियों को जीवन में चरित्र निर्माण में मां-बाप और आचार्य के योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारतीय वैदिक शिक्षा में प्राचीन काल से विद्यार्थियों को ज्ञान विज्ञान और संस्कृत शिक्षा प्रदान करने का विधान रहा है। जीवन में ब्रह्मचर्य के महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर के सत्य स्वरूप को जानना, मानना, उपासना व चिंतन करना, वेद-अध्ययन, ज्ञान उपार्जन और वीर्य रक्षण ही ब्रह्मचर्य का मूल है। ब्रह्मचर्य और सत्याचरण के अनुपालन से सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं राष्ट्रीयता के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का भाव विचार और चरित्र प्रगाढ़ होता है। जीवन में ज्ञान विज्ञान से पवित्रता, शांति और प्रेम से मानवता और धार्मिक सहिष्णुता स्थापित किया गया है। अज्ञानता अंधकार और पाखंडता के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने तर्कशास्त्र के आधार पर विज्ञान सम्मत कार्य करने का आह्वान किया।
पर्यावरण संरक्षण और वन महोत्सव में पौधों का वितरण
वन महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रधान चंद्रकांत आर्य ने आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, आर्य कन्या महाविद्यालय एवं महर्षि दयानंद पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन में पेड़-पौधों के योगदान के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि पेड़-पौधे हमारी जीवन रेखा हैं। शुद्ध वायु के साथ जल एवं भूमि संरक्षण में पेड़-पौधों का अद्वितीय योगदान होता है। वन महोत्सव के दौरान दादा पोता वाटिका कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों में कुल 600 पौधों का वितरण किया गया। पौधे लगाने एवं उनकी देखभाल करने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रेरित किया गया। आर्य समाज के सौजन्य एवं जंगलात विभाग के सहयोग से अमरूद, जामुन, इमली, शहतूत, शीशम, सहजन, गुलमोहर, सिरस इत्यादि प्रजाति के पौधों का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि पेड़-पौधे संपूर्ण प्राणी जगत का उपकार करते हैं। पेड़-पौधे वायु की शुद्धता के साथ वर्षा, जल संरक्षण, भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का कार्य करते हैं। इस संपूर्ण कार्यक्रम में प्राचार्या श्रीमती मीना रानी, सीमा, मनोज कुमार, रिपन गर्ग एवं तीनों विद्यालयों के स्टाफ सदस्यों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।