कैथल की राष्ट्रीय लोक अदालत में 13 हजार से अधिक मामलों का हुआ निपटारा, नौ करोड़ से ज्यादा राशि के केस सुलझे

कैथल की राष्ट्रीय लोक अदालत में 13 हजार से अधिक मामलों का हुआ निपटारा, नौ करोड़ से ज्यादा राशि के केस सुलझे

राष्ट्रीय लोक अदालत में 13 हजार 260 मामलों का हुआ निपटारा

9.30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के मामलों का हुआ निपटान

कैथल /12 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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कैथल के न्यायिक परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में कुल 26 हजार 842 लंबित मामले सुनवाई के लिए रखे गए थे। इनमें से 13 हजार 260 मामलों का आपसी सहमति से सफल निपटारा किया गया। विभिन्न मामलों में कुल 9 करोड़ 30 लाख 97 हजार 907 रुपये की राशि से संबंधित मामलों का निपटान किया गया। यह सभी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार द्वारा दी गई है।

राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य

हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार इस लोक अदालत का आयोजन किया गया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कैथल की अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही की देखरेख में यह कार्यक्रम हुआ। इस राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा करना रहा। इसका उद्देश्य आमजन को त्वरित और सस्ता न्याय उपलब्ध करवाना है ताकि लोगों को अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।

विभिन्न बेंचों का किया गया था गठन

राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में विभिन्न बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों में कई प्रमुख न्यायिक अधिकारी शामिल रहे। इनमें प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय अजय वर्मा और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपमेश मोदी शामिल थे। इसके अलावा सिविल न्यायाधीश सीनियर डिवीजन डॉ. अमन इंद्र सिंह और सिविल न्यायाधीश जूनियर डिवीजन जैस्मिन कौर भी थे। साथ ही सिविल न्यायाधीश जूनियर डिवीजन कैथल गगन ठाकुर और माधव मित्तल ने भी भाग लिया। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश सीनियर डिवीजन गुहला डिवीजन अक्षय कुमार भी इन बेंचों में शामिल रहे।

आपसी सहमति से सुलझाये गए मामले

लोक अदालत में मामलों का निपटारा पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से किया जाता है। इसमें किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं होती है। इसके विपरीत दोनों पक्षों के बीच पुनः स्नेह, सौहार्द्र और बंधुत्व की भावना स्थापित होती है। लोक अदालत त्वरित और सस्ते न्याय का एक बहुत ही महत्वपूर्ण माध्यम है। इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है। लोक अदालत में विभिन्न आपराधिक, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम विवाद और राजस्व सहित अन्य मामलों का निपटान किया गया।

न्यायालय शुल्क की नहीं होती आवश्यकता

लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए किसी भी प्रकार के न्यायालय शुल्क की आवश्यकता नहीं होती है। यदि किसी पक्षकार द्वारा न्यायालय शुल्क पहले ही जमा कराया गया है तो वह वापस मिल जाता है। लोक अदालत में विवाद का निपटारा होने पर वह शुल्क पूरी तरह से वापस कर दिया जाता है। इससे आम जनता को वित्तीय राहत भी मिलती है और उनके समय की भी बचत होती है।

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