शिक्षा वह शक्ति है जो मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास जगाकर चरित्र का निर्माण करती है: मुख्यमंत्री नायब सैनी

शिक्षा वह शक्ति है, जो मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास कर उसके चरित्र का निर्माण करती हैं: नायब सैनी
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की 22वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में की शिरकत
मानव गर्ग /लाडवा / 8 सितंबर2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की 22वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में शिरकत की। लाडवा के डीबीएस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की 22वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विशेष रूप से शिरकत की। मुख्यमंत्री ने देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही उन्होंने ऑडिटोरियम हॉल का उद्घाटन भी किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा वह शक्ति है जो मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास कर उसके चरित्र का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिक विज्ञान और तकनीक में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसा करके बच्चे ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी जी के सपने को साकार कर रहे हैं। बच्चों के हाथों में आधुनिक तकनीक है और हृदय में करुणा है। उनकी दृष्टि विश्वव्यापी होने के साथ-साथ कदम भारत की मिट्टी से जुड़े हैं। ऐसा करके उन्होंने अपनी संस्कृति और मातृभाषा को गौरव प्रदान किया है। आज सभी शिक्षण संस्थाओं में आधुनिकता और भारतीय संस्कारों का जो सुंदर संगम दिखाई देता है, वह इसी दूरदर्शी सोच का विस्तार है।
मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी के तप, त्याग, साधना और मानव-कल्याण के संकल्प को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनका जीवन समय की सीमाओं में नहीं बंधता है। वे शरीर से हमारे बीच न भी रहें तो भी उनके विचार समाज की चेतना में हमेशा जीवित रहते हैं। उनकी वाणी सबको मार्ग दिखाती है और उनके कार्य हमेशा प्रेरणा देते हैं। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों का चरित्र गढ़ने का काम करते हैं। ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी जी ऐसे ही एक दिव्य और विराट व्यक्तित्व थे। उनका जीवन अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए था। उनका ज्ञान प्रदर्शन के लिए नहीं बल्कि जनकल्याण के लिए था। उनकी साधना संसार से विमुख होने के लिए नहीं बल्कि संसार के दुख दूर करने के लिए थी।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने हमारे धर्म ग्रंथों का गहन अध्ययन किया था। उनकी महानता यह थी कि उन्होंने उस ज्ञान को अपने जीवन में पूरी तरह उतारा था। उन्होंने वेदों के ज्ञान को विद्यालयों तक पहुंचाया था। उन्होंने गीता के कर्मयोग को जनसेवा तक पहुंचाया था। उन्होंने भारतीय संस्कृति के संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया था। स्वामी जी ने अपने विचारों को केवल उपदेशों तक कभी सीमित नहीं रखा। उन्होंने हमेशा धर्म व राष्ट्र को सर्वोपरि माना था। उन्होंने सेवा के संकल्प को संस्थाओं का रूप दिया था। उनके मार्गदर्शन में दो संस्कृत महाविद्यालय, तीन वेद विद्यालय, एक कन्या महाविद्यालय और एक विद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना हुई है और उनका संचालन हो रहा है।
स्वामी जी ने धर्म को कभी केवल पूजा-पद्धति नहीं माना था। उनके लिए भूखे को भोजन देना ही सबसे बड़ा धर्म था। रोगी को उपचार उपलब्ध कराना उनके लिए धर्म था। असहाय का हाथ पकड़ना उनके लिए धर्म था। अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का दीपक जलाना उनके लिए धर्म था। श्री जयराम विद्यापीठ के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने इंसान बनाने का सपना देखा था। इस सपने को पूरा करने के लिए अच्छी शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। संस्थान द्वारा अनेक प्रकार के संस्थान खोलकर शिक्षा देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इन संस्थानों में शिक्षा, संस्कार, और संस्कृति के माध्यम से उनके सपने को साकार किया जा रहा है। यहां से शिक्षा ग्रहण करके बच्चे देश के किसी न किसी क्षेत्र में अपना पूरा सहयोग देंगे।
गुरु का आशीर्वाद और मां-बाप की कृपा बच्चों पर होना बहुत जरूरी है। युवाओं को अपने मां-बाप व गुरु का हमेशा आदर और मान-सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने वाला बच्चा जीवन में हमेशा तरक्की करता है। कार्यक्रम के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेनानंद महाराज और प्रोफेसर रमेश कुमार पाण्डेय को अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मौके पर महानिर्वाण अखाड़े के महामंडलेश्वर रविंद्र पुरी महाराज, निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर रविंद्र पुरी महाराज, महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद महाराज, जूना अखाड़े के महंत स्वामी देवानंद महाराज और महामंडलेश्वर रमेश्वरानंद सरस्वती महाराज मौजूद रहे। इसके अलावा स्वामी बंसीपुरी महाराज, महेश मुनि महाराज, स्वामी ब्रहमदास महाराज, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व मंत्री जेपी दलाल और पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रभारी कैलाश सैनी, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन, एसडीएम राजेश कुमार सोनी, चेयरमैन सुभाष कलसाना, चेयरमैन रविंद्र सांगवान, चेयरमैन गुरनाम सैनी, जिला अध्यक्ष रमेश सैनी, चेयरमैन डॉ गणेश दत्त, चेयरपर्सन साक्षी खुराना, मंडल अध्यक्ष शिव गुप्ता और नायब सिंह पटाक माजरा आदि लोग भी मौजूद रहे।