युवाओं के ज्ञान और शोध से मजबूत बनेगा हरियाणा : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

हरियाणा को अनुसंधान और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उच्चतर शिक्षण संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के दौरान 90 शोध परियोजनाओं के लिए कुल 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
चंडीगढ़ में जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पंचकूला के स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान में आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
युवाओं के ज्ञान और शोध पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी देश या प्रदेश की असली ताकत उसकी बड़ी-बड़ी इमारतों और भवनों से तय नहीं होती है। प्रदेश की वास्तविक ताकत उसके युवाओं के ज्ञान, शोध और नवाचार से ही मजबूत होती है। उन्होंने सभी शोधकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रदेश के विकास और समाजहित से जुड़े विषयों पर गहन शोध करें। साथ ही उन्होंने नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए अनुसंधान और नवाचार को और अधिक बढ़ावा देने की बात कही।
इस अवसर पर महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं निजी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी-अपनी परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद द्वारा इन सभी शोधकर्ताओं को 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वर्ष 2026-27 के बजट में ‘हरियाणा विजन-2047’ को धरातल पर उतारने के लिए ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि’ के वास्ते 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
समाज की समस्याओं का समाधान है उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध का विषय केवल शोध पत्र प्रकाशित करने या किताबें लिखने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। शोध का मुख्य उद्देश्य समाज और आम लोगों के जीवन को सरल बनाना होना चाहिए। ज्ञान और शोध में इतनी बड़ी शक्ति होती है कि इनके माध्यम से समाज की ज्वलंत समस्याओं का आसानी से समाधान किया जा सकता है। आज के समय में जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादन जैसी गंभीर समस्याएं हमारे सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। शोधकर्ता इन सभी विषयों पर गहन अनुसंधान करके इनके समाधान में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दे सकते हैं।
उन्होंने पानी के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी एक प्राकृतिक संसाधन है जिसका कृत्रिम निर्माण नहीं किया जा सकता है। पानी बचेगा तभी हमारा आने वाला कल और जीवन सुरक्षित रहेगा। इसलिए इस विषय पर हम सभी को अधिक से अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पानी की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है। उद्योगों को भी पानी की भारी जरूरत है, जबकि दूसरी तरफ भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। इसके साथ ही भूजल की गुणवत्ता भी लगातार प्रभावित हो रही है। शोध के माध्यम से यह पता लगाया जाना बेहद जरूरी है कि भूजल स्तर को कैसे सुधारा जाए और पानी की गुणवत्ता को कैसे बेहतर बनाया जाए।
शिक्षा मंत्री और परिषद के आंकड़े
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कार्यक्रम में जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि’ के तहत 90 शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है। महिपाल ढांडा ने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री द्वारा उच्च शिक्षा और युवाओं के लिए की गई घोषणाओं को पूरी तरह लागू किया जाएगा। हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद ने इन घोषणाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने का पूरा ढांचा पहले ही तैयार कर लिया है।
हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. के.सी. शर्मा ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत कुल 350 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी आवेदनों में से 163 आवेदनों को स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अनुमोदित किया गया था। इसके बाद अंत में कुल 90 परियोजनाओं के आवेदनों को अंतिम रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इन स्वीकृत परियोजनाओं में कुल 75 संकाय सदस्यों तथा 15 विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।