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Uttar Pradesh

अधिकांश अप्रशिक्षित चिकित्सक ही बन जाते है मरीजों के लिये यमराज

December 20, 2018 06:21 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

अधिकांश अप्रशिक्षित चिकित्सक ही बन जाते है मरीजों के लिये यमराज 
        तीमारदारों की अज्ञानता मरीजों पर पड रही भारी 
किशोर राठौर 
शाहाबाद, हरदोई। बैसे तो चिकित्सकों को समाज काफी सम्मान के भाव से देखता है यह सम्मान इस बात से ही परिलक्षित होता है कि लोग चिकित्सकों को धरती का भगवान तक कहते हैं लेकिन नगर तथा आसपास के क्षेत्रों में अप्रशिक्षित चिकित्सक अपने दायरे से हटकर मरीजों का इलाज करने से बाज नहीं आ रहे हैं जिसके चलते अक्सर मरीज असमय ही मौत के आगोश में समा जाते हैं यदि यह कहा जाये कि अधिकांश अप्रशिक्षित चिकित्सक ही अक्सर मरीजों के लिये यमराज बन जाते हैं तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। 
       हैरानी की बात यह है कि तमाम अप्रशिक्षित चिकित्सको की योग्यता काफी कम है। कोई हाईस्कूल पास है तो कोई इण्टरमीडिएट वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो पूर्व माध्यमिक शिक्षा ग्रहण कर सीधे चिकित्सक बन बैठे। कुछ तो ऐसे उदाहरण भी है कि जो दूसरे व्यवसाय में लगे थे लेकिन अपेक्षित लाभ न होने के चलते चिकित्सा व्यवसाय में लीन हो गये। इस तरह के चिकित्सकों का मकड़जाल देहात क्षेत्रों के अलावा नगर में भी बहुतायत से फैला हुआ है। ऐसा भी नहीं है कि कानून की दृष्टि से यह अवैध कारोबार लुकाछिपी कर चलाया जा रहा हो बल्कि यह नाजायज कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। नगर में ही कई अप्रशिक्षित चिकित्सको के वाकायदा क्लीनिक बने हुये है जो किसी निर्जन या सूनसान स्थान पर नहीं बल्कि मुख्य सड़क के किनारे स्थित होकर मानों सरकारी व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हो। इन अवैध क्लीनिकों की जानकारी सम्बन्धित विभाग के अलावा स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस विभाग को भी है लेकिन इन अवैध क्लीनिकों पर अंकुश लगाने की जोहमत कोई नहीं उठाना चाहता जिसको लेकर संबन्धित अधिकारियों की सत्य निष्ठा पर उंगली उठना स्वाभाविक है। 
     आर्थिक कमजोरी तथा तीमारदारों की अज्ञानता इन अप्रशिक्षित चिकित्सको की जहां जेबें भरने में सहायक हो रही है वहीं यदा-कदा मरीजों को असमय ही मौत के आगोश में भी समा जाते है। तीमारदारों की अज्ञानता तथा कम खर्चा कर मरीज को ठीक कराने की लालसा ही मरीजों को इन अप्रशिक्षित चिकित्सको तक ले जाने को विवश करती है। स्थिति तब भयावह हो जाती है जब गंभीर रोगों का इलाज भी यह स्वनामधन्य चिकित्सक करने लगते हैं लेकिन बीमारी के समुचित इलाज का ज्ञान न होने के चलते अक्सर मरीज दुनिया से ही चल बसता है। 
    कानून की दृष्टि से बचने के लिये भी कई मरीज इन अप्रशिक्षित चिकित्सको की शरण में जाते है। अनैतिक प्रसव तथा गैर कानूनी गर्भपात एवं प्वायजनिंग केश इनकी आमदनी का प्रमुख स्रोत सिद्ध हो रहे हैं। कुछ चिकित्सक तो अंग्रेजी भाषा में नाम तक नहीं लिख पाते लेकिन ऐलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करने के साथ ही साथ आपरेशन तक कर डालते हैं। 
    एक तरफ जहां अप्रशिक्षित चिकित्सक लोगों की जान के दुश्मन बन गये हैं वहीं दूसरी ओर बीयूएमएस तथा आयुर्वेदिक चिकित्सक भी बिना किसी मान्य प्रशिक्षण के आयुर्वेदिक इलाज धड़ल्ले से कर रहे हैं। मरीज से पैसे ऐंठने के चक्कर में बिना किसी जानकारी के इंजेक्शन लगाना इन चिकित्सको का स्वभाव बन गया है। कुछ फर्जी चिकित्सको ने अपने जान पहचान अथवा रिश्तेदार चिकित्सकों का बोर्ड लगा कर भी अपने गैर कानूनी धंधे को अंजाम दे रहे हैं ताकि जांच के दौरान बचा जा सके। चिकित्सा परिषद के प्रमाण पत्र के बिना चिकित्सा व्यवसाय चलाने में नगर में दांत और हड्डी के डाक्टर भी बहुतायत में मौजूद है जो किसी मान्य डिग्री के सहारे नहीं बल्कि किसी चिकित्सक के यहां कम्पाउंडरी करने के बाद सम्बंधित विभाग के अधिकारियों के रहमो करम 
पर अपने गैर कानूनी धंधे को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के रवैये को देखते हुये मरीजों की जान के इन दुश्मनों पर फिलहाल रोक लगते दिखाई नहीं देती क्योंकि अक्सर जांच के दौरान पकडे़ जाने पर भी मेडिकल अधिनियम की गैर दस्तंदाजी धाराओं के तहत ही अभियोग पंजीकृत कराये जाते हैं जबकि मरीजों के साथ धोखाधड़ी करने अथवा दस्तंदाजी धाराओं में मुकदमा पंजीकृत नहीं कराया जाता जिससे मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने बाले बचते रहते हैं। 

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