Tuesday, June 25, 2019
 
BREAKING NEWS
नगर परिषद कैथल के सफाई कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से अंगूरी देवी को चुना प्रधान पत्रकार संघ के प्रदेशाध्यक्ष बने तरावड़ी के संजीव चौहानलाड़वा हल्के मे मल्टीपल खेल स्टेडिरूम बनवाना होगा प्राथमिकता : संदीप गर्गमुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व मे लाड़वा हल्के ने छुए विकास के नए आयाम : पवन सैनी भाजपा विधायक ने मंत्री के सामने लगाए एसपी मुर्दाबाद के नारेये मर्द बेचारा फिल्म की फरीदाबाद में हो रही शूटिंगअमेठी में पंचायत उपचुनाव को लेकर बजा बिगुल, डॉ योगेश कुमार बनाये गये बाजार शुक्ल चुनाव अधिकारीशाहाबाद- निजी अस्पताल में चल रहा था सेक्स रैकेट, कई पकडे गए नए-नए कानून योजना तुरंत बणा दिए तैयार तनै,हरियाणा में ठाठ ला दिए बीजेपी सरकार तनै-डीपीआरओ युवा चेहरों को मौका मिला तो बदल जाऐंगे राजनीति के मायने

National

फोन पर अधिक बात करना है खतरनाक,कैंसर हो सकता है

December 23, 2018 05:19 PM
अटल हिन्द ब्यूरो
फोन पर अधिक बात करना है खतरनाक, कैंसर हो सकता है
-------अटल हिन्द न्यूज ----
■ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सेलफोन का इस्तेमाल करने वालों के लिए चेतावनी दी है। उसका कहना है कि सेलफोन और अन्य वायरलेस उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से कैंसर हो सकता है। डब्ल्यूएचओ से जुड़ी कैंसर पर शोध करने वाली इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आइएआरसी) ने निष्कर्ष पेश किया। उसका कहना है कि मोबाइल फोन जैसे उपकरणों के इस्तेमाल से उत्पन्न होने वाले विद्युत चुंबकीय क्षेत्र से कैंसर की आशंका पैदा होती है। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि सेलफोन आने के बाद मस्तिष्क में होने वाले एक प्रकार के कैंसर ‘ग्लिओमा’ के भी मामले  बढ़े हैं। इस समय दुनिया भर में कुल पांच अरब लोग सेलफोन का इस्तेमाल करते हैं। 2012 में डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की रिपोर्ट के मुताबिक, रोज आधे घंटे या उससे ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल करने पर 8-10 साल में ब्रेन ट्यूमर की आशंका 200-400 फीसदी बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिन भर में 24 से 30 मिनट फोन से करना सेहत के लिहाज से मुफीद है।
कैसे फैलता है रेडिएशन?
माइक्रोवेव रेडिएशन उन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के कारण होता है, जिनकी फ्रिक्वेंसी 1000 से 3000 मेगाहर्ट्ज होती है। माइक्रोवेव ओवन, एसी, वायरलेस कंप्यूटर, कॉर्डलेस फोन और दूसरे वायरलेस डिवाइसों से रेडिएशन बढ़ता है। फोन के अधिक इस्तेमाल की वजह से फोन से और मोबाइल टॉवर से रेडिएशन अधिक फैलता है, जो सबसे खतरनाक साबित हो सकता है। 
रेिडएशन को लेकर क्या है मानक
जीएसएम टावरों के लिए रेडिएशन लिमिट 4500 मिलीवॉट/मी. स्क्वेयर तय की गई। लेकिन इंटरनैशनल कमिशन ऑन नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन (आईसीएनआईआरपी) की गाइडलाइंस जो इंडिया में लागू की गईं, वे दरअसल शॉर्ट-टर्म एक्सपोजर के लिए थीं, जबकि मोबाइल टॉवर से तो लगातार रेडिएशन होता है। इसलिए इस लिमिट को कम कर 450 मिलीवॉट/मी. स्क्वेयर करने की बात हो रही है। ये नई गाइडलाइंस 15 सितंबर से लागू होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लिमिट भी बहुत ज्यादा है और सिर्फ 1 मिलीवॉट/मी. स्क्वेयर रेडिशन भी नुकसान देता है। यही वजह है कि ऑस्िट्रया में 1 मिलीवॉट/मी. स्क्वेयर और साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया में 0.01 मिलीवॉट/मी. स्क्वेयर लिमिट है।
SAR मोबाइल के मानक देखकर ही खरीदें फोन? 
भारत समेत कई देशों में मोबाइल और उनके पार्ट्स निर्यात करने वाली कंपनी यूनिवर्सल एग्जिम के प्रोडक्ट मैनेजर आशुतोष शुक्ला बताते हैं, “रेडिएशन इस पर भी निर्भर करता है कि आपके मोबाइल की SAR (विशिष्ट अवशोषण दर) वैल्यू क्या है? अधिक SAR वैल्यू के फोन पर बात करना अधिक नुकसानदेह है। देश में अधिकतर फोन SAR मानक के ही हैं।” उन्होंने बताया, “बाजार में मोबाइल आने से पहले सभी कंपनियां SAR टेस्ट करवाती हैं। जिसकी वैल्यू हर मोबाइल के पीछे लिखी भी होती है। आशुतोष का कहना है मोबाइल में लगे एंटेना की क्वालिटी ही रेडियो फ्रिक्वेंसी निर्धारित करती है। मोबाइल जितना सस्ता होगा, उसमें निकलने वाला रेडिएशन उतना ही ज्यादा घातक होगा।”
बिना SAR संख्या वाला मोबाइल न खरीदें
आपके मोबाइल के पीछे छपी जानकारी ही SAR कहलाती है। कम SAR संख्या वाला मोबाइल ही खरीदें, क्योंकि इससे रेडिएशन का खतरा कम ही होता है। इसके अलावा आप मोबाइल कंपनी की वेबसाइट पर जाकर यूजर मैनुअल से यह संख्या चेक कर सकते हैं। कुछ भारतीय कंपनियां ऐसी भी हैं, जो SAR संख्या का खुलासा नहीं करतीं। ऐसे में ग्राहकों को बिना एसएआर वाले मोबाइल फोन खरीदने से बचना चाहिए।
भारत में SAR के लिए क्या हैं नियम?
भारत में अभी तक हैंडसेट्स में रेडिएशन के यूरोपीय मानकों का पालन होता है। इनके मुताबिक, हैंडसेट का SAR लेवल 2 वॉट प्रति किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। एक्सपर्ट इसे सही नहीं मानते। उनके मुताबिक, यूरोपीय लोगों की तुलना में भारतीयों में कम बॉडी फैट होता है। इसके चलते रेडियो फ्रिक्वेंसी का भारतीयों पर अधिक असर पड़ता है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गाइडलाइंस में यह सीमा 1.6 वॉट प्रति किग्रा कर दी गई है, जोकि अमेरिकन स्टैंडर्ड है। 
ये भी ध्यान रखें
यदि सिग्नल कम आ रहे हों, तो मोबाइल का इस्तेमाल न करें। इस दौरान रेडिएशन अधिक होता है। पूरे सिग्नल आने पर ही मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही खुले में मोबाइल का इस्तेमाल करना बेहतर है, क्योंकि इससे तरंगों को बाहर निकलने का रास्ता मिल जाता है।
बात करते समय रेडिएशन से बचें
ब्लैकबेरी फोन में एक मैसेज आता है, जो कहता है कि मोबाइल को शरीर से 25 मिमी (करीब 1 इंच) की दूरी पर रखें। सैमसंग गैलेक्सी एस-3 में भी मोबाइल को शरीर से दूर रखने का मेसेज आता है। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. रनवीर सिंह बताते हैं, “मोबाइल पर लंबी बात से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा ब्लूटूथ से बात करते समय भी एक फीट की दूरी रखें।

Have something to say? Post your comment

More in National

लाड़वा हल्के मे मल्टीपल खेल स्टेडिरूम बनवाना होगा प्राथमिकता : संदीप गर्ग

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व मे लाड़वा हल्के ने छुए विकास के नए आयाम : पवन सैनी

उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने यह ठाना है कि अपनी विधानसभा के प्रत्येक नगरिक को हरिद्वार की तीर्थ यात्रा पर ले जाना है।

युवा भाजपा नेता अमन गोयल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

युवा भाजपा नेता अमन गोयल ने योग करने वाले छात्राओं को सम्मानित किया।

पृथला विधानसभा की जनसेवा करना मेरा एक मात्र उद्देश्य :-बसपा नेता सुरेन्द्र वशिष्ठ

सेक्टर 16 स्थित दिगम्बर जैन मन्दिर में नैतिक शिक्षण शिविर का समापन समारोह एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया

मुख्यमंत्री खट्टर व राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के सहयोग से पृथला विधानसभा में सबसे ज्यादा विकास हुआ:-विधायक टेकचंद शर्मा।

कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को पत्र लिखकर अमितशाह ने भाजपा की ऐतिहासिक जीत के लिए धन्यावाद किया।

विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहे कांग्रेस कार्यकर्ता: निर्मल सिंह