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52 साल में पहली बार खिला कमल , कभी नही जीत पाई थी जींद सीट से बीजेपी

January 31, 2019 09:41 PM
राजकुमार अग्रवाल
कमल खिलाने की चुनौती पार कर गई बीजेपी
कभी नही जीत पाई थी जींद सीट से बीजेपी 
-राजकुमार अग्रवाल -
atalhind@gmail.com
094161-11503
कैथल । हरियाणा की राजनीति को दिशा देते आ रहे जींद जिले की जिला मुख्यालय की जींद विधानसभा सीट बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल रही थी अब बीजेपी ने इस मुशिकल को पार करते हुए 52 साल में पहली बार कमल खिलाया। इस सीट पर बीजेपी आज तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। इनैलो विधायक डा. हरिचंद मिढा के निधन से खाली हुई जींद विधानसभा सीट के उप-चुनाव को लेकर सरगर्मियां उसी समय शुरू हो गई थी। आज तक जींद विधानसभा सीट पर बीजेपी कभी अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। जब-जब बीजेपी ने जींद विधानसभा सीट पर अकेले चुनाव लड़ा, वह मुख्य मुकाबले से बाहर रही। इसमें केवल 2014 के विधानसभा चुनाव अपवाद रहे, जब बीजेपी के उम्मीद्वार पूर्व सांसद सुरेंद्र बरवाला कड़े मुकाबले में इनैलो के डा. हरिचंद मिढा से लगभग 2200 मतों के अंतर से पराजित हुए थे। इस एक चुनाव को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी जींद विधानसभा सीट पर कभी मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ पाई। 

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ये रहे थे अब तक बीजेपी के हालात-
1991 में बीजेपी ने जींद सीट पर अपने सबसे मजबूत उम्मीद्वार पंडित श्यामलाल नंबरदार को चुनावी दंगल में उतारा था। उस समय मुख्य मुकाबला इनैलो के टेकराम कंडेला और कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता के बीच हुआ था, जिसमें मांगेराम गुप्ता ने टेकराम कंडेला को लगभग 18 हजार मतों के अंतर से पराजित किया था। बीजेपी के पंडित श्यामलाल नंबरदार को उस समय लगभग 8 हजार वोट मिले थे। साल 2000 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी का सत्तारूढ़ दल इनैलो के साथ गठबंधन था और इस गठबंधन में जींद विधानसभा सीट बीजेपी के हिस्से में आई थी। बीजेपी ने तब लाला रामेश्वरदास गुप्ता को उम्मीद्वार बनाया था। इनैलो की तरफ से बागी उम्मीद्वार के रूप में गुलशन आहुजा ने भी चुनावी दंगल में ताल ठोंक दी थी। इस चुनाव में मुकाबला कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता और इनैलो के बागी उम्मीद्वार गुलशन आहुजा के बीच रहा था, जिसमें बाजी मांगेराम गुप्ता ने मारी थी। बीजेपी उम्मीद्वार लाला रामेश्वरदास गुप्ता मुख्य मुकाबले से बहुत दूर रह गए थे। 2005 में जींद से बीजेपी ने श्रीनिवास वर्मा को चुनावी दंगल में उतारा था और वर्मा तमाम मेहनत के बावजूद महज 12 हजार वोट ही ले पाए थे और इसमें भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता और इनैलो के सुरेंद्र बरवाला के बीच हुआ था। 2009 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जींद विधानसभा सीट पर स्वामी राघवानंद को उम्मीद्वार बनाया था और वह बीच चुनाव में ही बीजेपी की भीतरघात से तंग आकर रिटायर हो गए थे। अब 2019 में पहली बार बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब हो गई।

 
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यह भी हैं जींद के रोचक आंकड़े
जींद विधानसभा सीट के कुछ रोचक आंकड़े भी हैं। यह आंकड़े पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनकी पार्टी केवल 1996 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रही थी। इसके अलावा कभी भी उनकी पार्टी जींद में मुख्य मुकाबले से बाहर नहीं हुई। 
विधानसभा चुनाव साल चौधरी देवीलाल की पार्टी की स्थिति उम्मीद्वार का नाम 
1977 दूसरा स्थान प्रताप सिंह
1982 पहला स्थान बृज मोहन सिंगला
1987 पहला स्थान प्रो. परमानंद
1991 दूसरा स्थान टेकराम कंडेला
1996 तीसरा स्थान डा. एसडी बिंदलिश
2000 दूसरा स्थान गुलशन भारद्वाज
2005 दूसरा स्थान सुरेंद्र बरवाला
2009 पहला स्थान डा. हरिचंद मिढा
2014 पहला स्थान डा. हरिचंद मिढा
2019 दूसरा स्थान देवीलाल का पडपौत्र -दिग्विजय चौटाला

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