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रगड़ा खा गए रणदीप रणदीप सुरजेवाला को हराने में कई फैक्टरों ने किया काम

February 03, 2019 04:10 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

इलाज" से रगड़ा खा गए रणदीप

रणदीप सुरजेवाला को हराने में कई फैक्टरों ने किया काम

----कुलदीप श्योराण ----
जींद। क्या यह सही है कि जींद उपचुनाव परिणाम ने रणदीप सुरजेवाला के रसूख को चकनाचूर करने का काम किया है?

-क्या यह सही है कि करारी हार के साथ रणदीप सुरजेवाला की सीएम पद की दावेदारी कमजोर पड़ गई है?

-क्या यह सही है कि गैरजाट वोटरों की जाट प्रत्याशियों का इलाज करने की मूहिम में रणदीप भी शिकार हो गए?

-क्या यह सही है कि अशोक तंवर के अलावा बाकी सभी बड़े कांग्रेसी नेताओं ने रणदीप का इलाज करने का काम किया?

-क्या यह सही है कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने रणदीप की अकड़ का इलाज करने का काम किया?

उपरोक्त सभी सवालों का जवाब हां में है।

जींद उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सुरजेवाला की करारी हार के पीछे कई फैक्टरों ने काम किया। सीएम पद की दावेदारी में सबसे आगे निकलने की महत्वाकांक्षा में रणदीप सुरजेवाला जींद चुनाव की जंग में उतरे थे लेकिन उनको यह नहीं पता था कि वह
"पेट वाले के चक्कर में गोदी वाले से भी हाथ धो बैठेंगे।"
जींद उपचुनाव के परिणाम से पहले रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार हो चुके थे और सीएम पद के प्रबल दावेदारों की कतार में शामिल हो गए थे लेकिन उपचुनाव में बड़ी मुश्किल से जमानत बचने के कारण उनकी सियासी साख अर्श से फर्श पर आ गई है और वे सीएम पद के दावेदारों की कतार से निकल कर एक सामान्य विधायक ही साबित हो गए हैं।
रणदीप सुरजेवाला को हराने के लिए तीन इलाज फैक्टर जिम्मेदार रहे -

इलाज नंबर वन

गैर जाट वोटरों ने किया जाट प्रत्याशियों का इलाज

चुनाव में गैर जाट वोटरों में नीचे ही नीचे एक मुहिम जोर पकड़ चुकी थी कि 1 वोट से 3 जाटों का इलाज करना है। रणदीप सुरजेवाला भी इलाज के स
शिकारों में शामिल थे। इसलिए कांग्रेस का प्रत्याशी होने के बावजूद उनको गैर जाटों के वोट नहीं मिले। अगर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का समर्थन नहीं उनके साथ होता तो वे प्रमोद सहवाग के 15000 के आंकड़े से भी नीचे रह जाते।

इलाज नंबर 2

बड़े नेताओं ने किया महत्त्वाकांक्षा का इलाज

कांग्रेस के तमाम बड़े नेता यह समझ चुके थे कि रणदीप सुरजेवाला सीएम पद की दावेदारी में सबसे आगे निकलने के लिए जींद के उप चुनाव में उतरे हैं।
इन नेताओं को यह बखूबी पता था कि अगर मंदीप सुरजेवाला उप चुनाव जीत गए तो वे उनके सिर पर बैठ जाएंगे और पार्टी हाईकमान उनको प्रदेश का सबसे दमदार नेता मान लेगा।
ऐसा होना किसी भी बड़े नेता को गवारा नहीं था। इसलिए अशोक तंवर के अलावा बाकी सभी नेताओं ने उनका इलाज करने का काम किया। जिन नेताओं की भारी भरकम फौज के बलबूते पर रणदीप चुनाव जीतने की हसरत रखते थे उन्हीं के चक्रव्यूह में फंस कर करारी हार के शिकार हो गए।

इलाज नंबर 3

स्थानीय नेताओं ने किया इलाज

कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी रणदीप सुरजेवाला का इलाज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। टिकट के दावेदारों को यह महसूस हुआ कि उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है और जीत हासिल करने के बाद रणदीप उनको रगड़ा लगाने का काम करेंगे। इसलिए सभी स्थानीय नेताओं ने उनकी गोभी खोदने का काम किया।

बात यह है कि रणदीप सुरजेवाला हाईकमान के बलबूते पर बड़े नेताओं की चुनाव में ड्यूटी तो लगाने में सफल रहे लेकिन उनका समर्थन हासिल करने में नाकाम रहे।
कांग्रेसी नेता एक मंच पर जो नजर आए लेकिन उन्होंने फील्ड में घूम कर रणदीप को जिताने की बजाय उनकी हार का प्रबंध ज्यादा किया।
भाजपा ने गैर जाट वोटरों के ध्रुवीकरण को सफलतापूर्वक अपने पक्ष में अंजाम दिया जिसके चलते गैर जाट वोट कांग्रेस की बजाय भाजपा प्रत्याशी के साथ लामबंद हो गए। इसलिए रणदीप सुरजेवाला को करारी हार का सामना करना पड़ा।
स्थानीय नेताओं का भीतरघात भी रणदीप सुरजेवाला की चुनावी मुहिम की हवा निकालने का काम कर गया। बाहरी नेताओं और समर्थकों के बलबूते पर रणदीप सुरजेवाला ने जोरदार चुनावी मुहिम की शुरुआत की लेकिन हर दिन के साथ उनकी हकीकत की पोल खुलती चली गई और पार्टी के बागी नेताओं के मंसूबों के कारण वे जीत का सरताज बनने की बजाय सबसे शर्मनाक हार के गवाह बन गए। ज़ींद की चुनावी जंग जीतकर रणदीप सुरजेवाला सीएम पद की दावेदारी में सबसे आगे निकलने की हसरत रखते थे लेकिन शर्मनाक हार ने उनको एटम बम की बजाय फुस्स पटाखा साबित कर दिया जो उनके सियासी भविष्य पर कई तरह के सवालिया निशान लगाने का काम कर गया है।
जींद के चक्कर में वे कैथल के मजबूत किले में खुद दरार पैदा कर आए हैं जिसके कारण आगामी चुनाव में उनको कैथल में भी हार का काम में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
रणदीप सुरजेवाला
जींद बदल लेंगे- जिंदगी बदलेंगे
के नारे के साथ चुनावी मुहिम शुरू की थी लेकिन चुनाव परिणाम ने उनकी खुद की सियासी जिंदगी बदलने का काम कर दिया।

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