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खाटू श्याम में बाबा का मेला शुरू, श्याममय हुआ समूचा क्षेत्र, प्रतिदिन गुजरने लगे है श्याम प्रेमियों के जत्थे

March 09, 2019 05:13 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

खाटू श्याम में बाबा का मेला शुरू, श्याममय हुआ समूचा क्षेत्र, प्रतिदिन गुजरने लगे है श्याम प्रेमियों के जत्थे


-----मनोकामना पूर्ण करते है खाटू वाले श्याम बाबा


 सतनाली: राजस्थान के सीकर जिले में देश के लाखों करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक बाबा खाटू श्याम के धाम पर फाल्गुन मेला 8 मार्च से शुरू हो गया है मेलें में शिरकत करने के लिए श्याम भक्तों का बाबा के मंदिर तक जाने का सिलसिला जारी है।

 

 

दक्षिण हरियाणा के सतनाली, महेंद्रगढ़, बाढड़ा व लोहारू के रास्ते से खाटू धाम को जाने वाले श्याम भक्तों के पैदल जत्थों के कारण यहां का माहौल भी श्याममय होने लगा है। सतनाली के गांवों के अतिरिक्त बाढड़ा, लोहारू, महेंद्रगढ़, कनीना से भी सैकड़ों श्याम भक्त खाटू धाम के लिए पैदल रवाना हो रहे है तथा यह क्रम जारी है। इस पवित्र धाम की आभा तथा चमक की छटा इस क्षेत्र विशेष में ही नही अपितु सारे देश के कोने-कोने में फैली हुई है।

 

 

उल्लेखनीय है कि राजस्थान के खाटू धाम पर हर माह की सुदी एकादशी को छोटे-छोटे मेले लगते रहते हैं मगर वर्ष में दो बार फाल्गुन और कार्तिक माह में लगने वाले मेले राजस्थान में ही नही देश के अन्य राज्यों में भी विशाल माने जाते हैं। यहां पर लगने वाले इन भव्य मेलों में देश के कोने कोने से लाखों श्रद्धालु शिरकत करते हैं। अब की बार भी 8 मार्च से शुरू हुए मेलें के लिए श्रद्धालुओं के पैदल जत्थे जाने प्रारंभ हो गये है।

 


ऐसे पड़ा बर्बरक का नाम श्याम:-
बाबा श्री श्याम के बारे में बुजूर्गों का मत है कि श्री श्याम का असली नाम बर्बरीक था जो कि महाभारत में पांडव पुत्र भीम के पौत्र थे। उनका नाम श्री श्याम क्यों पड़ा? इसके बारे में प्रचलित है कि जब हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थान पर कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध चल रहा था तो बर्बरीक तीन बाण और धनुष लेकर रणभूमि में पहुंचा तब श्री कृष्ण ने पूछा कि आप कौन हैं तथा तीन बाण लेकर रणभूमि में क्या करने आए हैं।

 

 

इस पर बर्बरीक ने उत्तर देते हुए कहा कि मैं भीम पुत्र घटोत्कच का बेटा बर्बरीक हूं तथा अपने तीन बाणों से सारे संसार को पराजित कर सकता हूं और केवल एक बाण से ही मैं दोनो सेनाओं का संहार कर सकता हंू। यदि आपको विश्वास ना हो तो आप परीक्षा लेकर देख सकते हैं। जहां उन दोनो का वार्तालाप हो रहा था वहां पीपल का एक पेड़ था।

 

कृष्ण ने उसकी परीक्षा लेते हुए कहा कि तुम एक बाण से इस पीपल के सारे पत्ते बींधकर दिखाओ। इतना कहकर श्रीकृष्ण ने पीपल के एक पत्ते को अपने पैरों तले दबा लिया। श्रीकृष्ण की बात सुनकर बर्बरीक ने बाण चलाया जो पीपल के सभी पत्तों को बींधता हुआ श्रीकृष्ण के पैरों की तरफ आया तो बर्बरीक ने श्रीकृष्ण से कहा कि आप अपने पैर को हटा लीजिए वर्ना पत्ते के साथ आपके पैर में भी छेद हो जाएगा। यह सब देखकर श्रीकृष्ण को उसकी वीरता पर विश्वास हो गया। इसके पश्चात कृष्ण ने उससे पूछा कि वे किसकी तरफ से युद्ध में हिस्सा लेंगे। जवाब स्वरूप बर्बरीक ने कहा कि वेे उसकी तरफ से लडेंग़े जिसका पलड़ा कमजोर होगा।

 

 

यह सुनकर श्रीकृष्ण को गहरा आघात लगा तथा उन्हें यह युद्ध कभी ना समाप्त होने वाला युद्ध लगा। तब श्री कृष्ण ने कूटनीति का सहारा लेते हुए कहा कि तुम्हारी वीरता तो साबित हो गई मगर तुम्हारे अंदर दान वीरता का कोई गुण दिखाई नही दिया। तब बर्बरीक ने कहा कि आप मुझसे कुछ मांगकर देखिए तब आपको मेरी दान शीलता का पता चलेगा। तब श्री कृष्ण ने कहा कि युद्ध के लिए मुझे एक सच्चे बहादुर का शीश चाहिए, अगर तुम यह कार्य कर सको तो तुम्हारे दानीपन का पता चल जाएगा इतना सुनकर बर्बरीक ने शीश दान करना स्वीकार कर लिया तथा महाभारत का युद्घ देखने की इच्छा प्रकट की।

 

 

तब कृष्ण ने उसके शीश को ऊंचे पर्वत पर रखवा दिया तथा बर्बरीक के शीश ने सारा युद्ध देखा। बर्बरीक की बहादुरी तथा दान शीलता से खुश होकर कृष्ण ने उसे आशीर्वाद दिया कि तुम कलयुग में मेरे नाम से पूजे जाओगे। इतना कहकर कृष्ण ने शीश को नदी में बहा दिया जो वहां से बहकर खाटू पहुंचा। तभी से वहां पर श्याम बाबा के भव्य मेले लगते हैं। आज भी लोग उसे शीश के दानी के रूप में जानते हैं। एक अनुमान के अनुसार खाटू में प्रति वर्ष एक  करोड़ श्रद्धालु मनोकामना मांगते हैं श्रद्धालुओं के अनुसार यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नही गया। इतनी बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन के बावजूद यहां उनके ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हुई हैं। बाबा श्याम के भग्तो की अपार मान्यता व आस्था के चलते श्याम बाबा का मंदिर परिसर भी छोटा दिखाई देता है।

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