Saturday, August 17, 2019
 
BREAKING NEWS
इनैलो को मिल रहा है छत्तीस बिरादरी के लोगों का भरपूर समर्थन : सपना बडशामीशहीद की पत्नी संग जोड़ा भाई-बहन का नाता 18 अगस्त को होने वाली परिवर्तन रैली में लाडवा हल्के से जांएगें हजारों कार्यकत्र्ता : मेवा ङ्क्षसह बाबैन में ऐतिहासिक होगा जन आर्शीवाद यात्रा का स्वागत : रीना देवीखिलाडिय़ों के लिए स्टेडियम व बेटियों के लिए कॉलेज बनवाना होगा प्राथमिकता : गर्गफंस गए भूपेंद्र हुड्डा,कांग्रेस छोड़ने के अलावा नहीं बचा कोई विकल्परॉकी मित्तल ने ग्योंग गांव में शिक्षा एवं खेल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को सम्मानित कियाट्रक डाइवर व क्लीनर को बंधक बना ट्रक लेकर फरार, केस दर्जपंजाबी वर्ग की जनसँख्या के अनुसार राजनैतिक पार्टी दे टिकटें: अशोक मेहता। वीर सम्मान मंच कैथल के द्वारा अटारी बॉर्डर पर मनाया गया रक्षाबंधन उत्सव:-

Article

मोदी के लिए मुसीबत बनी तीन महिलाएं

March 19, 2019 01:01 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

मोदी के लिए मुसीबत बनी तीन महिलाएं
- सीतेश कुमार द्विवेदी-
लोकसभा आम चुनाव की घोषणा के साथ ही देश में नेताओं एवं राजनीतिक दलों की सरगर्मियां बढ़ गई हैं और चुनाव संबंधित गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्राी पद पर अपनी दूसरी पारी के लिए जोर लगा रहे नरेंद्र मोदी के लिए इस बार चुनाव में तीन महिलाएं चुनौती मुसीबत  बन गई हैं। मोदी के मार्ग में मायावती, ममता एवं प्रियंका बाधा बन गई हैं।
 संयोगवश ये तीनों महिलाएं जनवरी माह में जन्मी हैं किंतु विभिन्न आयु वर्ग की हैं। मायावती उत्तर  प्रदेश में लोकसभा की 80 सीट एवं सपा -बसपा गठबंधन के बल पर गरज रही हैं। ममता अपने प्रमुख प्रभाव वाले राज्य पश्चिम बंगाल से बाहर भी अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतार कर दायरा बढ़ा रही हैं। मायावती की भांति  ममता की नजर में भी प्रधानमंत्राी पद की कुर्सी है। इस हेतु ममता  ने भाजपा के मोदी, शाह, योगी  आदि के विरुद्ध मोर्चा खोल लिया है।

 

 

 

 


 कांग्रेस एवं राहुल गांधी के सामने अभी नहीं तो कभी नहीं की स्थिति है। उनके सामने परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। राहुल एवं कांग्रेस को लेकर कुछ नेता एवं पार्टियां बिदक रही हैं, कुछ पार्टियां कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल नहीं करना चाहती हैं तो कुछ को राहुल गांधी की अगुवाई पसंद नहीं है। वहीं कांग्रेस एवं राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती नरेंद्र मोदी हैं।
भाजपा एवं नरेंद्र मोदी को घेरने एवं मात देने पर ही कांग्रेसी अध्यक्ष राहुल गांधी का प्रधानमंत्राी पद हेतु मार्ग प्रशस्त होगा। इस हेतु तुरुप का पत्ता बनाकर प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर जिम्मेदारी दी गई है एवं उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी प्रचार का काम सौंपा गया है। कांग्रेस प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि एवं भाषण शैली को भुनाना  चाहती है।
 वैसे इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्राी पद के आकांक्षी बढ़ गए हैं। लगभग दर्जन भर नेताओं की नजर में प्रधानमंत्राी की कुर्सी है तो उनमें से कुछ एक्सीडेंटल प्रधानमंत्राी बनने की चाहत लिए हुए हैं। राष्ट्रीय दलों के अलावा क्षेत्राीय एवं छोटे दलों के नेता भी इस हेतु कतार में लगे हैं जबकि किसी के लिए भी यह लक्ष्य आसान नहीं है।

 

 

 

 

 


केंद्र में मात्रा पांच वर्ष सत्ता से दूर रहने के बाद कांग्रेस एवं राहुल सत्ता की भूख से बिलबिला रहे हैं।
बूढ़ी कांग्रेस पार्टी के 48 वर्षीय युवा नेता राहुल गाँधी की हालत भूख से अब और भी ज्यादा खराब हो रही है। इसी स्वार्थ की पूर्ति के लिये प्रियंका  को महासचिव बनाकर प्रचार हेतु मैदान में उतारा गया है।   
 प्रधानमंत्राी नरेंद्र मोदी उम्र 69 वर्ष, अपने प्रथम कार्यकाल में आरंभ किए अभियान एवं कार्य को आगे बढ़ाने के लिए देश में अपना दूसरा कार्यकाल चाहते हैं। इस हेतु चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पूर्व ही अपना प्रचार अभियान आरंभ कर दिया है और देशव्यापी धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। इसी के तहत बजट में उदारता एवं दरियादिली की गई। ताकि देश के मतदाताओं को अपने पक्ष में लाया जा सके।
इस सबके काट के लिए नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी की प्रियंका को सक्रिय राजनीति के मैदान में महासचिव बनाकर उतारा गया है। प्रियंका को अब तक पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी भले ही वह अपनी मां सोनिया गांधी एवं भाई राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्रा का काम देखती रही हैं। 12 जनवरी 1972 को जन्मी 47 वर्षीय प्रियंका गांधी मनोविज्ञान में स्नातक एवं शौकिया रेडियो संचालक हैं।
प्रियंका का विवाह 1977 में राबर्ट वाड्रा से हुआ। अब उनके दो बच्चे एक बेटा रेहान एवं एक बेटी मिराया हैं। प्रियंका पति राबर्ट वाड्रा का शुरू से ही विवादों से नाता रहा है। रियल एस्टेट के धंधे में उतर कर वाड्रा ने बेजा काम किया एवं अधिकाधिक लाभ उठाया है। इस हेतु आयकर विभाग उनके पीछे है। वह जमानत  पर हैं, यह प्रियंका के लिए नकारात्मक पक्ष है। कांग्रेस प्रियंका में उनकी दादी इंदिरा गांधी की छवि देखती है और उनकी भाषण शैली में उनको इंदिरा गांधी की भाषण शैली झलकती है जिसे प्रचार के दरमियान पार्टी अपने पक्ष में भुनाना चाहती है।

 

 

 

 

 

 


15 जनवरी 1956 को जन्मी  63 वर्षीय मायावती बीए, बीएड  एवं एलएलबी हैं। वह शिक्षिका थी जिसे छोड़कर काशीराम से जुड़ी, सक्रिय  राजनीति में उतरी। बसपा की कमान थाम वह चार बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्राी बन चुकी हैं। उसे पहली दलित महिला मुख्यमंत्राी बनने का सौभाग्य मिला अब पहली दलित महिला प्रधानमंत्राी बनाना चाहती हैं। इस हेतु सपा बसपा ने गठबंधन किया है।
5 जनवरी 1955 को जन्मी 64 वर्षीय ममता बनर्जी बंगाल में ममता दी,   ममता दीदी, बड़ी बहन के रूप में प्रसिद्ध हैं। वह लौह महिला कहलाती हैं  एवं उग्र भाषण देने के लिए प्रसिद्ध हैं। छात्रा नेता से कांग्रेस की राजनीति में उतरने वाली ममता दो बार सांसद एवं केंद्र में मंत्राी रह चुकी हैं। वह नरसिंह राव एवं अटल बिहारी बाजपेई मंत्रिमंडल में मंत्राी रह चुकी  हैं। वामगढ़ बंगाल में अपने गुस्सैल स्वभाव, तीखे एवं तल्ख तेवर के चलते वामपंथियों को हराकर दूसरी बार मुख्यमंत्राी की कुर्सी संभाल रही हैं। वह 20 मई 2011 से इस पद पर आसीन हैं।
वह इस्लामिक इतिहास में मास्टर हैं एवं वकालत की पढ़ाई की है। अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सर्वेसर्वा हैं। गुस्सैल एवं तुनकमिजाज हैं और लोकसभा चुनाव में दूसरे राज्य में अपना प्रत्याशी उतार कर अपना दायरा बढ़ाना चाहती हैं ताकि उनके सांसद बढ़ सके। ममता अपने को लोकसभा चुनाव में हाई लाइट करने के लिए उलटी सीधी हरकतें कर रही हैं। भाजपा, मोदी, शाह, योगी आदि का बेजा विरोध कर रही हैं।  
 इस तरह मोदी के मार्ग में तीन महिलाएं मायावती, ममता एवं  प्रियंका चुनौती, मुसीबत बनकर खड़ी हैं। वह भी मोदी की भांति धुआंधार प्रचार कर रही हैं। ये तीनों महिलाएं अलग-अलग  मोदी की राह में अवरोध बन रही हैं ताकि उन्हें  प्रधानमंत्राी पद का लक्ष्य हासिल हो सके। इस हेतु सभी एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। (अदिति)

Have something to say? Post your comment