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त्वरित टिप्पणी-एक तीर से दो निशाने...

April 10, 2019 09:13 PM
सौरभ जैन अंकित

एक तीर से दो निशाने...


त्वरित टिप्पणी :

 

सौरभ जैन 'अंकित'


तीन दिन पहले आयकर विभाग ने जिस तरह से मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां छापामार कार्रवाई की थी, उससे यही संदेश गया था कि जल्दी ही क्रिया की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। यह अलग बात है कि आयकर छापे में कमलनाथ के करीबी के यहां कुछ खास हासिल नहीं हो सका, जबकि दूसरे लोग बुरी तरफ उलझते नजर आए।
इसके बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा था कि नोटों के साथ पकड़ा गया आदमी भाजपा का है। इस प्रकार कथित तौर पर केंद्र के इशारे पर आईटी की यह कार्रवाई उल्टी पड़ गई और अब जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान ई-टेंडरिंग घोटाले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है तो यह भी कहना पड़ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम ने शिवराज टीम को पूरी तरह निपटाने का इंतजाम कर दिया है। इसके साथ ही विरोधी टीम इस कोशिश में होगी कि पूरी तरह राजनीति के हाशिये पर पहुंचा दिए गए लालकृष्ण आडवाणी युग के ताबूत पर एक और कील भी ठोंक दी जाए। गौरतलब है कि ई-टेंडरिंग घोटाला मामले की जांच किए जाने की मांग कांग्रेस पहले ही प्रधानमंत्री मोदी से कर चुकी थी। इसलिए यह एक अच्छा अवसर था कि विरोधियों को पूरी तरह निपटा दिया जाए। गौरतलब है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने सात कंपनियों के अलावा मध्य प्रदेश की पूर्व शिवराज सरकार के पांच अलग-अलग विभागों के आला अधिकारियों और अज्ञात नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस प्रकार अब ई-टेंडर के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों पर शिकंजा कस चुका है। इस फंदे में शिव के कितने लोगों के गले आएंगे यह देखने वाली बात होगी। वैसे ईओडब्ल्यू के एडीजी केएन तिवारी तो यही बताते हैं कि जनवरी 2018 से मार्च 2018 के बीच ये सभी टेंडर हुए थे, जिसमें 900 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की गई थी। फिलहाल एफआईआर दर्ज की गई है और जल्द ही आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट भी पेश की जा सकेगी। तिवारी ने यह कहकर उन लोगों की सांसें बढ़ा दी हैं जिनके नाम इस मामले में लिए जा सकते हैं, क्योंकि कहा यही जा रहा है कि जिन लोगों के नाम इसमें सामने आए हैं, उनके खिलाफ भी जांच तो होगी ही।
गौरतलब है कि ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया साल 2014 से लागू है, अत: इस दौरान के घपले-घोटाले में शिवराज सरकार के शामिल होने के भी सुबूत मिलना कोई हैरानी की बात नहीं होगी। इस मामले के सियासी मायने निकालते हुए कहना पड़ता है कि चूंकि पार्टी के कद्दावर नेताओं में शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री उम्मीदवार की दौड़ में सबसे आगे नजर आते हैं, जो कि भविष्य में कहीं न कहीं मोदी और शाह की टीम के लिए खतरा साबित हो सकते थे, अत: इस तरह से उन्हें निपटाने का इंतजाम कर दिया गया। मौजूदा वक्त की कौन बात करे, बल्कि पिछले आम चुनाव से ही वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी और शाह की टीम को आंख में पड़े तिनके की तरह ही वो चुभ रहे थे, इसलिए उन्हें निकाल कर फेंकने का इंतजाम किया गया है। एक तरफ कमलनाथ सरकार के करीबियों के खिलाफ कथित तौर पर केंद्र के इशारे पर आईटी की कार्रवाई की गई और प्रतिक्रिया स्वरुप ई-टेंडरिंग मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने उनके लिए मजबूत फंदा तैयार कर दिया। अब डंपर कांड, व्यापंम घोटाला और अवैध उत्खनन जैसे अनेक फंदे उनके गले में लटकने को बेताब नजर आ जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा।
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में जमकर चटखारे लिये जा रहे हैं।

- पत्रकार प्रवीण दुबे की दो लाइनों पर गौर फरमाएं..
आओ कुछ इस तरह हम अपने रिश्तों को निभाएं।
तुम आईटी की रेड डालो, हम एफआईआर कराएं।।
-प्रवीण दुबे, पत्रकार

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