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हिसार में भाजपा ने अपने पैरों पर मारी कुल्हाड़ी,बृजेंद्र सिंह को टिकट देकर हाथ आई जीत गंवाई

April 15, 2019 09:03 PM
अटल हिन्द ब्यूरो
हिसार में भाजपा ने अपने पैरों पर मारी कुल्हाड़ी, बृजेंद्र सिंह को टिकट देकर हाथ आई जीत गंवाई
हिसार(अटल हिन्द/कुलदीप श्योराण)भारतीय जनता पार्टी ने लंबी माथापच्ची के बाद हिसार लोकसभा सीट पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के आईएएस बेटे बृजेंद्र सिंह को उतारने का ऐलान कर दिया। जाट और गैर जाट प्रत्याशी के चक्कर में कई दिन तक उलझी ही भाजपा को बृजेंद्र सिंह पर दांव लगाना ही सही नजर आया।दुष्यंत चौटाला और कुलदीप बिश्नोई को एक साथ हराने के चक्कर में भाजपा ने प्रत्याशी के चयन में बहुत बड़ी गलती कर दी है जिसके चलते दुष्यंत चौटाला और कुलदीप बिश्नोई दोनों को ही फायदा हो गया है।
भाजपा ने क्या की गलती ?
मेयर चुनाव में यह साबित हो गया था कि गैर जाट वोटर भाजपा की तरफ बहुमत में झुक गया है। जींद उपचुनाव के परिणाम ने भी यह दिखाया गया कि गैर जाट वोटर कांग्रेस की बजाय अब भाजपा को फर्स्ट चॉइस के रूप में देख रहे हैं। पंजाबी, बनिया, ब्राह्मण, गुर्जर और दलित वोटरों के बलबूते पर भाजपा ने इनेलो और कांग्रेस के गढ़ को तोड़ने की तैयारी कर ली थी। इनेलो विधायक रणवीर गंगवा को छोड़कर भाजपा ने 80 हजार कुम्हार वोटरों को भी अपने साथ जोड़ लिया था। अगर भाजपा रणबीर गंगवा को टिकट दे दे देती तो दुष्यंत चौटाला और कुलदीप बिश्नोई दोनों ही हार के शिकार हो जाते।
अगर भाजपा रणवीर गंगवा को टिकट देती तो वह अकेले हिसार विधानसभा सीट से लगभग 30000 वोटों की लीड हासिल करती। इसके अलावा वह नलवा, हांसी, बरवाला और बवानीखेड़ा में भी लीड हासिल करती। इसके अलावा वह आदमपुर और उकलाना में बराबरी की लड़ाई लड़ती। रणवीर गंगवा को टिकट देने पर भाजपा 6 लाख वोट लेती, दुष्यंत चौटाला को 4.50 लाख वोट मिलते और कुलदीप विश्नोई 2 लाख वोटों पर रह जाते। इस तरह भाजपा आराम से डेढ़ लाख वोटों से चुनाव जीत जाती।
दुष्यंत को हुआ क्या फायदा- क्या नुकसान?
बृजेंद्र सिंह को टिकट मिलने से दुष्यंत चौटाला को सीधा फायदा हुआ है। अगर भाजपा रणबीर गंगवा को टिकट देती तो अधिकांश गैरजाट वोटबैंक भाजपा के साथ चला जाता जिसके चलते दुष्यंत किसी भी सूरत में चुनाव नहीं जीत पाते।बृजेंद्र सिंह को टिकट देने से दुष्यंत चौटाला को 50000 जाट वोटरों का ही नुकसान होगा। 2014 के विधानसभा चुनाव में उचाना सीट पर दुष्यंत चौटाला प्रेमलता से सिर्फ 8000 वोटों से हारे थे। कांग्रेस को वहां पर सिर्फ 1800 वोट मिले थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में कुलदीप बिश्नोई ने उचाना हल्के से लगभग 38000 वोट हासिल किए थे। 2014 दुष्यंत और कुलदीप बिश्नोई के बीच में घमासान के बीच भी कांग्रेश उचाना विधानसभा सीट से 13000 वोट लेने में सफल रही थी। वीरेंद्र सिंह के भाजपा में आने के बावजूद कुलदीप बिश्नोई इससे 2 गुना वोट जरूर हासिल करेंगे।इस कारण दुष्यंत चौटाला उचाना में भी बृजेंद्र सिंह से 10 से 15 हजार वोटो की लीड लेकर निकलेंगे। बृजेंद्र सिंह हिसार विधानसभा सीट से इतने ही वोटों की दुष्यंत से लीड लेंगे। बाकी सभी सात हलकों में दुष्यंत चौटाला बृजेंद्र सिंह से लीड लेंगे जिसके चलते बृजेंद्र किसी भी सूरत में दुष्यंत चौटाला को हराने में सफल नहीं होंगे।
कुलदीप बिश्नोई को क्या फायदा क्या नुकसान?
बृजेंद्र सिंह को टिकट मिलने से कुलदीप बिश्नोई को भी बड़ा फायदा हुआ है।भाजपा का जाट प्रत्याशी होने के कारण अब गैरजाट वोटर कांग्रेस और भाजपा में बराबर बंटते हुए नजर आएंगे। खास तौर पर कुम्हार और पंजाबी वोटरों में कुलदीप बिश्नोई को भाजपा के जाट प्रत्याशी के कारण उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिल सकता है।अब कुलदीप बिश्नोई हिसार विधानसभा सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी को हराने की पोजीशन में आते नजर आ रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई भाजपा प्रत्याशी से आदमपुर, नलवा, हांसी, बरवाला और उकलाना हलकों में ज्यादा वोट ले सकते हैं। अगर 6 हलकों में कुलदीप बिश्नोई को लीड मिल गई तो दुष्यंत चौटाला के साथ जीत की टक्कर में भाजपा प्रत्याशी पिछड़ जाएगा और एक बार फिर देवीलाल परिवार और भजन लाल परिवार ही पहली पोजीशन के लिए एक दूसरे से टकराते हुए नजर आएंगे।बात यह है कि भाजपा ने जाट प्रत्याशी को हिसार सीट पर उतार कर अपनी झोली में आई जीत को ठोकर मारने का काम किया है।गैर जाट प्रत्याशी उतारने से भाजपा दुष्यंत चौटाला और कुलदीप बिश्नोई दोनों को ही शिकस्त दे सकती थी लेकिन ऐसा करने की बजाय उसने जाट प्रत्याशियों को का कोटा पूरा करने के लिए हिसार सीट से बृजेंद्र सिंह को टिकट देने का काम किया। यह फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा और वह नंबर एक की बजाय नंबर तीन पर रह सकती है। भाजपा ने हिसार सीट पर जाट प्रत्याशी उतार कर जहां दुष्यंत चौटाला को राहत देने का काम किया है वहीं दूसरी तरफ कुलदीप बिश्नोई को भी मुख्य मुकाबले में लौटने का गोल्डन चांस दे दिया है।इस गलती की भरपाई भाजपा किसी भी सूरत में नहीं कर पाएगी। हिसार सीट से जाट प्रत्याशी उतार कर भाजपा ने प्रदेश की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल करने के दावे को खुद झूठा साबित होने का काम किया है।

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