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Haryana

कैथल की सरकार पर भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना बना रहा हास्यास्पद स्थिति !

June 26, 2019 03:15 PM
कृष्ण प्रजापति की रिपोर्ट

नगर परिषद मामले को लेकर धरने पर बैठे पार्षदों की सुनवाई न होना शहर में बना चर्चा का विषय !

सरकार भाजपा की, पार्षद भाजपा के, जीरो टॉलरेंस नीति भाजपा की, फिर भी क्यों नहीं हो रही कार्रवाई !

भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना बना रहा हास्यास्पद स्थिति !

कैथल, 20 जून (कृष्ण प्रजापति): नगर परिषद के सिटी स्कवेयर मामले में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता द्वारा जांच के बाद नगर परिषद की चेयरपर्सन, विक्रम सिंह तत्कालीन ईओ, कुलदीप सिंह सचिव, राजकुमार शर्मा एमई, सुमित मलिक एमई, मुकेश शर्मा एमई, रमेश वर्मा एमई, प्रदीप गुप्ता जेई, हवा सिंह जेई, मोहित जेई, शशांक गर्ग जेई, आदि 11 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआइआर के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से नाराज कैथल नगर परिषद के लगभग 20 पार्षद धरना दे रहे हैं। नगर परिषद पार्षदों का धरना लगभग 23 दिन से जारी है लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई न होना कैथल जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर में चर्चा है कि जब देश और प्रदेश में सरकार भाजपा की है, पार्षद भाजपा के हैं, जीरो टॉलरेंस नीति भाजपा की है लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज एफआइआर में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। धरने पर बैठे नगर पार्षदों की चर्चाएं पूरे शहर में फैली हुई हैं कि आखिर मुख्यमंत्री जोकि भ्रष्टाचार को जड़ मूल से समाप्त करने के दावे को लेकर सत्ता में आए थे लेकिन कैथल जिले में सरेआम भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है, उसी की पार्टी के समर्थित पार्षद धरने पर बैठकर केवल उस एफआईआर में दर्ज नगर परिषद की चेयरपर्सन और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं फिर भी ना तो इस बारे में सरकार ध्यान दे रही है, ना जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है। और तो और जो नगर पार्षद धरने पर बैठे हैं, उनको उठाने के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष भाजपा कई बार धरना स्थल पर आ चुके हैं। इससे पहले धरना दे रहे पार्षद सामूहिक इस्तीफे देने की बात कर रहे थे लेकिन जिलाध्यक्ष के कहने पर सामूहिक इस्तीफे की बजाए धरना जारी रखा लेकिन धरने को 23 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होने से जहां पार्षदों में सरकार के खिलाफ भी गुस्सा है, प्रशासन के खिलाफ रोष है तो वहीं कार्रवाई न होने से शहर भर में भी चर्चा है कि सरकार यदि वास्तव में ही भ्रष्टाचार के खिलाफ है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उधर धरने पर बैठे पार्षदों को लेकर सोशल मीडिया पर भी अनेक प्रकार की चर्चाएं हैं कि किसी भाजपा नेता के कहने पर ही यह धरना शुरू किया गया था। अब धरने को लेकर पार्षदों में दो मत बने हुए हैं, कुछ पार्षद धरने को स्थगित करना चाहते हैं लेकिन बिना किसी कार्रवाई के, बिना किसी आश्वासन के धरना उठाना भी एक प्रकार से फेल साबित होने वाली बात है लेकिन सरकार की ओर से इस बारे में जरा भी कार्रवाई न होना पार्षदों के मनोबल को कमजोर करने वाली बात है। धरने पर बैठे पार्षद जहां सुबह 10 बजे से लेकर 2 बजे तक निरंतर धरना दे रहे हैं। जिला प्रशासन सहित पूरी सरकार को धरने की जानकारी होने के बावजूद भी इस मामले में कोई कदम न उठाना अपने आप में बहुत बड़ी हैरानीजनक बात है। कैथल शहर में चर्चा है कि यदि मुख्यमंत्री इस मामले में एक्शन लेते हैं तो यह भाजपा पार्षदों की जीत होगी और अगर इसमें कोई भी कार्यवाही नहीं की गई तो विरोधी पार्षदों के हौसले बुलंद होंगे।

बॉक्स-- सीएम ने कैथल विधायक की वफादारी का ईनाम दिया, इसलिए नहीं हो रही कार्रवाई : जगरूप सिंह

उधर इस बारे में आरटीआई एक्टिविस्ट जगरूप ढुल ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह घोटाला भाजपा और कांग्रेस का संयुक्त घोटाला है। गत वर्ष पहले राज्यसभा में खुद की वोट कैंसल करवाकर भाजपा समर्थित सांसद को जितवाने में कैथल विधायक की अहम भूमिका रही थी। उस वफादारी का ईनाम देने के लिए सीएम ने अब सुरजेवाला समर्थित नगर परिषद चेयरपर्सन और इस भ्रष्टाचार में शामिल 10 अन्य अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन लेने के मूढ़ में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 2 बार भाजपा समर्थित पार्षदों ने कांग्रेस समर्थित पार्षदों का साथ दिया लेकिन इस मामले में भी सरकार द्वारा कोई एक्शन न लेना इस बात का संकेत है कि अकेला जिला प्रशासन ही नहीं बल्कि पूरी भाजपा सरकार भ्रष्टाचार में संलिप्त चेयरपर्सन व अधिकारियों को बचाने में जुटी हुई है। जगरूप ढुल ने कहा कि विधानसभा चुनावों को लेकर आचार संहिता लग सकती है लेकिन कार्रवाई होने की गुंजाइश नहीं है।

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