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मिशन 2024 पर निकले रणदीप सुरजेवाला,किसान कांग्रेस के जरिए पूरे प्रदेश में समर्थकों को किया एडजैस्ट

June 20, 2019 07:35 PM
फाइल फोटो
राजकुमार अग्रवाल

मिशन 2024 पर निकले रणदीप सुरजेवाला, किसान कांग्रेस के जरिए पूरे प्रदेश में समर्थकों को किया एडजैस्ट
---राजकुमार अग्रवाल ---
कैथल( हरियाणा ) कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला हरियाणा की राजनीति में अपना दबदबा कायम करने के अभियान पर गुपचुप तरीके से निकल चुके हैं। जींद उपचुनाव में हार होने के कारण रणदीप सुरजेवाला के समीकरण एक बार पूरी तरह से गड़बड़ा गए थे लेकिन उन्होंने इस बड़े झटके से उभरते हुए अब नए सिरे से खुद को प्रदेश कांग्रेस में सबसे ताकतवर नेता बनने की शतरंज बिछा दी है।खास बात यह है कि रणदीप सुरजेवाला 2019 के बजाय 2024 के चुनाव की राजनीति को लेकर अपनी सियासत कर रहे हैं और उसी हिसाब से अपनी गोटियां फिट कर रहे हैं।

2019 में क्या है रणदीप की रणनीति?

रणदीप सुरजेवाला ने जींद उपचुनाव के जरिए 2019 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा गेम प्लान तैयार किया था। अगर अनुदीप सुरजेवाला जींद उपचुनाव जीत जाते तो वे विधानसभा चुनाव में प्रदेश कांग्रेस में राहुल गांधी की पहली पसंद बनते हुए मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बन सकते थे लेकिन उपचुनाव में हार ने उनके अरमानों पर पानी फेरने का काम किया जिसके चलते उन्होंने 2019 के चुनाव का चक्कर छोड़ दिया है। वह 2019 के चुनाव में सिर्फ अपनी कैथल विधानसभा सीट पर जीत को फोकस करते हुए कामकाज कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में वह कैथल सीट को जीतकर यह साबित करने का काम करेंगे कि भाजपा को टक्कर देने का दमखम सिर्फ उन्हीं में है।

क्या है रणदीप का आकलन!

रणदीप सुरजेवाला का यह साफ आकलन है कि 2019 का चुनाव मुख्यमंत्री पद के वर्तमान दावेदारों पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, किरण चौधरी, कुमारी शैलजा, कुलदीप बिश्नोई और कैप्टन अजय यादव का अंतिम चुनाव हो सकता है। 2024 के चुनाव में इनमें से कोई भी नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं होगा। इसलिए रणदीप सुरजेवाला वर्तमान समय में सीएम पद के दावेदारों की कतार से खुद को हटाकर 2024 की तैयारी में लग गए हैं।
रणदीप यह बखूबी जानते हैं कि राहुल गांधी का खासमखास होने के कारण वे 2024 के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर सकते हैं।वे आगामी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कैथल सीट जीतकर हाईकमान को यह दिखाएंगे कि उत्तर हरियाणा में उनसे कद्दावर नेता कोई नहीं है।
2024 में जब दूसरे बड़े नेता राजनीति की ढलान या खात्मे के कगार पर होंगे तब रणदीप सुरजेवाला की टक्कर सिर्फ दीपेंद्र हुड्डा से होगी। रणदीप सुरजेवाला दीपेंद्र को मात देने के लिए अभी से कारगर रणनीति पर चल पड़े हैं।
रणदीप यह बखूबी जानते हैं कि दीपेंद्र फील्ड में दमखम वाले नेता नहीं हैं और वे आगे भी रोहतक और सोनीपत से बाहर नहीं निकल पाएंगे जिसके चलते प्रदेश के बाकी जिलों में रणदीप सुरजेवाला को खुद के लिए खुलकर काम करने का किसान कांग्रेस के जरिए गोल्डन चांस हासिल होगा।

क्या है रणदीप की खास रणनीति!

रणदीप सुरजेवाला ने किसान कांग्रेस के जरिए प्रदेश के सभी जिलों में अपने नेताओं को एडजस्ट कर दिया है। रणदीप सुरजेवाला के प्रभाव में आकर किसान कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रणदीप सुरजेवाला के खासमखास किसान कांग्रेस हरियाणा अध्यक्ष धर्मवीर कोलेखां के जरिए रणदीप सुरजेवाला के अधिकांश समर्थकों को पूरे प्रदेश में सेट कर दिया है। किसान कांग्रेस के सभी जिला अध्यक्ष रणदीप खेमे के हैं। अगले 5 साल में रणदीप सुरजेवाला किसान कांग्रेस के मंच के जरिए प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर अपना जनाधार मजबूत करने का काम करेंगे और खुद को 2024 के चुनाव में मुख्यमंत्री पद का कांग्रेस का सबसे प्रबल दावेदार साबित करेंगे।

 बात यह है कि रणदीप सुरजेवाला यह बखूबी जानते हैं कि 2019 के चुनाव में उनके लिए कांग्रेस की राजनीति में ज्यादा स्कोप नहीं है। जींद उपचुनाव में हार के बाद उनको बैकफुट पर जाकर अपनी रणनीति को बदलना पड़ा।
किसान कांग्रेस के जरिए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस में बड़े मंच पर कब्जा कर लिया है। किसान कांग्रेस के मंच के जरिए में अपने समर्थकों के साथ पूरे प्रदेश में अगले 5 साल सक्रिय गतिविधियां चलाते हुए नजर आएंगे। किसान कांग्रेस एक महत्वपूर्ण इकाई होने के कारण गांव गांव तक रणदीप सुरजेवाला को अपनी ताकत बढ़ाने का अवसर मिलेगा और इसी मंच के जरिए वे आगामी 5 वर्षों में प्रदेश कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता बनने की कसरत करेंगे।
यह हकीकत है कि 2024 के चुनाव आने तक प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान सभी बड़े नेता सियासी ढलान पर होंगे और उन हालात में रणदीप सुरजेवाला को टक्कर देने वाला इक्का-दुक्का ही नेता होगा। सुरजेवाला पूरी तैयारी और रणनीति के साथ 2024 की सियासी जंग के लिए अभी से जुट गए हैं। यह जानते हैं कि 2019 के चुनाव में कांग्रेस के पास पाने के लिए कुछ नहीं है। इसलिए उन्होंने समझदारी दिखाते हुए वर्तमान नेतृत्व के झगड़े के पचड़े में नहीं फंसना ही बेहतर समझा है।
वह इस समय अशोक तंवर के साथ जोड़ी बनाकर भूपेंद्र हुड्डा खेमे को प्रधानगी हासिल करने रोकने का काम बखूबी कर रहे हैं। अशोक तंवर का साथ देकर वे जहां एक तरफ भूपेंद्र हुड्डा के खेमें की जड़ों में तेल डालने का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ किसान कांग्रेस के जरिए खुद को भविष्य का सबसे मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने के लिए मैदान में उतर गए हैं। अब देखना यह है कि रणदीप सुरजेवाला अपने इस स्पेशल 24 मिशन में कितना कामयाब होते हैं।

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