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फंसे भूपेंद्र हुड्डा,निर्णायक फैसला नहीं लेने पर सियासी खात्मे का खतरा

July 20, 2019 02:14 PM
राजकुमार अग्रवाल
करो या मरो" के हालात में फंसे #भूपेंद्र हुड्डा, #निर्णायक फैसला नहीं लेने पर #सियासी खात्मे का खतरा

-राजकुमार अग्रवाल -
कैथल (हरियाणा )। पूर्व सीएम #भूपेंद्र हुड्डा करो या मरो के #सियासी हालात में फंस गए हैं। #हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की चौधर हासिल करने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर चुके #भूपेंद्र हुड्डा अब उस दोराहे पर खड़े हैं जहां एक तरफ उनके लिए सरेंडर करके कांग्रेस में पड़े रहने का विकल्प है तो दूसरी तरफ उनके लिए नई पार्टी बनाने का रास्ता खुला है।
कांग्रेस हाईकमान के बड़े नेताओं गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा के भरोसे पर एतबार करते हुए #भूपेंद्र हुड्डा ने 9 जून की बैठक में #निर्णायक फैसला टाल दिया था लेकिन अब उनके लिए हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। अगर जुलाई के महीने में #भूपेंद्र हुड्डा #निर्णायक फैसला नहीं लेंगे तो उनके #सियासी खतरे के आसार पैदा हो जाएंगे।

क्या है #सियासी खतरा ?

अगर #भूपेंद्र हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस की कमान नहीं मिली और वह उसके बावजूद कांग्रेस में बने रहे तो उनके #सियासी वजूद पर सवालिया निशान लग जाएगा और गढ़ी सांपला किलोई सीट पर भी आगामी #विधानसभा चुनाव में उनके हारने के आसार बन जाएंगे। लोकसभा चुनाव में #भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा दोनों की हार ने #भूपेंद्र हुड्डा परिवार के दमखम की हकीकत दुनिया के सामने ला दी है। अब वह अजय नहीं रहे और भाजपा लगातार उनपर शिकंजा कसते जा रही है।
अगर #भूपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस की चुनाव के लिए कमान नहीं मिली तो वे #सियासी रूप पर कमजोर हो जाएंगे और उन हालात में वे आगामी #विधानसभा चुनाव भी हार सकते हैं। एक और हार उनके परिवार के #सियासी रसूख का खात्मा करने का काम कर सकती है।

क्या है विकल्प ??

#भूपेंद्र हुड्डा के सामने इसमें सिर्फ दो विकल्प बचे हुए हैं।
विकल्प नंबर 1 
#भूपेंद्र हुड्डा प्रदेश कांग्रेस की कमान मिलने का इंतजार करें और उनके पक्ष में फैसला नहीं होने पर भी वह कांग्रेस में बने रहें।

विकल्प नंबर 2
#भूपेंद्र हुड्डा प्रदेश कांग्रेस की कमान मिलने का कुछ समय इंतजार करें और अपने हक में फैसला नहीं होने पर नई पार्टी के गठन का ऐलान कर दें।

कब तक करेंगे इंतजार ??

पूर्व सीएम #भूपेंद्र हुड्डा सिर्फ 25 जुलाई तक ही इंतजार करने के मूड में हैं। 25 जुलाई को #कांग्रेसी वर्किंग कमेटी की दिल्ली में बैठक है। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बारे में #निर्णायक फैसला हो सकता है। #भूपेंद्र हुड्डा उसके बाद 2 या 3 दिन और हरियाणा को लेकर हाईकमान के फैसले का इंतजार करेंगे। उस दौरान अगर कोई फैसला उनके पक्ष में नहीं आया तो वे 30 जुलाई को नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं।

 बात यह है कि #भूपेंद्र हुड्डा यह बखूबी जानते हैं कि अगर प्रदेश कांग्रेस की कमान उनको नहीं मिली और उसके बावजूद वे कांग्रेस में बने रहे तो उनके परिवार के #सियासी वजूद पर ही खतरा मंडरा जाएगा। उनके सामने करो या मरो के हालात पैदा हो गए हैं।
अगर प्रदेश कांग्रेस की कमान उनको या उनके खेमे को नहीं मिलती हैं तो उनके सामने नई पार्टी के गठन के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अगर उन्होंने अलग पार्टी नहीं बनाई तो वह कांग्रेस में ही घुट कर रह जाएंगे और भाजपा के लिए उन्हें किलोई सीट पर भी हराना आसान हो जाएगा।
#भूपेंद्र हुड्डा के लिए यह आत्मघाती पोजीशन होगी। अपने #सियासी रसूख और परिवार की सियासत को बचाने के लिए उनके पास नई पार्टी के गठन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा। नई पार्टी बनाकर ही #भूपेंद्र हुड्डा न केवल अपने परिवार के #सियासी रसूख को बचा सकते हैं बल्कि #विधानसभा चुनाव में भाजपा को मजबूत टक्कर देते हुए अपने दमखम का परिचय दे सकते हैं।
#भूपेंद्र हुड्डा के पास नोट, वोट और सपोर्ट की कमी नहीं है। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस के 90 फ़ीसदी नेता खड़े हुए हैं। इसलिए अगर हाईकमान ने उनको प्रदेश कांग्रेस की बागडोर नहीं सौंपी तो वे नई पार्टी के गठन का ऐलान 30 जुलाई तक कर सकते हैं।
#विधानसभा चुनाव में सिर्फ 3 महीने का समय बाकी रहने के चलते #भूपेंद्र हुड्डा ज्यादा समय तक मामले को लटकाने का रिस्क नहीं ले सकते हैं क्योंकि अगर उन्होंने 15 दिन और इस मामले में देरी कर दी तो वह नई पार्टी का गठन नहीं कर पाएंगे।
नई पार्टी के गठन और संगठन के लिए काफी कसरत करनी पड़ती है। इसलिए उन्हें हर हालत में जुलाई में ही #निर्णायक फैसला हर हाल में लेना होगा। देखना ही है कि 10 दिन के अंदर #भूपेंद्र हुड्डा खुद को कमजोर नेता साबित करते हैं या मजबूत नेता का परिचय देते हुए नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हैं।
 
 
 
 
 
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Thanks
Mr. Rajkumar  Aggarwal(Jouranlist & writer)
28 E Block  Vishnu Market Kaithal 136027 Haryana 
M0-  9416111503

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