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क्या होगा 18 अगस्त को?? हुड्डा को मजबूरी में करना पड़ा महारैली का ऐलान

July 29, 2019 05:41 PM
राजकुमार अग्रवाल

क्या होगा #18 अगस्त को?? हुड्डा को #मजबूरी में करना पड़ा #महारैली का ऐलान

पार्टी की बागडोर नहीं मिलने पर करनी पड़ेगी रैली में नई पार्टी बनाने की घोषणा

-राजकुमार अग्रवाल -
कैथल (हरियाणा )। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पूर्व सीएम #भूपेंदर हुड्डा ने #आखिरी दांव चलते हुए पार्टी हाईकमान को अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है। प्रदेश #कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने में नाकाम रहने के चलते भूपेंद्र हुड्डा को पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए अपने तरकश का अंतिम तीर चलाते हुए आर -पार की रैली करने पर मजबूर होना पड़ा है।
भूपेंद्र हुड्डा ने #18 अगस्त को रोहतक में परिवर्तन #महारैली करने का ऐलान कर दिया है। अगर उससे पहले कांग्रेस हाईकमान ने भूपेंद्र हुड्डा के हाथों में पार्टी की बागडोर नहीं सौंपी तो उनको रैली में नई पार्टी बनाने का ऐलान करना पड़ेगा।

क्या है हुड्डा की #मजबूरी?

भूपेंद्र हुड्डा के लिए आर-पार का फैसला लेना #मजबूरी हो गई है। उनके समर्थक उनपर यह दबाव डाल रहे हैं कि या तो वे हाईकमान से पार्टी की बागडोर हासिल करें या फिर नई पार्टी बनाते हुए विधानसभा चुनाव में उनकी अगुवाई करें। विधानसभा चुनाव में बहुत कम रहने के कारण भूपेंद्र हुड्डा के लिए नई पार्टी बनाने का समय कम होता जा रहा है। अगर उन्होंने अगस्त का समय निकाल दिया तो फिर चाहते हुए भी वे नई पार्टी नहीं बना पाएंगे। इसके अलावा अगर उन्होंने अपनी पार्टी नहीं बनाई तो चुनाव लड़ने के दावेदार उनके खेमे के नेता पाला बदलकर अशोक तंवर के साथ खड़े हो सकते हैं।पार्टी हाईकमान पर दबाव डालने और अपने समर्थकों को साथ खड़ा रखने के लिए उनके पास महा रैली की घोषणा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। #मजबूरी में आकर उन्हें परिवर्तन #महारैली का ऐलान करना पड़ा।

क्या होगा #18 अगस्त को??

4 अगस्त को रोहतक में होने वाली वर्करों की बैठक को हुड्डा खेमा विशाल रूप देने का काम करेगा। इस बैठक में हजारों वर्करों को बुलाकर यह दिखाया जाएगा कि पार्टी का सारा कैडर उनके साथ खड़ा है और अगर उनकी नेतृत्व परिवर्तन की मांग नहीं मानी गई तो वह #18 अगस्त की #महारैली में कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं। भूपेंद्र हुड्डा खेमा #18 अगस्त तक यह पुरजोर कोशिश करेगा कि पार्टी हाईकमान अशोक तंवर को हटाकर चुनाव के लिए बागडोर उनके खेमे को सौंप दें। अगर ऐसा हुआ तो रैली में चुनाव प्रचार का शंखनाद हो जाएगा और अगर पार्टी हाईकमान हुड्डा खेमे के दबाव में नहीं आई तो भूपेंद्र हुड्डा को रैली में कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाने का ऐलान हर हाल में करना पड़ेगा।

हर हाल में होगा परिवर्तन!!

भूपेंद्र हुड्डा की परिवर्तन #महारैली कांग्रेस में दोनों तरह से परिवर्तन का एलान करने का काम करेगी। अगर भूपेंद्र हुड्डा के दबाव में आकर कांग्रेस हाईकमान ने अशोक तंवर को हटाकर भूपेंद्र हुड्डा खेमे के नेता को प्रधानगी सोपी तो कांग्रेस में परिवर्तन का एलान होगा।
अगर कांग्रेस हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को नहीं माना तो भूपेंद्र हुड्डा द्वारा बनाई जाने वाली नई पार्टी भी परिवर्तन के प्रतीक मानी जाएगी। दोनों ही हालात में परिवर्तन #महारैली कांग्रेस की सियासत में बदलाव लाने का काम करेगी।

 बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा इस समय सियासत के उस मुकाम पर खड़े हैं जहां उनके एक तरफ कुआं है और दूसरी तरफ खाई है। अगर प्रदेश कांग्रेस की कमान उनके हाथ में नहीं आती है तो कांग्रे समें उनका वजूद खत्म होता हुआ नजर आएगा और विधानसभा चुनाव में उनके खुद के चुनाव हारने के आसार भी बनते नजर आएंगे । 
दूसरी तरफ नई पार्टी बनाने पर उनके साथ पार्टी छोड़ने वाले लोगों की संख्या पर भी नजर रहेगी। स्वर्गीय बंसीलाल और स्वर्गीय भजन लाल की पारटियों का खराब अंजाम बहुत सारे नेता उनके साथ पार्टी छोड़कर नहीं जाएंगे।
ऐसे नेता #18 अगस्त को रैली के मंच पर तो जरूर खड़े नजर आ सकते हैं लेकिन नई पार्टी बनाने की घोषणा के बाद उनमें से काफी नेता भूपेंद्र हुड्डा के पार्टी के बजाय कांग्रेस के साथ खड़ा होना पसंद करेंगे।
अगर #18 अगस्त तक कांग्रेस हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन की उनकी मांग को नहीं माना तो नई पार्टी बनाना भूपेंद्र हुड्डा की #मजबूरी हो जाएगी।
प्रदेश के सियासी हालात के अलावा भूपेंद्र हुड्डा अपने परिवार की सियासत को मद्देनजर रखते हुए इस मामले को ज्यादा लटकाने के मूड में नहीं है। वह कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद को भी इस मामले में फाइनल फैसला लेने का आग्रह पहले ही कर चुके हैं। डेढ़ महीना पहले गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने भूपेंद्र हुड्डा को पार्टी की कमान उन्हें दिलाने का आश्वासन दिलाया था लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण भूपेंद्र हुड्डा के लिए सियासी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
हाथ में कमान नहीं आने कारण भूपेंद्र हुड्डा जहां चुनाव की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं वहीं उनके समर्थकों की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। इसलिए कोई रास्ता नहीं पचने के कारण #मजबूरी में भूपेंद्र हुड्डा को प्रीतम #महारैली के जरिए पार्टी हाईकमान को फाइनल अल्टीमेटम देना पड़ा।

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