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गोवा की पसंद पर्रिकर ही क्यों

March 14, 2017 09:20 AM
एएच ब्यूरो

गोवा की पसंद पर्रिकर ही क्यों

40 विधानसभा सीटोंवाले गोवा में हाल ही में सम्पन्न हुये विधानसभा चुनाव के बाद 13 विधायकों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा ने सबको चौंकाते हुये सरकार बनाने का दावा पेश किया है और सम्भव है कि पार्टी शीघ्र ही गोवा में सरकार गठन करने में भी सफल रहेगी । दरासल गोवा के अन्य दो प्रमुख दल एमजीपी और गोवा फॉरवॉर्ड ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को गोवा के नये मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन देने की बात कही थी, जिसके बाद राज्य में भाजपा की सरकार बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया । गोवा में भाजपा को समर्थन दे रहें सभी विधायकों की जबरदस्त मांग पर केन्द्र से वापस बुलाये गये मनोहर पर्रिकर अब जल्द ही चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे ।

मनोहर पर्रिकर द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में पुणः शपथ लिए जाने की तैयारीयों से राज्य की जनता तथा गोवा के भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है । और इन सबके साथ ही पर्रिकर को ही मुख्यमंत्री बनाये जाने की शर्त पर भाजपा को समर्थन दे रहीं पार्टीयों के अन्दर भी नेताओं व विधायकों में खुशी की लहर देखी जा रही है । राज्य के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यम़ंत्री की पहचान रखनेवाले पर्रिकर को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में पाकर गोवा की जनता गद्गद है । उनमें बेतहासा उत्साह है, खुशी है । पर यहां शवाल यह है कि आखिर गोवा को बस एक पर्रिकर ही क्यों पसंद हैं ?

और इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए हमें गोवा के इस सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के सार्वजनिक जीवन में थोड़ी सी ताकझांक करनी होगी ।

गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ लेने जा रहे 61 के साल के पार्रिकर वर्तमान में भारत के रक्षा मंत्री हैं और साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य से राज्यसभा सांसद भी । पूर्व में तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार सम्भाल चुके पर्रिकर आई.आई.टी. के स्नातक हैं और उन्हें सन 2001 में आई.आई.टी.मुम्बई द्वारा विशिष्ट भूतपूर्व छात्र की उपाधि भी प्रदान की गयी है ।

भारतीय जनता पार्टी से गोवा के मुख्यमंत्री बनने वाले वह पहले नेता हैं। 1994 में उन्हें गोवा की द्वितीय व्यवस्थापिका के लिये चयनित किया गया था । जून 1999 से नवम्बर 1999 तक वे विपक्षी पार्टी के नेता रहें फिर 24 अक्टूबर् 2000 को उन्होने गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला पर उनकी सरकार 24 फ़रवरी 2002 तक ही चल पाई । पर 5 जून 2002 को वे पुनः गोवा के मुख्यमन्त्री पद के लिये चयनित किये गये । और इस तरह अपनी काबिलियत से बी.जे.पी. को गोवा की सत्ता में लाने का श्रेय उन्ही को जाता है ।

गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को अकेले गोवा लाने का तथा किसी भी अन्य सरकार से कम समय मे एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मूलभूत संरचना खड़ी करने का श्रेय भी उनको जाता है । कई समाज सुधार योजनाओं जैसे दयानन्द सामाजिक सुरक्षा योजना जो कि वृद्ध नागरिकों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, साइबरएज योजना, सी.एम. रोजगार योजना इत्यादि में भी उनका प्रमुख योगदान रहा है । उन्हें कई प्रतिष्ठित प्रतिभाओं जैसे डॉ॰ अनुपम सराफ तथा आर. सी. सिन्हा इत्यादि को सरकार में सलाहकार के तौर पर शामिल करने का श्रेय भी दिया जाता है । प्लानिंग कमीशन ऑफ इन्डिया तथा इंडिया टुडे द्वारा किये गए सर्वेक्षणों के अनुसार उनके कार्यकाल में गोवा लगातार तीन साल तक भारत का सर्वश्रेष्ठ शासित प्रदेश रहा है । कार्यशील तथा सिद्धांतवादी श्री पारिकर को गोव में मि.क्लीन के नाम से भी जाना जाता है । और यही उनकी लोकप्रियता का कारण भी है ।

अगर आप गोवा चले जाओ तो देखोगे कि पूरे गोवा में मनोहर पर्रिकर की सादगी के गुण गाये जाते हैं । यही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टियों के नेता भी उनकी खुलकर तारीफ करते नजर आते हैं । और इसके पीछे कारण भी है । दरासल भारत में अमूमन नेताओं के साथ दिखने वाला या आम तौर पर मुख्यमंत्रियों के साथ चलनेवाला गाड़ियों का काफिला, हूटर बजाते स्कॉर्ट गाड़ीयों का रैला, भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था व अन्य तामझाम उनके साथ नहीं चलते । वे बड़े सादगी के साथ जनता के सेवक के रूप में कार्य करनेवाले व्यक्ति के तौर पर तत्पर रहते हैं और स्कूटी चलाते हुए ही गोवा की सड़कों पर नजर आ जाते हैं ।

39 वर्ष की उम्र में पणजी से विधायक निर्वाचित होनेवाले पर्रिकर महज 310 सप्ताह के भीतर ही गोवा के मुख्यमंत्री चुन लिये गये थें । सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि गोवा के सबसे लंबे समय तक लगातार विधायक रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले पर्रिकर दूसरे युवाओं की तरह ही अक्सर स्कूटी चलाते हुये आम लोगों के बीच मिलते-जुलते दिखते हैं ।

मनोहर का गोवा की महिलाओं के बीच भी जबरदस्त क्रेज है । पणजी की स्थानीय महिलाओं के अनुसार कुछ महिलाएं उन्हे इसलिए भी पसंद करती हैं, क्योंकि पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद अपने दोनों बच्चों की परवरिश बेहद अच्छे तरीके से की । कुछ लोगों के अनुसार  तो उनके विधायक बनने के बाद पणजी का नाम देश के दस धनी शहरों में शामिल हो गया है और इसलिये भी वे उन्हे बहुत पसंद करते हैं । पर्रिकर ने सरकार बनने के बाद जनता से किये गये अपने वादों को पूरा कर लोगों का दिल जीता है और इसके कई प्रमाण भी हैं ।

एक बार तो नियमों के पक्के मनोहर पर्रिकर के साप्ताहिक जनता दरबार में एक महिला अपने बेटे को लेकर आई और उसने बेटे के लिए सरकारी योजना के तहत लैपटॉप मांगा । पर वहां मौजूद अधिकारी ने पर्रिकर को बताया कि ये लड़का उस सरकारी योजना के तहत  लैपटॉप पाने की श्रेणी में नहीं आता है और उसे लैपटॉप देना सम्भव नहीं है । पर उसी समय वादों के पक्के पर्रिकर को अचानक याद आ गया कि अपने जनसंपर्क अभियान के तहत वे उस महिला से मिले थे और उसे उन्होने योजना के बारे में बताया था । अपनी बात का स्मरण होते ही उन्होंने बिना समय गवायें तत्काल उस लड़के को नया लैपटॉप दिलाने की व्यवस्था की और उसका भुगतान उन्होंने अपनी जेब से किया । और अपनी इन्ही अदाओं की वजह से भी वे जनता के दिलों में राज करते हैं ।

अपनी सादगी के लिए सदैव ही चर्चा में रहने वाले गोवा के लोकप्रिय नेता मनोहर पर्रिकर की सादगी की छंटा उनके बेटे की शादी में भी बखूबी दिखी थी । तीन बार के मुख्यमंत्री व तबके केन्द्रीय मंत्री के बेटे की शादी में हर तरफ बस सादगी भरे इंतजाम ही किये गये थे । शादी में जहां सभी मेहमान सूट-बूट से लैस होकर आये थे, वहीं मेजबान पर्रिकर अपने आम दिनों के पहनावे की भांती ही हाफ शर्ट, क्रीज वाली साधारण पैंट और सैंडिल पहने सबकी आवभगत करने में जुटे थे । और प्रदेश की जनता चुपचाप से सब देख रही थी ।

गोवा के लोग उन्हे इसलिए भी बेंइतहां प्यार करते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री होते हुये भी वे वीआईपी कल्जर से उलट गोवा की सड़कों पर स्कूटर चलाते हुए और बिना किसी सिक्यॉरिटी के साधारण से रेस्ट्रॉन्ट में बैठ चाय पीते हुए मिल जाते हैं । वे अक्सर प्रदेश की युवाओं से नयी तकनीकों और उनकी जरूरतों को लेकर भी बात करते हैं ।

61 वर्षीय पर्रिकर सोलह से अठारह घंटे काम करते हैं । इतना ही नहीं बल्कि अपने अकेले के दमपर अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को गोवा लाने के बाद जब उद्घाटन समारोह में आये मेहमानों ने उन्हे पसीने से लथपथ होकर पुलिस वालों के साथ आयोजन स्थल के बाहर खड़े होकर ट्रैफिक कंट्रोल में जुटा हुआ देखा तो वे हकेबके से रह गये थे । उन्हे यह समझ नहीं आ रहा था कि यह व्यक्ति है क्या !!

पर्रिकर को लेकर ऐसे अनेकों वाक्ये हैं जो उन्हे जननेता के रूप स्थापित करते हैं । जैसे कि अपने तीसरी बार के शपथ समारोह में पर्रिकर ने अपने पद व गोपनीयता की शपथ लेने के तुरंत बाद ही वहां खड़े हर उस आदमी से हाथ मिलाया था, जो उन्हें बधाई देने स्टेज के पास आये थे ।

अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच बेहद लोकप्रिय, अनुशासित और सख्त प्रशासक पर्रिकर को मार्च 2012 में अपने सहकर्मी व राज्य के पर्यटन मंत्री मातनही सलदन्हा के निधन पर फूट-फूट कर रोते हुये देखा गया था । इस से पूर्व जब मातनही बीमार पड़े थे, तो पर्रिकर लगातार उनके बेड के सिहराने बैठे रहते थे । उन्हे इस तरह देख जब डॉक्टरों ने उन्हे घर जाकर आराम करने के लिए कहा तो बड़ी शालीनता से उन्होने जवाब दिया था कि मैं उस व्यक्ति को कैसे छोड़ जाऊं, जो सालों तक साए की तरह मेरे साथ रहा ।

एक प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हुये भी पर्रिकर हमेशा इकॉनमी क्लास में ही विमान यात्रा करते हैं । उन्हें हमेशा आम लोगों की तरह ही अपना सामान लिए यात्रियों की लाइन में खड़े और बोर्डिंग बस में सवार होते देखा जाता है । वे टेलीफोन पर पर्सनल बातचीत का भुगतान भी अपनी जेब से करते हैं और यथासम्भव पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं ।

रिश्वत के सख्त खिलाफ रहने वाले पर्रिकर के के बेटे के ह्रदय संबंधी रोग के दौरान जब उसे तत्काल मुम्बई ले जाने की आवश्यकता पड़ी, तब गोवा के एक उद्योगपति ने उन्हें विमान मुहैया कराया । चूँकि पर्रिकर के बेटे को स्ट्रेचर पर ले जाना था, इस लिए विमान की छह सीटें हटा कर जगह बनाई गई और उसका पैसा भी उस उद्योगपति ने ही भरा । उसकी इस मदद से पर्रिकर के बेटे की जान बच गई । पर उस उद्योगपति के मांडवी नदी में अनेकों कैसीनो थे और उसमें उसने अवैध निर्माण भी कर रखे थे । बेटे की इस हालत से पूर्व ही पर्रिकर ने उसके अवैध निर्माणों को तोड़ने के आदेश जारी कर दिये थे । किंतु अब उस उद्योगपति ने सोचा कि जो कि उसने पर्रिकर के बेटे की जान बचाई है तो इसलिए शायद पर्रीकर वह आदेश रद्द कर देंगे । विपक्ष को भी इस बात की भनक लग गई थी और वह मौका ताड़ने लगी, कि शायद अब पर्रिकर जाल में फंस जायें लेकिन हुआ इसका उल्टा । अर्थात पर्रिकर ने उस उद्योगपति से स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि एक पिता होने के नाते वे आजन्म उसका आभारी रहेंगे, परन्तु एक मुख्यमंत्री के रूप में वे अपने कर्तव्य व निर्णय से अडिग हैं । और उसी शाम उन्होंने उस उद्योगपति के सभी अवैध निर्माण कार्य गिरवा दिए और विमान की छः सीटों का पैसा उसके खाते में पहुँचवा दिया ।

और अपने इसे सादगी, कुशल नेतृत्व, सत्यपरायणता व मोहक अंदाज की वजह से ही वे आज गोवा की पहली पसंद हैं । उनका मनोहर व्यक्तत्व ही वह कारण है जिसने उन्हे गोवा की जनता से लेकर नेता व अफसरशाही तक के दिल का सरताज बना दिया है । और वे सभी किसी भी किमत पर उन्हे अपने अभिभावक के रूप में पाना चाहते हैं । उनके मार्गदर्शन से गोवा को बुलंदीयों पर देखना चाहते हैं । और पर्रिकर ऐसा जादु करने में सक्षम भी हैं ।

                                               मुकेश सिंह
                                         सिलापथार (असम)
                   mukeshsingh427@gmail.com

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