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मिर्च व आलू की खेती ने किसानों के निकाले आंसु

May 10, 2017 05:41 PM
नरेश सोनी

मिर्च व आलू की खेती ने किसानों के निकाले आंसु
ऐलनाबाद (नरेश सोनी):-ऐलनाबाद के डबवाली रोड पर सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसानों की दशा दयनीय बनी हुई है। क्योंकि इस बार सब्जी की खेती घाटे का सौदा रही है। किसानों द्वारा लगाई गई अब तक हर सब्जी ने किसानों को ठेंगा दिखा दिया है। क्योंकि किसान की किस्मत बाजार के रेट पर निर्भर होती है। सरकार द्वारा छमाही फसलों जैसे- गेहूं, चावल, नरमा, कपास, चना इत्यादि का रेट तो तय किया जाता है। जिससे किसान को यह तो पता होता है कि अगर इतनी फसल हुई तो उसके इतने रूपए तो उसे मिल ही जाएंगे। लेकिन सब्जियों के रेट को सरकार द्वारा तय नहीं किया जाता है। इसलिए सब्जी तैयार करने वाले किसान असमंजय में रहते हैं। सब्जी के रेट बाजार में अधिक व कम होने पर निर्भर होता है। अगर बाजार में सब्जी की मात्रा अधिक होती है तो वह सस्ती होती है और अगर मात्रा कम होती है तो वह मंहगी बिक जाती है। यानि किसानों का हर रोज बाजार की मात्रा को देखते हुए अपनी किस्मत बनाते हैं।
हर रोज बाजार कम रहता है तो सब्जी की खेती करने वाले किसान उजड़ जाते हैं। कई बार व्यापारी लोग भी किसानों पर भारी मार डालते हैं। क्योंकि सब्जी को खरीदने वाले व्यापारी व आढ़तीय वर्ग मिलकर किसान को बुद्धू बनाते हैं। पिछले दिनों क्षेत्र में मटर व आलू की खेती खूब हुई जिसका बाजार में रेट ना होने पर किसानों को काफी चपत लगी है। अब मिर्च की खेती ने जोर पकड़ा हुआ है। लेकिन बाजार में रेट कम होने की वजह से किसान मायूस नजर आ रहे हैं। कुछ दिन बाद टमाटर व ङ्क्षभडी की खेती पक कर तैयार होने वाली है। जिस पर किसानों को बहुत आस है कि इस सब्जी के रेट बाजार में अच्छे मिलेगें और पिछली फसलों में पड़े घाटे को पूरा किया जाएगा। अगर इन फसलों में भी रेट कम मिले तो क्षेत्र का किसान उजड़ जाएगा। उसके परिवार पेट पालना बड़ी मुश्किल हो जाएगा। वैसे क्षेत्र में टमाटर की खेती सबसे ज्यादा एकड़ में की जाती है। किसानों ने बताया कि पिछले करीब 3 वर्षों से टमाटर की खेती ने किसानों के चेहरों की लाली
को गायब किया हुआ है। लेकिन किसानों को इस बार लाली दिखने की उम्मीद लगी हुई है। क्योंकि पिछले वर्षों में टमाटर की खेती अधिक क्षेत्र में लगी हुई थी और इस बार कम क्षेत्र में है। इस बार मिर्च, आलू व मटर की खेती अधिक क्षेत्र में हुई है। जिसके कारण उनके रेट कम हैं।
सब्जी के रेट निर्धारित होने अनिवार्य:
किसान बुधराम, मक्खन राम, मुखत्यार ङ्क्षसह, सोहनलाल, साधू राम ने बताया कि अगर सरकार द्वारा सब्जी के रेट निर्धारित किए जाते हैं तो किसानों का उजडऩे की नोबत नहीं आएगी। क्योंकि किसान को उसकी फसल का बनता मुल्य तो मिलेगा ही। कितनी भी सब्जी की मात्रा अधिक हो जाए तो निर्धारित रेट पर बिकेगी। इससे कम मुल्य में नहीं बिकेगी। जब किसान की सब्जी किसी भी रेट में नहीं बिकती तो किसानों को अपनी सब्जी या तो खेत में ही बाहनी पड़ती है या फिर सब्जी को गऊशाला पहुंचा दिया जाता है। आमतौर पर बहुत से किसान सब्जी को रोड़ पर फैंक कर वापिस घर आ जाते हैं, क्योंकि बाजार में उसका मुल्य नहीं लगता है।
आढ़ती वर्ग व व्यापारियों का तालमेल किसानों को लगाता है चूना:
सब्जी मंडी में बोली के दौरान व्यापारी आढ़तियों से सांठ-गांठ करके किसानों को चूना लगा देता है। वह किसान की सब्जी की अधिक बोली ही नहीं लगाता और कम बोली लगाकर आढ़ती से माल उठा लेता है। किसान बेचारा वहां खड़ा-खड़ा उनका मुंह ताक रहा होता है। इससे भी किसानों का शोषण होता है। बच्चों की तरह सब्जी को पाल कर बाजार में लाने वाला किसान कम रेटों में भी बेच देता है और व्यापारी एक दिन में ही किसान द्वारा पैदा की गई सब्जी के दोगुने दाम वसूल कर लेता है।

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