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1400 साल बाद मिली महिलाओं को तीन तलाक से आजादी......

August 22, 2017 08:37 PM
प्रदीप दलाल


1400 साल बाद मिली महिलाओं को तीन तलाक से आजादी......
तीन तलाक पर कोर्ट की रोक का निर्णय बेहद ऐतिहासिक है क्योंकि यह महज निर्णय नहीं बल्कि यह तो आजादी है उन करोड़ों महिलाओं की जो घुट-घुटकर जीने को मजबूर थी। यह उन महिलाओं के सपनों को पंख लगने जैसा है जिन महिलाओं की जिंदगी को तीन तलाक रूपी कुप्रथा ने जहनुम्म ही बना दिया था। यह निर्णय तब और भी अहम हो जाता है जब महिला सशक्तिकरण की बाते करने वाले देश को मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से आजादी दिलाने में करीब 1400 वर्ष का लम्बा सफर तय करना पड़ा। तीन बार महज तीन शब्दों में सिमटी इस कुप्रथा ने आजाद देश की नागरिक मुस्लिम महिलाओं को कहीं न कहीं मानसिक गुलामी की बेड़ियों में जकड़ रखा था। आस्था के नाम पर महिलाओं पर सितम के किसी पहाड़ से कम नहीं था तीन तलाक। इस कुप्रथा ने महिलाओं की इज्जत, आत्मसम्मान को रौंदने का कार्य किया था लेकिन कहा जाता है कि अंधकार में ही उजाले के अहमियत का पता चलता है। इस दौरान न जाने कितनी महिलाओं को इस कुप्रथा के चलते कितनी ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अब सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है। तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है लेकिन यह पहले भी किया जा सकता था। इस कुप्रथा ने न जाने कितनी ही महिलाओं के जीवन में अँधियारा कर दिया। कुप्रथा के नाम पर कितनी ही जिंदगियाँ टूट कर बिखर गई, आखिर कौन समेटे उन जिंदगियों को, अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से एक उम्मीद की किरण जगी है। इसी के साथ उन करोड़ों महिलाओं को मानो कोर्ट के इस फैसले से नया जीवन मिला हो। जिससे उनके जीवन में नया सवेरा हो गया हो। अब ट्रिपल तलाक खत्म होने के बाद क्या होगा और क्या हो सकता है, वो स्थिति समझने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के तौर पर अब अगर कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को एक साथ तीन बार तलाक बोलकर तलाक देता है तो वो तलाक नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में महिला को तलाक न मानने का अधिकार रहेगा। उसे अपने शौहर के घर रहने का भी हक होगा। अब सवाल ये है कि बीवी को तलाक देने के बाद शौहर उसे घर रखेगा? अगर ऐसा कोई पुरुष तलाक देने के बाद अपनी पत्नी को घर से निकालने की जिद करता है तो महिला क्या करेगी? क्योंकि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक पर सिर्फ बैन लगाया है, उसको अंजाम देने वाले को क्या सजा दी जाएगी, ये कानून बनाकर सरकार को सुनिश्चित करना है। ये ठीक वैसे ही है, जैसे दहेज को सामाजिक बुराई मानते हुए उस पर रोक लगाई। मगर बाद में उसके लिए कानून बना और दहेज लेने वालों या दहेज के लिए दुल्हन का उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया। सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से मुस्लिम महिलाओं में एक उम्मीद की किरण जरूर जगी है तीन तलाक जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं और नेताओं को भी लोगों को जागरुक करना होगा। किसी को तीन तलाक कहना बहुत आसान होता है लेकिन उसके बाद उस महिला की जिंदगी किस प्रकार जहन्नुम बन जाती है। यह भी किसी से छिपा नहीं है इसलिए समय की जरूरत है कि इस तरह की कुप्रथाओं को जड़ से मिटा दिया जाए। जो लोग फिर भी इस तरह का घिनौना कार्य करते हैं उन्हें कानूनी रुप से कड़े से कड़ा दंड दिया जाए। सरकार और प्रशासन को इस तरह की कुप्रथाओं से पूरे सच्चाई और कडाई से निपटना होगा ताकि महिलाएं अपनी जिंदगी हँसी खुशी जी सके और वह स्वतंत्र देश की नागरिक हैं और उन्हें यह अधिकार भी है। कुप्रथा और उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं को नया सवेरा मुबारक हो। ऐसा सवेरा जिसमें उन्हें यह डर नहीं होगा कि कोई उंहें महज तीन बार तलाक कहकर उनकी जिंदगी न बर्बाद कर दे। ऐसा सवेरा जिसमें उत्पीड़न नहीं होगा। ऐसा सवेरा जो उनकी जिंदगी को खुशियों से सराबोर कर देगा और ऐसा सवेरा जिसका उन्हें कब से इंतजार था। आज वह सवेरा हुआ है। आओ लम्बे अंधियारे के बाद के इस सवेरे का जश्न मनायें। जो अपने उजाले से करोड़ों जिंदगियों को सराबोर करेगा......
जर्नलिस्ट प्रदीप दलाल की कलम से......

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