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Madhya Pradesh

सूचना के अधिकार अधिनियम की उड़ाई जा रही है धज्जियां

November 07, 2017 09:11 AM
निर्णय तिवारी
सूचना के अधिकार अधिनियम की उड़ाई जा रही है धज्जियां
छतरपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का कानून पूरे भारत में लागू किया गया। परंतु छतरपुर जिले में इस कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और लोगों को विभिन्न विभागों में जानकारियां नहीं दी जा रही हैं और अधिकारी खुलकर भ्रष्टाचार करने में आमादा है। जबकि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने लोकायुक्त एजेंसी को भी सूचना के दायरे में शामिल किया है। परंतु छतरपुर जिले में सूचना के अधिकार के तहत लगाए गए आवेदनों को लोकहित में न मानकर निरस्त कर दिया जाता है महिला बाल विकास विभाग में कई आवेदन सूचना के अधिकार के तहत लगाए गए परंतु अधिकारियों ने जानकारी देना उचित नहीं समझा। भले ही जुर्माना क्यों न लग जाए। इसी प्रकार कुछ जागरुक पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो अधिकारियों ने गोलमान जबाव देकर आवेदन को निरस्त कर दिया। मजेदार बात ये है कि जो जानकारी चाही गई उस जानकारी को देने में अधिकारियों को आखिरकार क्या परेशानी है। वहीं स्वामी प्रणवानंद महाविद्यालय में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई तो जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई महाराजा महाविद्यालय में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई तो महाराजा कॉलेज के प्राचार्य एलएल कोरी द्वारा आवेदक को मुख्य जानकारी न देकर ऊल फिजूल जानकारी देकर चालान से रुपए जमा करा लिए गए। कुल मिलाकर छतरपुर में भ्रष्ट अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देना नहीं चाहते। जिससे उनकी पोल न खुल जाए और लगातार भ्रष्टाचार कर रहे हैं। अभी हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एलान किया है कि भ्रष्ट अधिकारियों की जानकारी देने वालों को एक लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा और नाम गुप्त रखा जाएगा परंतु जिले में भ्रष्ट अधिकारियों का जाल फैला हुआ है और जो लोग गरीब लोगों की योजनाओं को पलीता लगाने में तुले हुए हैं। अब देखना है कि खबर छपने के बाद सूचना के अधिकार के तहत जानकारी दी जाती है या नहीं। 

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