Tuesday, June 25, 2019
 
BREAKING NEWS
लुप्त हुए "तरावड़ी गेट' और 'बाजारी गेट' कुछ हिस्सा बचने पर ऐतिहासिक करनाली गेट का होगा पुन: निर्माणइंडिया टीम में तेज गेंदबाजी कर परचम लहराऐगा तरावड़ी का नवदीप सैणीनशा मुक्ति दिवस पर 26 जून को सैमिनार, बुद्धिजिवी वर्ग तथा सामाजिक संस्थाए करेंगी प्रतिभागी प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना लागू ,गरीब व्यक्ति को भी आर्थिक लाभ मिलेगा -डीसी दीपेंद्र को हरियाणा कांग्रेस प्रधान बनवाने के लिए बड़ी ताकतें हुई लामबंद,कांग्रेस के आधा दर्जन बड़े नेता कर रहे सामूहिक प्रयासनगर परिषद कैथल के सफाई कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से अंगूरी देवी को चुना प्रधान पत्रकार संघ के प्रदेशाध्यक्ष बने तरावड़ी के संजीव चौहानलाड़वा हल्के मे मल्टीपल खेल स्टेडिरूम बनवाना होगा प्राथमिकता : संदीप गर्गमुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व मे लाड़वा हल्के ने छुए विकास के नए आयाम : पवन सैनी भाजपा विधायक ने मंत्री के सामने लगाए एसपी मुर्दाबाद के नारे

Fashion/Life Style

क्या मैं गलत रास्ते पर हूँ..? ||

November 11, 2017 02:17 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

क्या मैं गलत रास्ते पर हूँ..? ||

आप कहते है, अपने सारे मुखौटे हटा दो और प्रमाणिक हो जाओ। मैं केवल सेक्‍स, प्रेम और रोमांस के बारे में सोचती हूं, इनके अतिरिक्‍त और जानती नहीं हूं, क्‍या में गलत रास्‍ते पर हूं?

ओशो - मुझे सेक्स में, रोमांस में कुछ भी गलत नहीं दिखाई पड़ता। तुम ठीक रास्ते पर हो। प्रेम उचित पथ है, और केवल प्रेम के जीवन को जीने के माध्यम से ही प्रार्थना उठती है—और किसी भांति नहीं। प्रेम के गहरे, मीठे और कड़वे, प्रसन्नतादायी और पीड़ादायक, ऊंचे और नीचे, स्वर्ग और नरक, अनुभवों के माध्यम से ही, केवल प्रेम के माध्यम से मिली पीड़ा और प्रसन्नता के गहन अनुभवों द्वारा ही व्यक्ति सजग हो पाता है। तुमको सजग बनाने के लिए उनकी आवश्यकता होती है।
पीड़ा की उतनी ही आवश्यकता है जितनी प्रसन्नता की है, क्योंकि दोनों कार्य करती हैं। और धीरे— धीरे प्रसन्नता और पीड़ा के मध्य में तुम रस्सी पर चलने वाले नट बन जाते हो। तुम संतुलन उपलब्ध कर लेते हो।
लेकिन सदियों से प्रेम की निंदा की गई है, काम की निंदा की गई है। इसलिए, निःसंदेह तुम्हारे मन में यह खयाल उठता है कि तुमको गलत रास्ते पर होना चाहिए। तुम बस प्राकृतिक हो। प्राकृतिक होना गलत रास्ते पर होना नहीं है। यदि तुम इस ढंग से विचार करती हो तो तुम निंदात्मक वृत्ति वाली हो जाती हो, और तब तुम गलत रास्ते पर होगी। तब तुम दमन करोगी, और तुम जो कुछ भी दमन करोगी वह तुम्हारे अचेतन में, तुम्हारे तलघर में छिप कर बैठा रहेगा, और फिर उस दमन से बहुत सी कुरूपता उठ खड़ी होती है।
मैं तुम्हें कुछ कहानियां सुनाता हूं।
एक बहुत धनी और विख्यात व्यक्ति लार्ड डयूसबरी के बारे में ऐसा कहा गया है : उस समय वह नब्बे वर्ष का था, और वह पार्क लेन के अपने आवास के भूतल पर खाड़ी की ओर खुलने वाली खिड़की के सामने बैठा हुआ, रविवार की प्रातःकाल भ्रमण करने वालों को देख रहा था। अचानक उसने एक आकर्षक, युवा, गौरवर्ण लड़की को पार्क में बच्चा—गाड़ी धकेलते हुए देखा। जल्दी करो जेम्स, वह बोला, मेरे दांत ले लाओ; मैं सीटी मारना चाहता हूं।
नब्बे साल की आयु! लेकिन होता है यह।

यह प्रश्न कृष्णप्रिया ने पूछा है।
याद रखो, यदि तुमने सीटी अभी नहीं बजाई तो किसी दिन जब तुम्हारे दांत भी गिर चुके होंगे और तुम किसी युवक को टहलते हुए देखोगी और चिल्लाओगी : जल्दी करो मेरे दांत ले आओ! कुरूप होगा यह। अभी इसी समय दांत ठीक—ठाक हैं, तुम सीटी बजा सकती हो। प्रत्येक कार्य को उसके समय पर ही किया जाना चाहिए। अन्यथा चीजें कुरूप हो जाती हैं।
एक बच्चा तितलियों के पीछे दौड़ रहा है, यह ठीक है, लेकिन चालीस वर्ष का कोई व्यक्ति यदि तितलियों के पीछे दौड़ रहा हो तो वह पागल प्रतीत होगा, युवा व्यक्तियों को थोड़ा सा मूर्ख होना अनिवार्य है। उसकी व्यक्ति अपेक्षा रखता है और उसे स्वीकार भी करता है। कुछ भी गलत नहीं है इसमें। इसको जीवन का आधार तथ्य होना चाहिए : किन्हीं समयों पर मूर्ख हो जाना, क्योंकि बुद्धिमत्ता अनेक मूर्खताओं के अनुभव से आया करती है। तुम अचानक बुद्धिमान नहीं हो जाते हो। तुमको चलना पडेगा, और भटकना पड़ेगा, और अनेक मूर्खतापूर्ण कार्य करने पड़ेंगे। और इन सभी मूर्खतापूर्ण या दूसरे ढंग के कृत्यों के द्वारा बुद्धिमत्ता का उदय होता है।
बुद्धिमत्ता एक सुगंध की भांति है, और मूर्खताओं के अनुभव खाद की तरह कार्य करते हैं। उनसे दुर्गंध उठती है, लेकिन उनसे सुंदर पुष्प आते हैं। इसलिए जीवन की खाद की उपेक्षा मत करो, वरना तुम बुद्धिमत्ता के पुष्पों से चूक जाओगे। और तुम एक इच्छा का एक ओर से दमन कर सकती हो, लेकिन तब यह दूसरी ओर से उठने लगती है। तुम जीवन को धोखा नहीं दे सकते।
मम्मी, उस छोटे विचित्र बच्चे ने कहा : स्कूल में बच्चे कहते रहते हैं कि मेरा सिर बहुत बडा है। तुम्हारा सिर तो कोई खास बड़ा नहीं है, मां ने कहा। उन शैतान बच्चों के बारे में बस भूल जाओ और मेरे साथ बाजार चलो। मुझको दस पाउंड आलू पांच पाउंड शलजम और दो गोभियां खरीदना है।
ठीक है, मम्मी। सब्जी रखने वाला थैला कहां है?
ओह, उसकी चिंता मत करो। बस अपनी टोपी का उपयोग कर लेना।
इसलिए इस रास्ते से या उस रास्ते से.. .एक बार और सोचो दस पाउंड आलू पांच पाउंड शलजम और दो गोभियां—और बस अपनी टोपी प्रयोग कर लेना। तुम एक ओर से दमन कर सकती हो, यह दूसरी ओर से उभर कर आ जाता है। कभी किसी चीज का दमन मत करो। यदि काम वहा है तो इसके पहले कि बहुत देर हो जाए इसे स्वीकार करो। इसको हां कहो, इसमें उतर जाओ, इसे स्वीकार कर लो। यह परमात्मा की दी हुई चीज है। इसमें कोई गहरा कारण होना चाहिए। इसमें गहरा कारण है। कभी किसी ऐसे उत्तरदायित्व से बच कर मत भागो जो परमात्मा ने तुमको दिया हुआ है, वरना तुम विकसित न हो पाओगी। और अब इस शताब्दी में, इस बीसवीं शताब्दी में ऐसे प्रश्न पूछना बस निरी मूर्खता है।

यह छह वर्षीय बालक पहली बार चिड़िया घर देखने गया था, और जैसा कि होता है ढेर सारे हैरान करने वाले 'सवाल पूछे जा रहा था। पिताजी, हाथी के बच्चे कहां से आते हैं, उसने पूछा। फिर उसने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, और यदि अब आपने अपनी पुरानी जल—पक्षी वाली कहानी सुनाई तो मैं वास्तव में मान जाऊंगा कि आप निरे पागल हैं।
वे मूर्खतापूर्ण दिन विदा हो चुके हैं जब लोग जीवन—निषेधक विचारधाराओं, जीवन की निंदाओं के रूप में सोचा करते थे। फ्रायड के बाद मनुष्य ने काम— भावना को अधिक स्वाभाविक ढंग से स्वीकार कर लिया है। इस संसार में एक बड़ी क्रांति घटित हो चुकी है।
अब निंदात्मक रूप में विचार करना समकालीन होना नहीं है। अब कृष्‍णप्रिया का प्रश्न ठीक था, यदि उसने इसे पांच सौ वर्ष पहले पूछा होता, लेकिन अब? असंगत है यह। और वह भी मेरे आश्रम में ??

ओशो

Have something to say? Post your comment

More in Fashion/Life Style

अनुराधा गुप्ता ने नरेंद्र मोदी के लिए अविस्मरणीय यादें समेटी

गुड़गांव के सेक्टर 29 सुशांत लोक में kraantz आर्ट गैलरी

NATIONALITIES ADD COLOR, CULTURAL TEXTURES, HOOSIER INTERNATIONAL SPIRIT TO THE 2019 IPL 500 FESTIVAL PARADE

विधवा थी पर श्रृंगार ऐसा कर के रखती थी कि पूछो मत , पूरी कॉलोनी में उनके चर्चे थे

कक्षा 5 की क्लास टीचर थी ,कक्षा मे आते ही हमेशा "LOVE YOU ALL" बोला करतीं थी

डॉ सुलक्षणा ने शिक्षा मंत्री को भेंट किया अपना हरियाणवी संग्रह

उर्मिला बूरा को मिलेगा संस्कृति रक्षक अवार्ड

popular models and celebrities who rocked the ramp with apparels,

जिस दिन स्त्री खुद को खुद की नज़रों से देखेगी दुनिया की नहीं उस दिन उसकी सौंदर्य की परिभाषा भी बदल जाएगी

23 कन्याओं के विवाह का साक्षी बनेगा शहर नरवाना