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Madhya Pradesh

सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के जख्मों पर गीत-संगीत के नाम पर किसानो से किया गया छल

December 27, 2017 10:10 AM
निर्णय तिवारी
सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के जख्मों पर गीत-संगीत के नाम पर किसानो से किया गया छल
 
     
छतरपुर/खजुराहो/  खजुराहो रेलवे स्टेशन पर शाम पांच बजे से छह बजे तक का नजारा आंखों में पानी ला देने वाला होता है, जहां सैकड़ों परिवार दिल्ली जाने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में भेड़-बकरियों की तरह जगह-जगह जाने के लिए पूरा जोर आजमाइश लगाते देखे जा सकते हैं क्योंकि यहां रोजी-रोटी का इंतजाम नहीं होने पर उन्हें परदेस जाना पड़ रहा है।
 
 
यहाँ खजुराहो स्टेशन से मात्र 7 किलोमीटर दूर सात दिन तक ऐसा गीत, संगीत और फिल्मों के प्रदर्शन का दौर चला, जिसने अपने आपको संवेदनशील कही जाने वाली सरकार और प्रशासन की असंवेदनशीलता को सामने ला दिया। सरकार और प्रशासन जनता के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए होता है, न कि जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए, मगर मध्य प्रदेश की सरकार और बुंदेलखंड के प्रशासन ने सूखाग्रस्त इलाके के जख्मों पर नमक छिड़कने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक तरफ हर रोज पांच हजार लोग पलायन करते रहे, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की चकाचौंध में खजुराहो डूबा रहा।
 
खजुराहो निवासी राकेश अनुरागी (25) घर छोड़कर रोजगार की तलाश में दिल्ली गया है। उसे खजुराहो महोत्सव से ज्यादा अपनी रोजी रोटी की चिंता है। वह कहता है कि उसने यह जरूर देखा है कि कई जगह सजावट है और गाड़ियों की कतारें लगी है और कुछ संगीत की धुनें सुनाई देती हैं, मगर इससे हमारा क्या होगा, हमें तो रोजगार चाहिए, वह सरकार कर नहीं रही है। जो हो रहा है वह सब बड़े लोगों के लिए है, हम गरीबों की चिंता सिर्फ चुनाव के समय वोट के लिए होती है।
 
सात दिन तक चले तीसरे खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दुनिया और देश के कई बड़े कलाकार जिनमें फ्रेंच अभिनेत्री मैरीने बरोजे, बॉॅलीवुड के जैकी श्राफ, शेखर कपूर, रमेश सिप्पी, मनमोहन शेट्टी, गोविंद निहलानी, रंजीत, प्रेम चोपड़ा, राकेश बेदी, सुष्मिता मुखर्जी सहित कई अन्य कलाकारों ने हिस्सा लिया। साथ ही विभिन्न देशों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। यह समारोह राज्य के संस्कृति, पर्यटन, शहरी विकास, जनसंपर्क विभाग ने मिलकर आयोजित किया था।
 
बुंदेलखंड से हर दिन 1000 मजदूर कर रहे पलायन
स्थानीय बुद्धिजीवी एवं बरिष्ठ पत्रकार रवींद्र व्यास कहते हैं कि सरकार का राजधर्म है कि जब कोई क्षेत्र प्राकृतिक आपदा या विभीषिका से जूझ रहा हो, तो वहां उत्सव नहीं होते, राज्य में तो किसान हितैषी सरकार है, फिर यह आयोजन कैसे हुआ, यह बड़ा सवाल है। खजुराहो से निजामुद्दीन जाने वाली गाड़ी में सिर्फ खजुराहो स्टेशन से ही हर रोज एक से  हजार मजदूर पलायन कर रहे हैं, जो हालात को बताने के लिए काफी है। वहीं दूसरी ओर इस महोत्सव को देखने मुश्किल से हर रोज दो सौ से ज्यादा दर्शक नहीं पहुंचे, तो इससे ज्यादा कुर्सियां खाली रहीं। आखिर यह आयोजन किसके लाभ के लिए और किसकी मर्जी से हुआ, यह शोध का विषय है।
 
जनसंपर्क विभाग ने नहीं किया फिल्मोत्सव का आयोजन
जनसंपर्क विभाग के आयुक्त पी. नरहरि ने बताया कि इस फिल्मोत्सव का आयोजक उनका विभाग नहीं था, हां कुछ सहयोग जरूर किया है। बस इतनी ही हिस्सेदारी थी हमारे विभाग की। फिल्म समारोह के आयोजन में अहम भूमिका निभाने वाले पर्यटन विभाग के मंत्री सुरेंद्र पटवा से कई बार संपर्क किया गया, मगर वे उपलब्ध नहीं हुए। उनके निजी सहायक ने बैठकों में व्यस्त होने की बात कही।
 
सरकार को किसानो की नहीं, खजुराहो को पहचान दिलाने की चिंता
खजुराहो समारोह में राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते भी पहुंचे। भार्गव ने यहां की समस्याओं की नहीं, बल्कि इस आयोजन से खजुराहो को दुनिया में नई पहचान मिलने का जिक्र किया। साथ ही भरोसा दिलाया कि खजुराहो में नाट्य विद्यालय स्थापित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
 
 
 
रोजगार की तलाश में 5 लाख लोगों ने किया पलायन
विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है, शिवराज सिंह चौहान सरकार जो अपना चेहरा दिखाती है, वह उसका असली चेहरा नहीं है, वास्तव में उसका असली चेहरा असंवेदनशील है। तभी तो वह एक तरफ जहां एकात्म यात्रा निकाल रही है, तो दूसरी ओर खजुराहो में फिल्मोत्सव आयोजित करती है। उसे यहां के किसान मजदूर की चिंता नहीं है, तभी तो लगभग पांच लाख लोग काम 

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