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Literature

श्रीमद् भागवत कथा में दिखाया कृष्ण-सुदामा चरित्र नेकी कर दरिया में डाल: गोस्वामी

January 31, 2018 04:17 PM
संजय गर्ग
श्रीमद् भागवत कथा में दिखाया कृष्ण-सुदामा चरित्र
नेकी कर दरिया में डाल: गोस्वामी
लाडवा, 31 जनवरी(संजय गर्ग): श्री कृष्ण भक्त परिवार लाडवा द्वारा  शहर की शिवाला रामकुंडी पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के सातवें व अंतिम दिवस पर प्रसिद्व कथावाचक भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी जी महाराज ने शंख की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शंख पुण्य का प्रतीक होता है इसलिए हर धार्मिक कार्य से पहले शंख का उद्घोष किया जाता है और शंख ध्वनि कोनों में छुपे हुए पापों को भी दूर भगा देती है। 
प्रसिद्व कथावाचक भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के विवाहों का वर्णन करते हुए कि कृष्ण जी की 16108 रानियां थी जिसमें से रुक्मणि, जामवंती, सत्यभामा, यमुना, नगनजीति, श्रुतकीर्ति, भद्रा, लक्ष्मा उनकी 8 पटरानियेां थी और 16100 रानियां उन्होंने वमासुर व् मूर राक्षसों के बंदीगृह से छुडाई हुई कन्यायें बनाई थी। उन्होंने कृष्ण के मुरारी नाम पड़ने का भी वर्णन किया कि कृष्ण ने मूर नामक राक्षस का वध किया था तो मूर के शत्रु होने के नाते उनका नाम मुरारी पड़ा। उन्होंने हनुमान जी के भगवान राम द्वारा उपहार में दी गई माला तोड़ने, हनुमान जी द्वारा छाती चीर कर राम सीता छवि दिखाना व उनका माता सीता को सिंदूर लगता देख कर अपने पुरे शरीर को सिंदूर से रंग लेने की कथाओं का भी वर्णन किया। सातवें व अंतिम दिवस की कथा के अंतिम चरण में उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के कहने से अपने परम मित्र 'श्री कृष्ण, से मिलने द्वारिका नगरी गए, तो उनके मित्र भगवान श्री कृष्ण ने उनके आतिथ्य सत्कार के साथ -साथ उनके आत्म -सम्मान और उनके सवाभिमान का भी पूरा ध्यान रखा। जो भगवान श्री कृष्ण के अनुसार'' एक भक्त की भक्ति का सम्मान करना भगवान का परम कार्य है , तो जैसे ही सुदामा अपने मित्र श्री कृष्ण के द्वार पर पहुंचे, कृष्ण ने सुदामा को 'हे मित्र सुदामा, कहकर गले से लगा लिया था मित्र की ये दशा देख कर' करुणासागर, ने अपने आंसुओ से ही उनके पैर धो दिए थे सुदामा के फटे वस्त्र धोने के लिये दे दिए, और उन्हें अपने नए वस्त्र पहनाये फिर सोने के थाल मे भोजन लाकर के कहा 'मित्र सुदामा अब आप भोजन करे , तब सुदामा ने कहा 'आप भी मेरे साथ खाना खाहिए , नहीं सुदामा मै तुम्हारे साथ नहीं खाऊंगा , ऐसा इसलिए नहीं कहा कि भागवान कृष्ण अपने गरीब मित्र सुदामा के साथ नहीं खाना चाहते थे, वो तो उनका झूठा खाना चाहते थे। झांकी के माध्यम से कृष्ण-सुदामा के इस चरित्र का जीवंत वर्णन उपस्थित श्रद्वालुओं की आँखों में आंसू छोड़ गया और भागवत भगवन की आरती व प्रसाद वितरण के साथ भागवत कथा सम्पूर्ण हुई। भागवत की सम्पूर्णता पर विशाल यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डा. गणेश दत्त शर्मा, कुलदीप तलवाड़, सोमप्रकाश शर्मा, शशि तलवाड़, भूपिन्द्र सिंह, कंवरदीप सिंह, संजय शर्र्मा, प्रदीप सहगल, सतप्रकाश शर्मा, भुवेश सहगल, अनिल गुप्ता, सुभाष सहगल आदि उपस्थित थे। 

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