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UAPA-न्‍यूजक्लिक के संस्‍थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ को रिहा किया जाए -सुप्रीम कोर्ट

न्‍यूजक्लिक के संस्‍थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ को रिहा किया जाए -सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने न्‍यूजक्लिक के संस्‍थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ को बड़ी राहत प्रदान की है. UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून) की सख्‍त धाराओं के तहत गिरफ्तार पुरकायस्‍थ को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने न्‍यूजक्लिक के एडिटर की रिहाई का आदेश सुनाते हुए पुलिस के तौर तरीकों को लेकर भी गंभीर टिप्‍पणी की है. इससे पहले प्रबीर पुरकायस्‍थ की गिरफ्तारी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्‍त टिप्‍पणी की थी. शीर्ष अदालत ने कई सवाल उठाए थे. कोर्ट ने पूछा था कि दिल्‍ली पुलिस ने प्रबीर पुरकायस्‍थ की गिरफ्तारी के बाद उनके वकील को सूचित किए ब‍िना मजिस्‍ट्रेट के सामने पेश करने में जल्‍दबाजी क्‍यों की?
UAPA की सख्‍त धाराओं के तहत न्‍यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ को हिरासत में लिया गया था. वह सख्‍त कानून के प्रावधानों के तहत जेल में बंद थे. अब सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने न्यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत प्रदान की है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बुधवार को प्रबीर पुरकायस्‍थ को जमानत पर रिहा करने का आदेश्‍ दिया है. बता दें कि पुरकायस्थ पर राष्ट्र विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए चीन से फंड हासिल करने का गंभीर आरोप लगाया गया है. प्रबीर पुरकायस्‍थ ने यूएपीए के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अब शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका को स्‍वीकार करते हुए उन्‍हें रिहा करने का आदेश दिया है.
गंभीर आरोप
न्‍यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. अभियोजन पक्ष का कहना है कि उन्‍होंने न्‍यूजक्लिक पोर्टल के जरिये राष्‍ट्रविरोधी प्रचार बढ़ावा देने के लिए चीन से फंडिंग हासिल की थी. इस मामले में उन्‍हें 3 अक्‍टूबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था. उन्‍हें 4 अक्‍टूबर को मजिस्‍ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था. दिल्‍ली पुलिस की चार्जशीट में IPC की धारा 153A, 120A और UAPA की धारा 13, 16, 17, 18, 22C, 39 और 40 के तहत आरोप लगाए गए हैं. इन सख्‍त धाराओं के तहत वेबसाइट के फाउंडर को आरोपी बनाया गया है. दिल्‍ली पुलिस का कहना है कि उनके केस में कुल 8 प्रोटेक्टेड गवाह हैं.Newsclick’s founding editor Prabir Purkayastha should be released – Supreme Court
पुलिस पर सवाल
न्‍यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम के बेहद सख्‍त प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था. पुरकायस्‍थ पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे. न्‍यूजक्लिक के संपादक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के वक्त पुरकायस्थ को पुलिस ने गिरफ्तारी का आधार नहीं दिया था. इसलिए प्रबीर पुरकायस्थ जमानत के हकदार हैं. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस की जल्‍दबाजी पर भी सवाल उठाए थे. कोर्ट ने कहा था कि पुरकायस्‍थ के वकील को सूचित किए बगैर उन्‍हें मजिस्‍ट्रेट के समक्ष पेश कर दिया गया.
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