न्यूयॉर्क में काउंसिल सदस्यों ने भागवत कार्यक्रम रद्द करने की मांग की

न्यूयॉर्क /27 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
न्यूयॉर्क शहर में 29 अगस्त को होने वाले एक कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इस दिन मैडिसन स्क्वायर गार्डन में बोलने वाले हैं। कार्यक्रम का नाम यूनिवर्सल ओनेस सेलिब्रेशन रखा गया है। इसे अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग यानी AHEAD फोरम आयोजित कर रहा है।
यह कार्यक्रम आरएसएस की शताब्दी वर्ष वैश्विक आउटरीच का हिस्सा है। भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर हैं। न्यूयॉर्क में वे करीब पांच हजार भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है के संदेश पर आधारित है।
लेकिन कई नागरिक अधिकार संगठन, धार्मिक समूह और स्थानीय नेता इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मैडिसन स्क्वायर गार्डन से इस कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की है। न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल मेंबर शाहाना हनीफ, लिंकन रेस्टलर और जूली वॉन शामिल हुए। डेमोक्रेटिक पार्टी के कांग्रेस नॉमिनी और पूर्व सिटी कॉम्प्ट्रोलर ब्रैड लैंडर भी वहां थे। उन्होंने इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के बयान पर हस्ताक्षर किए।
ब्रैड लैंडर ने कहा कि मोहन भागवत को शहर के इस प्रतिष्ठित स्थल का इस्तेमाल नहीं करने देना चाहिए। उनका संगठन सिखों, मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए जाना जाता है। लैंडर ने खुद को गर्वित यहूदी न्यूयॉर्कर बताते हुए कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन को घृणा फैलाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
उन्होंने 1939 में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुए नाजी रैली का जिक्र किया। उस समय हजारों लोग धार्मिक घृणा और हिंसा का समर्थन कर रहे थे। लैंडर ने कहा कि MSG ने कहा था कि वह फिर कभी ऐसे कार्यक्रम नहीं करेगा। इसलिए इस कार्यक्रम को भी नहीं होना चाहिए।

शाहाना हनीफ ने कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन को मोहन भागवत और उनके आंदोलन को मंच नहीं देना चाहिए। इस आंदोलन का धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा का इतिहास दर्ज है। उन्होंने इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और शहर के समुदायों के साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने जोर दिया कि न्यूयॉर्क शहर में घृणा का कोई स्थान नहीं है।
इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल की बोर्ड मेंबर सफा अहमद ने कहा कि आरएसएस एक नाजी प्रेरित अर्धसैनिक समूह है। इसका उद्देश्य भारत को धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र से हिंदू एथनोस्टेट बनाना है। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क शहर को साफ कहना चाहिए कि मोहन भागवत यहां स्वागत योग्य नहीं हैं।
IAMC के एसोसिएट डायरेक्टर अमीन जामा ने कहा कि जब बहिष्कार की राजनीति को मंच मिलता है तो हम चुप नहीं रहेंगे।
हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स की काइली माधव ने कहा कि न्यूयॉर्कर के रूप में, हिंदू के रूप में और विवेकशील लोगों के रूप में हम चुप नहीं रह सकते। दूर-दराज के घृणा फैलाने वाले हमारे धर्म का दुरुपयोग कर विभाजन की राजनीति फैला रहे हैं।
सेव अमेरिका फ्रॉम हिंदुत्व की सरिता पांडे ने कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन को अपना नाम, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता इस परियोजना को नहीं देनी चाहिए।फेथ बियॉन्ड रिलिजियस नेशनलिज्म के रेवरेंड पीटर कुक ने कहा कि हम इस विचार को खारिज करते हैं कि मुसलमान, ईसाई, सिख, यहूदी या कोई भी अल्पसंख्यक दूसरे दर्जे के नागरिक माने जाएं।
न्यूयॉर्क सिख काउंसिल के जपनीत सिंह ने कहा कि यह सवाल है कि न्यूयॉर्क लोकतंत्र, बहुलवाद और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ खड़ा होगा या धार्मिक चरमपंथ को समानता से ऊपर रखने वाली विचारधारा को मंच देगा।दलित सॉलिडैरिटी फोरम की क्षिप्रा उके ने कहा कि आरएसएस अमेरिका में धोखेबाज फ्रंट संगठनों के जरिए काम करता है। ये संगठन समुद्र पार करोड़ों डॉलर भेजकर भारत में हिंसक, जातिवादी और कट्टरपंथी एजेंडा चलाते हैं।

लेखक और पत्रकार पीटर फ्रेडरिक ने कहा कि आरएसएस अपनी मौत की विरासत को सार्वभौमिक एकता के शब्दों में छुपाता है। उनके प्रमुख यहां अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध मंच पर सौ साल की हत्याकांड को साफ करने आए हैं। आरएसएस के हाथों का खून उन सबको दागदार करेगा जो उनका स्वागत करेंगे।
पूर्व सिएटल सिटी काउंसिल सदस्य क्षमा सावंत ने हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और अन्य संगठनों का धन्यवाद किया जो भागवत के कार्यक्रम को रोकने की मांग कर रहे हैं।
IAMC ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन से 29 अगस्त के कार्यक्रम को रद्द करने की अपील की। उन्होंने अमेरिकी संस्थानों, निर्वाचित अधिकारियों और समुदाय के नेताओं से भी अपील की कि वे चरमपंथी और फासीवादी समूहों के निमंत्रण को खारिज करें जो घृणा और हिंसा का हथियार बनाते हैं।
इस मांग का समर्थन 48 संगठनों ने किया है। इनमें 18 मिलियन राइजिंग, अरब रिसोर्स एंड ऑर्गनाइजिंग सेंटर, एशियाई शरणार्थी यूनाइटेड, बोस्टन कोएलिशन फॉर पैलेस्टाइन, दलित सॉलिडैरिटी फोरम, डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका, डीआरयूएम, एनसाफ, ज्यूज फॉर रेसियल एंड इकोनॉमिक जस्टिस, मुस्लिम्स फॉर प्रोग्रेसिव वैल्यूज, न्यूयॉर्क सिख काउंसिल, सखी फॉर साउथ एशियन सर्वाइवर्स, साधना, सिख कोएलिशन, द इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क, द मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स काउंसिल और कई अन्य शामिल हैं। बाद में यह संख्या 61 तक पहुंच गई।
इसी बीच अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF ने भी बयान जारी किया। भागवत की अमेरिका यात्रा से दो दिन पहले आयोग ने कहा कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और बिगड़ रही है।
USCIRF के चेयर एसिफ महमूद ने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा और उकसावे का इस्तेमाल आम हो गया है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से आरएसएस सदस्यों और भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने पर विचार करने को कहा। उन्होंने भागवत का वीजा रद्द करने और उन्हें भविष्य में अमेरिका प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की भी सिफारिश की।
आयोग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्ताधारी भाजपा ने ऐसी नीतियां लागू की हैं जो आरएसएस की हिंदुत्व विचारधारा से मेल खाती हैं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव करती हैं। उन्होंने मोब लिंचिंग, एंटी-कन्वर्जन कानूनों और अन्य मुद्दों का जिक्र किया।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरन मामदानी ने भी इस कार्यक्रम का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि वे रैली का समर्थन नहीं करते। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि शहर के पास निजी कार्यक्रम रद्द करने का अधिकार नहीं हो सकता। मामदानी न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी और मुस्लिम मेयर हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की बहिष्कार वाली दृष्टि का उदय परेशान करने वाला है। उनके परिवार का भारत से जुड़ाव है और उन्होंने भारत को बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष माना है।
मेयर के कार्यालय से भी अपील की गई कि 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन भागवत की मेजबानी कर रहा है। न्यूयॉर्क शहर को इस यात्रा का सम्मान नहीं करना चाहिए। आधिकारिक स्वागत न किया जाए और कार्यक्रम का सार्वजनिक विरोध किया जाए।आयोजकों की तरफ से कहा गया कि कार्यक्रम खुली चर्चा की भावना से आयोजित किया जा रहा है। आरएसएस ने सभी इच्छुक लोगों को अपने दर्शन को समझने के लिए आमंत्रित किया। AHEAD फोरम ने कहा कि कार्यक्रम कृत्रिम विभाजनों से परे देखने और आपसी सम्मान का संदेश देता है।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने सुरक्षा सलाह जारी की और कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कुछ समर्थकों ने मेयर की आलोचना की और कहा कि विरोध राजनीतिक वजहों से हो रहा है।
कार्यक्रम अभी तय समय पर होने वाला है। विरोध करने वाले समूह मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से संपर्क करने और रद्द करने की मांग रखने को कहा है।यह विवाद सिर्फ न्यूयॉर्क तक सीमित नहीं है। कनाडा में भी भागवत की प्रस्तावित यात्रा को लेकर सांसदों और समूहों ने आपत्ति जताई है। अमेरिका में कई पत्रों के जरिए विदेश विभाग से वीजा रद्द करने की मांग की गई है।
न्यूयॉर्क जैसे विविधतापूर्ण शहर में यह चर्चा धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चल रही है। दोनों पक्ष अपने तर्क रख रहे हैं। एक तरफ आयोजक एकता और सांस्कृतिक संदेश की बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ आलोचक इतिहास, हिंसा के आरोपों और विचारधारा का जिक्र कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं और संगठनों की मांग है कि शहर घृणा को मंच न दे। मेयर ने अपना विरोध साफ कर दिया है लेकिन कानूनी सीमाओं का भी जिक्र किया है। USCIRF जैसी संस्था की सिफारिशें गैर-बाध्यकारी हैं लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है।
29 अगस्त को क्या होता है यह देखना बाकी है। लेकिन इस बीच न्यूयॉर्क में आवाजें बुलंद हैं कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन इस कार्यक्रम को रद्द करे। नागरिक समाज के संगठन लगातार अपील कर रहे हैं। काउंसिल मेंबर और कांग्रेस नॉमिनी भी उनके साथ खड़े हैं।
यह समाचार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है क्योंकि इसमें भारत की प्रमुख संगठन का प्रमुख, अमेरिकी शहर का प्रतिष्ठित स्थल, स्थानीय राजनीति और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे जुड़े हुए हैं। न्यूयॉर्क की विविध आबादी में यह बहस गहरी छाप छोड़ रही है।