बदलते समय के साथ रिश्तों को संभालने की जरूरत : पलक सिंगला

तरावड़ी में रक्षाबंधन पर्व को लेकर श्री राम राइस यूनिट की सीएमडी एवं समाजसेविका पलक सिंगला ने विशेष संदेश दिया है।उन्होंने कहा है कि बदलते समय के साथ रिश्तों को भी संभालने की बहुत जरूरत है।रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है।यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और अपनापन की डोर को मजबूत करने का एक खास अवसर है।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में समय की कमी के कारण रिश्तों में दूरियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।ऐसे पर्व हमें अपने परिवार और अपनों के करीब आने का बहुत महत्वपूर्ण संदेश देते हैं।
तकनीक के दौर में अपनों से दूर हो रहा इंसान
श्री राम राइस यूनिट की सीएमडी एवं समाजसेविका पलक सिंगला ने रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए अपनी बात रखी।उन्होंने कहा कि आज के इस आधुनिक दौर में इंसान तकनीक से तो जुड़ता जा रहा है।लेकिन वह कहीं न कहीं अपने अपनों से दूर भी होता जा रहा है।परिवार एक साथ एक ही घर में होते हुए भी कई बार बातचीत के लिए समय नहीं निकाल पाता है।ऐसे में रक्षाबंधन जैसे पावन त्योहार हमें यह याद दिलाते हैं कि जीवन में सबसे अनमोल पूंजी हमारे रिश्ते ही हैं।भाई-बहन का रिश्ता बचपन की मीठी यादों, नोकझोंक, स्नेह और अटूट विश्वास से गहराई से जुड़ा होता है।राखी का धागा भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन इसमें भावनाओं का पूरा संसार समाया होता है।हमें केवल किसी एक त्योहार के दिन ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष अपने रिश्तों को समय देना चाहिए।हमें अपने रिश्तों को पूरा सम्मान और अपनापन भी देना बहुत जरूरी है।
परिवार और समाज की मजबूती के लिए रिश्तों का महत्व
पलक सिंगला ने स्पष्ट रूप से कहा कि बदलते समय के साथ अब रिश्तों को भी संभालने की सख्त जरूरत है।परिवार के बुजुर्गों के साथ समय बिताना आज के समय में बहुत आवश्यक हो गया है।बहन-भाई का एक-दूसरे का हर परिस्थिति में साथ देना भी उतना ही जरूरी है।बच्चों को हमारे पारिवारिक रिश्तों का सही महत्व समझाना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।उन्होंने सभी देशवासियों और क्षेत्रवासियों से एक विशेष आह्वान किया है।इस रक्षाबंधन पर केवल राखी बांधने और उपहार देने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए।हमें एक दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने व्यस्त जीवन में से अपनों के लिए समय निकालेंगे।हमें रिश्तों में आई सभी प्रकार की दूरियों को हमेशा के लिए मिटाना होगा।हमें अपने परिवार को प्रेम और विश्वास की मजबूत डोर के साथ हमेशा जोड़कर रखना चाहिए।एक मजबूत परिवार ही एक मजबूत और स्वस्थ समाज की असली नींव बनता है।रिश्तों की यह डोर जितनी अधिक मजबूत होगी, हमारा समाज उतना ही अधिक संवेदनशील और संस्कारवान बनेगा।नोट : इस खबर के साथ समाजसेविका पलक सिंगला की फोटो भी शामिल है।