यूजीसी के 2026 के प्रस्तावित नियमों के विरोध में पलवल बंद, जंतर-मंतर पर दिया गया धरना

यूजीसी के 2026 के प्रस्तावित नियमों के विरोध में सोमवार को पलवल में संपूर्ण बाजार बंद रहा। बाजार बंद रखने के बाद बड़ी संख्या में दुकानदार और स्थानीय लोग जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। सभी लोगों ने वहां धरना दिया और केंद्र सरकार से यूजीसी के नियमों को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में समानता, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का संरक्षण होना बहुत जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष ने उठाए सवाल
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता मुनीश भारद्वाज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए यूजीसी के प्रावधानों पर सवाल उठाए। उन्होंने इन प्रावधानों को देश के लिए विभाजनकारी बताते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता की मांग की गई थी। लेकिन यूजीसी के नाम पर ऐसे नियम लाए गए हैं, जिन पर सभी पक्षों के साथ व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी जाति, समाज या वर्ग के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों में किसी विद्यार्थी के साथ जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को पूरा सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए।
करणी सेना अध्यक्ष ने समाज की आशंकाओं का किया जिक्र
करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने कहा कि यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर समाज में कई तरह की आशंकाएं फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं को ध्यान से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून या नियम का मुख्य उद्देश्य समाज में न्याय और समानता कायम करना होना चाहिए। यदि किसी प्रावधान को लेकर कोई भी आशंका है तो सरकार को संवाद के माध्यम से उसका समाधान निकालना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से यूजीसी के नियमों को वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही नई व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।