पंचकूला में राष्ट्रीय लोक अदालत: 25421 मामलों का हुआ निपटारा

पंचकूला और कालका में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 25421 मामलों का हुआ आपसी सहमति से निपटारा
पंचकूला /12 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (HALSA) की देखरेख और दिशा-निर्देशों के तहत आज पंचकूला ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स और कालका सब-डिविज़नल कोर्ट कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य वर्षों से लंबित पड़े और मुकदमेबाज़ी से पहले के मुकदमों को आपसी बातचीत से हल करना था। आयोजन के दौरान दोनों कोर्ट परिसरों में वादियों, वकीलों और आम जनता की भारी मौजूदगी देखने को मिली।
लोक अदालत की पूरी व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए प्रशासन द्वारा कुल आठ अलग-अलग बेंचों का गठन किया गया था। इन सभी बेंचों पर अलग-अलग श्रेणियों के मुकदमों की सुनवाई की गई, ताकि लोगों को ज्यादा इंतज़ार न करना पड़े। अधिकारियों ने सभी व्यवस्थाओं को पहले से ही दुरुस्त कर रखा था, जिससे अदालती कामकाज में किसी तरह की परेशानी नहीं आई।
हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन और माननीय जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी खुद पंचकूला ज़िला कोर्ट पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत की पूरी कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं का मौके पर जाकर व्यक्तिगत रूप से जायज़ा लिया। उनके साथ HALSA के सदस्य सचिव श्री जगदीप लोहान भी इस निरीक्षण दौरे पर विशेष रूप से मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी, सदस्य सचिव जगदीप लोहान और DLSA पंचकूला के चेयरमैन-सह-ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश श्री संजय संधीर ने विभिन्न लोक अदालत बेंचों का दौरा किया। उन्होंने वहां तैनात पीठासीन अधिकारियों और अपने मामलों के सिलसिले में पहुंचे पक्षकारों से सीधे बातचीत की। उन्होंने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के इस प्रयास की दिल से सराहना की।


मामले की जानकारी देते हुए पंचकूला की ACJM सुश्री कीर्ति वशिष्ठा ने बताया कि लोक अदालत में सभी प्रकार के समझौता-योग्य मुकदमों को शामिल किया गया था। इसमें कोर्ट में लंबे समय से लंबित मामलों के साथ-साथ ऐसे मुकदमे-पूर्व (Pre-Litigation) मामले भी शामिल रहे जो बातचीत के ज़रिये सुलझाए जा सकते थे। कोर्ट अधिकारियों ने दोनों पक्षों को कोर्ट-कचहरी के चक्करों से बचाकर शांतिपूर्ण ढंग से समझौता करने के लिए प्रोत्साहित किया।
ACJM सुश्री कीर्ति वशिष्ठा ने आगे कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों को सुलझाने से आम लोगों के कीमती समय और पैसों दोनों की बड़ी बचत होती है। जो मामले सालों तक अदालतों में खिंचते रहते हैं, वे एक ही दिन में आपसी रज़ामंदी से हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच की कड़वाहट खत्म होती है और आपसी संबंध फिर से बेहतर हो जाते हैं।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में आम वादियों, वरिष्ठ वकीलों और अन्य सामाजिक हितधारकों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। अदालत परिसर में दिनभर चहल-पहल का माहौल बना रहा और लोग अपने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान पाकर काफी राहत महसूस कर रहे थे। यह पूरी कार्यवाही कानूनी सेवा प्राधिकरण के उस मूल उद्देश्य को दर्शाती है, जिसमें हर वर्ग तक सस्ता और सुलभ न्याय पहुंचाना शामिल है।
दिनभर चले इस अभियान के संयुक्त आंकड़े भी जारी कर दिए गए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पंचकूला और कालका दोनों स्थानों को मिलाकर कुल 31,185 मामलों को सुनवाई के लिए लोक अदालत के सामने रखा गया था। इनमें से रिकॉर्ड 25,421 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया गया। इन सभी मामलों के निपटारे में कुल 9,334,669 (तकरीबन 93.34 लाख) रुपये की सेटलमेंट राशि तय की गई।
अगर मामलों के वर्गीकरण की बात करें तो मुकदमे-पूर्व मामलों (Pre-Litigation Cases) में कुल 22,918 मामले उठाए गए, जिनमें से सभी 22,918 मामलों का शत-प्रतिशत निपटारा कर दिया गया। इन मुकदमों के निपटारे के दौरान 68,28,836 रुपये की सेटलमेंट राशि पर दोनों पक्षों की सहमति बनी। इनमें राजस्व (Revenue), बैंक रिकवरी और स्थायी लोक अदालत से जुड़े सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के कई महत्वपूर्ण मामले शामिल थे।
दूसरी ओर, अदालतों में पहले से लंबित (Pending Cases) मामलों में से कुल 8,267 केस सुनवाई के लिए लिए गए थे। इनमें से 2,503 मामलों का मौके पर ही निपटारा कराया गया। लंबित मामलों में कुल 25,05,833 रुपये की सैटलमेंट राशि तय की गई। इनमें मुख्य रूप से ट्रैफिक चालान के 1,906 मामले सुलझाए गए, जिनसे 1,07,946 रुपये का निपटारा हुआ। इसके अलावा चेक बाउंस (NI Act) के 279 मामलों में 14,04,293 रुपये का सैटलमेंट किया गया।
लोक अदालत में अन्य विविध मामलों की भी बड़े पैमाने पर सुनवाई हुई। मध्यस्थता और अन्य उपयुक्त श्रेणियों के तहत 21,173 मामलों में से 21,163 मामलों को आपसी सहमति से निपटाया गया। इसके अलावा पारिवारिक विवाद, कंपाउंडेबल आपराधिक मामले, श्रम विवाद और सिविल मामलों में भी पक्षकारों ने आपसी मतभेद भुलाकर मामलों को हमेशा के लिए बंद करने का रास्ता चुना।
अदालती अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत का यह प्रयास समाज के सभी तबकों को बिना किसी भारी कानूनी खर्च और समय की बर्बादी के त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है। अधिकारियों और जजों ने सफल आयोजन के लिए प्रशासनिक टीमों और वकीलों का धन्यवाद किया। साथ ही भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक राहत पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।