सहारनपुर में स्वतंत्रता सेनानी और प्रख्यात वैदिक चिंतक पंडित विश्वंभर सिंह की 119वीं जन्म जयंती पर किया गया याद

सहारनपुर में तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन के हाथों पहला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाले शिक्षक, प्रख्यात वैदिक चिंतक और स्वाधीनता सेनानी पंडित विश्वंभर सिंह की 13 अगस्त 1907 को जन्मे उनकी 119वीं जन्म जयंती पर उन्हें याद किया गया। पंडित विश्वंभर सिंह बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे और उनका मानना था कि शिक्षक से बड़ी गरिमा का पद कोई और हो ही नहीं सकता, शिक्षक ही सही मायने में राष्ट्र निर्माता है।
देश के दो राष्ट्रपति आए सहारनपुर
आज बहुत कम लोग जानते होंगे कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद उनके बड़े बेटे ओंकार सिंह द्वारा शुरू किए गए मूक बधिर विद्यालय की नींव रखने के लिए ही पहली बार सहारनपुर आए थे। जैन डिग्री कॉलेज रोड स्थित इस मूक बधिर विद्यालय भवन में मानव मंदिर नाम की संस्था संचालित है। देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पंडित विश्वंभर सिंह की स्मृति में नगर निगम द्वारा निर्मित नगर के सबसे बड़े द्वार व मार्ग का लोकार्पण करने के लिए सहारनपुर आए थे।
शिक्षा और पाठ्यक्रम में योगदान
भारत स्वतंत्र होने के बाद उत्तर प्रदेश में पंडित गोविंद बल्लभ पंत प्रथम मुख्यमंत्री तथा संपूर्णानंद शिक्षा मंत्री बने तो वर्ष 1951 में उत्तर प्रदेश का स्कूली पाठ्यक्रम तय किया जाना था और पंडित जी पाठ्यक्रम समिति के सदस्य थे। शिक्षा मंत्री संपूर्णानंद ने उनके विचारों को विशेष महत्व देते हुए उनकी पहल पर उत्तर प्रदेश में कक्षा 6 से 12 तक हिंदी पुस्तकों के अंत में अनिवार्य संस्कृत के रूप में कुछ पाठन सामग्री रखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
अध्यापक भवन और स्काउट भवन का निर्माण
पंडित विश्वंभर सिंह 40 साल तक भारत स्काउट गाइड संस्था के मंत्री रहे और उनकी मितव्ययिता की सबसे बड़ी मिसाल शहर के बीचों बीच उनके प्रयासों से बनी अध्यापक भवन और स्काउट भवन जैसी इमारतें हैं। उन्होंने प्राइमरी व जूनियर हाई स्कूलों के लिए बंधु परीक्षा बोर्ड गठित करके जिले भर के प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूलों की सामूहिक परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू की और परीक्षा बोर्ड की आमदनी से अध्यापक भवन का निर्माण कर दिखाया।
विविध संस्थाओं से जुड़े रहे
पंडित जी लंबे अरसे तक प्राथमिक शिक्षक संघ, बंधु परीक्षा बोर्ड, प्राइमरी से विश्वविद्यालय स्तर तक के शिक्षक महासंघ, रेड क्रॉस सोसाइटी, ब्राह्मण समाज और भारत स्काउट एंड गाइड आदि संस्थाओं में मंत्री रहे। योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण कहते हैं कि पंडित जी शिक्षा, धर्म और देश प्रेम की त्रिवेणी थे जो सभी धर्म पंथों का आदर करते थे।