पानीपत में चिंताजनक रूप से बढ़ा एचआईवी संक्रमण, पांच माह में 15वें स्थान पर पहुंचा जिला: कारण और बचाव

पानीपत में एचआईवी के मामले बढ़े, हरियाणा में 15वें स्थान पर जिला
केंद्र सरकार ने देश भर में 219 जिलों को प्राथमिकता दी है जहां एचआईवी नियंत्रण के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें हरियाणा के 11 जिले शामिल हैं। पानीपत, कैथल, रोहतक, सिरसा, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी, हिसार, सोनीपत और फतेहाबाद इन जिलों में हैं।
चंडीगढ़/पानीपत/ 12 अगस्त 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
पानीपत जिले में एचआईवी के मामलों का आंकड़ा पिछले कुछ महीनों में बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पांच महीने पहले यह जिला प्रदेश में 22वें स्थान पर था। अब यह 15वें स्थान पर आ गया है।
दो साल पहले पूरे साल में करीब 320 नए मामले दर्ज हुए थे। इस साल सात महीनों में ही लगभग 200 नए मामले सामने आ चुके हैं। जिले के नागरिक अस्पताल में इस समय 3431 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें पुरुष, महिलाएं, ट्रांसजेंडर और युवा शामिल हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लोगों में जागरूकता की कमी एक बड़ी वजह है। कई लोग शुरुआती लक्षणों पर भी जांच कराने से कतराते हैं। डर या संकोच के कारण वे समय पर इलाज शुरू नहीं कर पाते। इससे संक्रमण आगे बढ़ने का खतरा बना रहता है।
एचआईवी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. लाभ सिंह बताते हैं कि असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुई या सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल मुख्य कारण हैं। युवाओं में सिरिंज वाले नशे की लत भी बढ़ रही है। एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल संक्रमण का जोखिम बढ़ा देता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों, कॉलेजों और ग्राम सभाओं में नुक्कड़ नाटकों के जरिए जानकारी दे रही हैं। फील्ड में डोर-टू-डोर जाकर भी जांच करवाई जा रही है। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है।
हरियाणा में एचआईवी की स्थिति को समझने के लिए राज्य स्तर के आंकड़े भी जरूरी हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से जनवरी तक करीब 12.4 लाख लोगों की जांच हुई। इनमें से 5,877 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। राज्य में अनुमानित 59,642 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं। वयस्क प्रसार दर करीब 0.24 प्रतिशत है।
केंद्र सरकार ने देश भर में 219 जिलों को प्राथमिकता दी है जहां एचआईवी नियंत्रण के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें हरियाणा के 11 जिले शामिल हैं। पानीपत, कैथल, रोहतक, सिरसा, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी, हिसार, सोनीपत और फतेहाबाद इन जिलों में हैं।
पानीपत में पहले भी मामले सामने आए थे। 2025 में अप्रैल से सितंबर के बीच 140 नए मामले दर्ज हुए थे। इनमें पुरुष, महिलाएं और कुछ गर्भवती महिलाएं शामिल थीं। कुछ बच्चों और किशोरों में भी संक्रमण पाया गया था। ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए असुरक्षित संबंध बनाने के बाद संक्रमण के कुछ मामले भी सामने आए थे।
राज्य में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी यानी एआरटी केंद्रों का विस्तार किया गया है। करीब 24 एआरटी केंद्र काम कर रहे हैं। इनमें मेडिकल कॉलेजों में नए केंद्र भी शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में 40 हजार से ज्यादा मरीज इलाज ले रहे हैं। सरकार योग्य मरीजों को प्रतिमाह 2,250 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है।
जांच के लिए एकीकृत परामर्श और परीक्षण केंद्र यानी आईसीटीसी काम कर रहे हैं। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच भी की जा रही है। इससे मां से बच्चे में संक्रमण फैलने का खतरा कम करने की कोशिश होती है। कई गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज से जोड़ा गया है।
डॉक्टर बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति शुरुआती लक्षणों पर जांच करा ले तो इलाज बेहतर तरीके से शुरू हो सकता है। एचआईवी अब पहले जितना घातक नहीं माना जाता। नियमित दवा लेने से वायरल लोड नियंत्रित रहता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन इलाज जारी रखना जरूरी है।
लोगों में संकोच और डर अभी भी बड़ी बाधा है। कई बार परिवार या समाज के डर से लोग जांच नहीं कराते। इससे संक्रमण छिपा रहता है और दूसरों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग लगातार यह संदेश दे रहा है कि जांच गोपनीय होती है और इलाज मुफ्त उपलब्ध है।
नशे की लत वाले युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओपिओइड सब्सीट्यूशन थेरेपी केंद्र भी काम कर रहे हैं। इनमें नशे की आदत कम करने में मदद मिलती है। साझा सुई के इस्तेमाल को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
असुरक्षित यौन संबंधों के बारे में भी लगातार बात की जा रही है। कंडोम के सही इस्तेमाल और नियमित जांच की सलाह दी जाती है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर युवाओं को सही जानकारी दी जा रही है ताकि वे जोखिम भरे व्यवहार से बच सकें।
कैथल जिले में भी एचआईवी के मामले पहले से चर्चा में रहे हैं। दोनों जिले अब प्राथमिकता सूची में हैं इसलिए वहां निगरानी और जांच बढ़ाई जा सकती है। पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंच रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में इलाज लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह बढ़ोतरी जांच बढ़ने के कारण भी हो सकती है। जितने ज्यादा लोग जांच कराएंगे उतने ही मामले सामने आएंगे। लेकिन इससे समय पर इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भारत का लक्ष्य 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना है। हरियाणा में भी इसी दिशा में काम हो रहा है। जांच, इलाज और जागरूकता तीनों पर जोर दिया जा रहा है।
डॉक्टरों का साफ कहना है कि एचआईवी संक्रमण से बचाव संभव है। सावधानी बरतने से जोखिम बहुत कम हो जाता है। संक्रमित व्यक्ति भी नियमित इलाज लेकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। दवाइयां मुफ्त उपलब्ध हैं और परामर्श भी दिया जाता है। पानीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्र में प्रवासी मजदूर और युवा आबादी ज्यादा है।
यहां जागरूकता अभियान और ज्यादा जरूरी हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग स्कूल, कॉलेज, ग्राम सभा और नुक्कड़ नाटक के अलावा अन्य माध्यमों से भी जानकारी पहुंचा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि किसी भी संदेह की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच कराएं। जांच कराने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए जितना जल्दी पता चले उतना बेहतर।
शुरुआती इलाज से न सिर्फ खुद को बल्कि परिवार और समाज को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। प्राथमिकता वाले जिलों में संसाधन और निगरानी बढ़ाई जाएगी।
पानीपत में मौजूदा आंकड़े चिंता का विषय जरूर हैं लेकिन जागरूकता और समय पर इलाज से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार फील्ड में हैं। डोर-टू-डोर जांच, नुक्कड़ नाटक और परामर्श सत्र जारी हैं।
युवाओं में नशे और असुरक्षित संबंधों के बारे में खास बात की जा रही है। एचआईवी के बारे में सही जानकारी फैलाना सबसे जरूरी है। गलत धारणाएं और डर कई बार लोगों को जांच से दूर रखते हैं। सही जानकारी से यह डर कम हो सकता है। इलाज उपलब्ध है और जीवन सामान्य बनाया जा सकता है।
पानीपत के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में रैंकिंग में बदलाव आया है। यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। पीछे जागरूकता की कमी, जोखिम भरा व्यवहार और समय पर जांच न कराना जैसे कारण हैं। इन पर ध्यान देने से आगे मामलों को कम किया जा सकता है।
हरियाणा में कुल मिलाकर जांच का दायरा बढ़ा है। लाखों लोगों की जांच हुई है। इससे छिपे मामलों का पता चल रहा है। इलाज से जुड़े मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। आर्थिक सहायता योजना से मरीजों को सहारा मिल रहा है।
भविष्य में और ज्यादा जागरूकता अभियान चलाने की योजना है। स्कूल-कॉलेज स्तर पर रेड रिबन क्लब जैसे कार्यक्रम भी मदद कर सकते हैं। युवाओं तक सही संदेश पहुंचाना महत्वपूर्ण है। अंत में यह कहना सही होगा कि एचआईवी कोई अकेला व्यक्ति का मुद्दा नहीं है। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जांच कराएं, सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू करें।
पानीपत और अन्य जिलों में स्वास्थ्य विभाग का काम जारी है। लोगों के सहयोग से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। (यह रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों, राज्य स्तर की जानकारी और अन्य स्रोतों पर आधारित है। आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।)