कैथल में मनाया गया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, डीसी अपराजिता ने युवाओं को पूर्वजों के संघर्ष से रूबरू होने की दी प्रेरणा

विभाजन का दर्द और पूर्वजों के संघर्ष से युवाओं को रूबरू होना जरूरी : डीसी अपराजिता
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर किया गया जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन
विस्थापन के दर्द और संघर्षों को किया याद
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को समर्पित विशेष प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
-हर घर तिरंगा उत्सव को लेकर बनाई गई भव्य रंगोली
कैथल /14 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें डीसी अपराजिता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान गुरुग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया और केंद्रीय शहरी आवास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल का संबोधन भी सुना गया।
डीसी अपराजिता ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी झेल चुके बुजुर्गों के अनुभवों को सुनें और इतिहास से सीखें। उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ी ने विभाजन का संघर्ष नहीं देखा, जबकि उस दौर के लोगों का संघर्ष केवल जीवन में आगे बढ़ने का नहीं, बल्कि जीवित रहने और अपने परिवारों को बचाने का संघर्ष था। उनके बलिदान और संघर्ष से युवाओं को रूबरू होना बहुत जरूरी है।
डीसी ने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों के घर उजड़ गए, परिवार बिछड़ गए और अनेक लोगों ने अपने परिजनों को खो दिया। इस त्रासदी से आज की पीढ़ी को सबसे बड़ी सीख धैर्य, आत्मबल और विषम परिस्थितियों से उबरने की क्षमता की मिलती है। जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति आए, हमें हार नहीं माननी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से विभाजन से जुड़े साहित्य, पुस्तकों को पढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की अखंडता सर्वोपरि है। इसलिए देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
डीएमसी कपिल शर्मा ने कहा कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। विभाजन के कारण लाखों लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा और अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई। इन्हीं पीड़ितों के संघर्ष और बलिदान की स्मृति में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष रूप से युवा पीढ़ी को विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी, विस्थापित परिवारों के संघर्ष और उनके बलिदान से अवगत कराना है। इस अवसर पर जिला उच्च शिक्षा अधिकारी डा. मनोज कुमार बांबू, डीआईपीआरओ नसीब सिंह सैनी, प्रो अभिषेक गोयल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
विस्थापित हुए परिवारों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को किया याद
कार्यक्रम में वर्ष 1947 के भारत विभाजन के दौरान विस्थापित हुए परिवारों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को याद किया गया। विभाजन के विषय पर विशेष वक्ता के रूप में सेवानिवृत्त एआईपीआरओ महेंद्र खन्ना तथा समाजसेवी अशोक कुमार गिरधर ने अपने बुजुर्गों द्वारा विभाजन के दौरान झेली गई कठिनाइयों और विस्थापन की आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि विभाजन के समय लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अनजान स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा। उनकी बातें सुनकर श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो गए। वक्ताओं ने बताया कि किस तरह से विभाजन के बाद पड़ोसी देश से उनके परिजन कठिन परिस्थितियों में अपनी जान बचाकर यहां तक पहुंचे थे। यहां आकर जीवन को नए सिरे से शुरू किया और मेहनत के बल पर आगे बढ़े। दोनों वक्ताओं ने सभी का आह्वान किया कि जीवन में मेहनत से आगे बढ़ना चाहिए।
विशेष प्रदर्शनी में दर्शाई विभाजन की त्रासदी
कार्यक्रम स्थल पर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को समर्पित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। जिसका उद्घाटन डीसी अपराजिता द्वारा किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से वर्ष 1947 के विभाजन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, मानवीय त्रासदी और संघर्षों को चित्रों एवं अन्य सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। साथ ही इस अवसर पर हर घर तिरंगा उत्सव के तहत विशाल रंगोली भी बनाई गई। जिसमें दर्शकों से स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में घरों में तिरंगा फहराने का आह्वान किया गया।