कैथल में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर याद की गई 1947 की त्रासदी, विशेष प्रदर्शनी में दिखा संघर्ष

कैथल में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर याद की गई 1947 की त्रासदी, विशेष प्रदर्शनी में दिखा संघर्ष

कैथल में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एक विशेष जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वर्ष 1947 के बंटवारे के दौरान विस्थापित हुए परिवारों की पीड़ा, उनके संघर्ष और उनके बलिदान को पूरी गंभीरता से याद किया गया। जिला प्रशासन और डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में डीसी अपराजिता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इसके अलावा जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में वहां मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान गुरुग्राम में आयोजित हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण बड़ी स्क्रीन पर दिखाया गया। इस दौरान लोगों ने केंद्रीय शहरी आवास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल का संबोधन भी ध्यानपूर्वक सुना।

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युवाओं को बुजुर्गों की आपबीती सुनने की दी गई सलाह

डीसी अपराजिता ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं से विशेष रूप से कहा कि वे विभाजन की त्रासदी को झेल चुके बुजुर्गों की आपबीती जरूर सुनें। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे उन बुजुर्गों की कहानियों से जरूरी सीख लें। उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने उस दौर की बेहद कठिन परिस्थितियों को अपनी आंखों से नहीं देखा है। विभाजन के समय लोगों के सामने केवल अपने जीवन को बेहतर बनाने की ही चुनौती नहीं थी। उस समय परिवार और अपनी जान बचाने के लिए एक बहुत बड़ा संघर्ष करना पड़ा था।

डीसी अपराजिता ने आगे कहा कि बंटवारे के उस काले दौर में हजारों परिवारों के घर पूरी तरह उजड़ गए थे। उस समय कई परिवार एक-दूसरे से हमेशा के लिए अलग हो गए और अनेक लोगों ने अपने ही अपनों को हमेशा के लिए खो दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उस बेहद कठिन दौर से हमें धैर्य, आत्मबल और विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विभाजन से जुड़े साहित्य और पुस्तकों को जरूर पढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत बनाए रखना हर एक नागरिक की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

विस्थापन का दर्द और वक्ताओं के अनुभव

जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि विभाजन के कारण देश के लाखों लोगों को विस्थापन का भारी दर्द झेलना पड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि इस ऐतिहासिक त्रासदी के कारण बहुत बड़ी संख्या में लोगों की जानें भी गई थीं। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को उस ऐतिहासिक त्रासदी से परिचित कराना है। इस दिवस के माध्यम से नई पीढ़ी को विस्थापित परिवारों के संघर्ष की पूरी जानकारी मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त एआईपीआरओ महेंद्र खन्ना और समाजसेवी अशोक कुमार गिरधर ने लोगों के सामने अपने विचार रखे। वे दोनों बुजुर्गों द्वारा विभाजन के दौरान झेली गई परिस्थितियों और विस्थापन की पूरी कहानी बताते-बताते काफी भावुक हो गए। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस तरह देश के लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अनजान जगहों की तरफ पलायन करना पड़ा था। वक्ताओं ने अपने परिवारों के उन पुराने अनुभवों को सभी के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनके परिजनों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी जान बचाकर भारत की सीमा में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने यहां आकर अपनी जिंदगी को एक बार फिर से नए सिरे से खड़ा किया था। दोनों वक्ताओं ने अंत में कहा कि जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न आ जाएं, लेकिन मेहनत और हौसले के बल पर हमेशा आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने सभी युवाओं से यह भी आह्वान किया कि वे हमेशा कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ें।

विशेष प्रदर्शनी और तिरंगा उत्सव

कार्यक्रम स्थल पर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था। डीसी अपराजिता ने फीता काटकर इस विशेष प्रदर्शनी का आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में वर्ष 1947 के विभाजन से जुड़ी सभी ऐतिहासिक घटनाओं को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया। इसके अलावा विस्थापन और मानवीय त्रासदी से जुड़ी अन्य सामग्री को भी चित्रों और दस्तावेजों के जरिए प्रदर्शित किया गया।

इसी अवसर पर हर घर तिरंगा उत्सव के तहत कार्यक्रम स्थल पर एक बहुत बड़ी और विशाल रंगोली भी बनाई गई थी। इस सुंदर रंगोली के माध्यम से वहां मौजूद सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस पर अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया गया। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान जिला उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार बांबू, डीआईपीआरओ नसीब सिंह सैनी और प्रोफेसर अभिषेक गोयल सहित कई अन्य गणमान्य अधिकारी भी वहां मौजूद रहे।

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