पटौदी कोर्ट का बड़ा आदेश: पूर्व तहसीलदार सहित 13 लोगों पर केस दर्ज करने के निर्देश

www.atalhind.com16 June 20263 min read3 viewsगुरुग्राम
पटौदी कोर्ट का बड़ा आदेश: पूर्व तहसीलदार सहित 13 लोगों पर केस दर्ज करने के निर्देश
पटौदी की पूर्व महिला तहसीलदार, रीडर सहित 13 पर एफआईआर के आदेश
आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी तथा सरकारी रिकॉर्ड में हेरा फेरी के गंभीर आरोप
जेएमआईसी पटौदी दीपक जागलान की अदालत के द्वारा जारी किया गया आदेश
पटौदी थाना एसएचओ को आदेश आरोपियों के खिलाफ 24 घंटे में मामला दर्ज हो
शिकायतकर्ता रोहित शर्मा की तरफ से एडवोकेट विशाल सिंह चौहान ने की पैरवी
पटौदी /16 जून /फतह सिंह उजाला 
 राजस्व विभाग पर कथित रूप से भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगाते रहे हैं । यह कोई चोरी छुपे आरोप नहीं लगाए जाते। तहसील में विशेष रूप से जमीनों की खरीद फरोख्त रजिस्ट्री या अन्य कार्यों की आवाज में सेवा पानी के आरोप संबंधित तहसील परिसर में ही सुनने के लिए मिलते रहते हैं। ऐसे मामलों में कई बार शिकायतें भी की जाती रही हैं ,लेकिन शिकायतों के दूरगामी ठोस परिणाम अथवा एक्शन बहुत कम देखने के लिए मिलते हैं।
पटौदी क्षेत्र के ही गांव घीलनावास से जुड़े हुए एक जमीन के मामले में पटौदी में ही कार्यरत रही महिला तहसीलदार रीता ग्रोवर , रीडर संगीता सांगवान के साथ ही कुल 13 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के पटौदी की कोर्ट के द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। इस मामले में प्रतिवादी घीलनावास निवासी रोहित शर्मा की तरफ से पटौदी बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेजिडेंट एडवोकेट विशाल सिंह चौहान के द्वारा जेएमआईसी पटौदी दीपक जागरण की अदालत में पैरवी की गई। संबंधित प्रकरण में जेएमआईसी दीपक जागलान की अदालत के द्वारा सोमवार शाम के समय पूर्व तहसीलदार रीता ग्रोवर, रीडर संगीता सांगवान में अन्य के विरुद्ध 24 घंटे के अंदर पटौदी थाना एसएचओ को आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश जारी किए ।
इसी प्रकरण में सूत्रों के मुताबिक जमीन के संबंधित इसी मामले में पटौदी के एसडीएम के द्वारा की गई जांच में भी गड़बड़ी होने की रिपोर्ट दी थी। लेकिन कथित रूप से उस जांच और रिपोर्ट को भी अनदेखा करते हुए  पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया। गांव घीलनावास शिकायतकर्ता रोहित शर्मा ने आरोप लगाया था कि उनके पिता को उनके हिस्से से अवैध रूप से बेदखल करने के लिए राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी की गई। अदालत सुनवाई और कार्रवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकार्ड में कथित तौर पर सामने आया कि तकसीम का मामला दो जुलाई 2024 को दर्ज हुआ। किंतु उससे पहले मार्च 2024 से ही जमीन से संबंधित विभिन्न प्रकार की औपचारिकताएं और कई प्रक्रियाएं पूरी दिखा दी गईं।
अदालत ने रिकार्ड में बैकडेटिंग, फर्जी दस्तावेज और प्रक्रिया में अनियमितताओं को गंभीरता से लिया। आरोप है कि अंतिम बंटवारा आदेश 17 जुलाई 2024 को पारित हुआ, जबकि संबंधित बयानों पर आठ सितंबर 2024 की तारीख दर्ज थी। इसके अलावा वर्ष 2017 में मृत हो चुकी एक सह-खातेदार महिला को 2024 की कार्रवाई में जीवित पक्षकार दिखाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया कि शुरुआती नक्शों में शिकायतकर्ता के पिता का नाम था, लेकिन बाद के रिकार्ड से उनका नाम हटा दिया गया। सीएम विंडो पर दी गई शिकायत की जांच भी कथित रूप से आरोपित अधिकारी के पास पहुंच गई, जिस पर अदालत ने सवाल उठाए।
अदालत ने कहा कि यह केवल निजी संपत्ति विवाद नहीं है, बल्कि राजस्व रिकार्ड की विश्वसनीयता और आमजनता के विश्वास से जुड़ा मामला है। इस मामले में अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी प्रक्रिया में इस तरह की हेराफेरी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव को कमजोर करती है। अदालत ने पुलिस को निष्पक्ष और गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि दस्तावेजों में कथित जालसाजी और आपराधिक साजिश की पूरी सच्चाई को सामने लाया जा सके।
 
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