पटौदी जाटोली मंडी परिषद के गठन और चुनावों के बाद लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन समय के साथ पुरानी समस्याएं नए रूप में सामने आ रही हैं। शुद्ध पेयजल मानव जीवन की मूलभूत जरूरत है और स्वास्थ्य के लिए सबसे पहली शर्त माना गया है। बीती रात मटमैला और बदबूदार पानी आपूर्ति होने से लोगों में भारी रोष फैल गया है।
आम लोगों के पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से सरकार या सरकारी विभाग के अधीन नहीं है। पटौदी, हेलीमंडी, जाटोली, टोडापुर और साथ लगते कुछ गांवों में नहरी पानी की पेयजल आपूर्ति ठेका व्यवस्था पर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व एजेंसी का ठेका समाप्त होने के बाद यह व्यवस्था नए ठेकेदार पर निर्भर है। पानी के स्टोरेज के लिए पटौदी में दो और हेलीमंडी व जाटोली में दो अंडरग्राउंड टैंक बने हुए हैं, जिनकी आपूर्ति बादली सेंटर से नहरी पानी के जरिए होती है।
इन भूमिगत वॉटर टैंकों की सफाई कितने दिनों में होती है, यह एक रहस्य बना हुआ है।
मानसून के दौरान खुले नहरी पानी की गुणवत्ता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं।
शुद्ध और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति न होने के कारण डायरिया, उल्टी,दस्त, हैजा और चर्म रोग जैसी सीजनल बीमारियां तेजी से फैलने का डर बना रहता है।
बरसात होते ही पुराना हेलीमंडी अनाज मंडी, मुंशीलाल आनंद स्कूल के आसपास, अग्रसेन भवन के सामने, शहीद जसवंत सिंह मार्ग, श्री राम चौक और भगवान महावीर राजकीय सामान्य अस्पताल के पास जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। 15-20 मिनट की मूसलाधार बारिश के बाद सीवरेज सिस्टम पूरी तरह नकारा हो जाता है। इसके अलावा, जगह-जगह फैला कूड़ा-कचरा बरसाती पानी के दूषित होने का मुख्य कारण बनता है और कई स्थानों पर पीने के पानी की लीकेज की समस्या भी गंभीर बनी हुई है।