पटौदी जाटोली मंडी परिषद एफ एंड सीसी विवाद: राकेश कुमार और मुनफेद अली बने नए मेंबर

पटौदी जाटोली मंडी परिषद एफ एंड सीसी विवाद: राकेश कुमार और मुनफेद अली बने नए मेंबर

एफ एंड सीसी विवाद

राकेश कुमार और मुनफेद अली बने मेंबर, एक साल के बाद फिर चुनाव

डीएमसी प्रदीप दहिया के द्वारा चयनित सदस्यों के नाम की गई घोषणा

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एफ एंड सीसी की पावर 50 लाख रुपए तक के विकास कार्यों तक मंजूरी

पटौदी जाटोली मंडी परिषद एफ एंड सीसी, 2सदस्यों का सर्वसम्मति से चुनाव

पहले की एफ एंड सीसी विवाद पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप अब अग्नि परीक्षा

पटौदी/फतह सिंह उजाला/गुरुग्राम/28 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

पटौदी जाटोली मंडी परिषद के चुनाव के बाद से ही विकास कार्यों और अन्य भुगतानों को लेकर एफ एंड सीसी (F&C) को निशाना बनाकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जाने का सिलसिला लगातार जारी रहा है। भाजपा के उम्मीदवारों के विरुद्ध कथित बगावत कर चुनाव लड़ने वाले और जीतने वाले उम्मीदवारों को भाजपा की मेंबरशिप देते हुए पार्टी में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद ऐसे सदस्यों द्वारा भाजपा के अधिकृत विजेता उम्मीदवारों पर परिषद हाउस की बैठक में और बाहर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। हाउस की बैठक में एफ एंड सीसी के सदस्यों को निशाना बनाते हुए उन्हें बदलने की मांग भी की गई थी।

एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद डीएमसी प्रदीप दहिया पटौदी जाटोली मंडी परिषद जोन दो हेली मंडी कार्यालय बतौर चुनाव अधिकारी पहुंचे और एफ एंड सीसी (सेकंड) के लिए दो सदस्यों का चुनाव संपन्न कराया। चुनाव अधिकारी डीएमसी प्रदीप दहिया ने बताया कि वार्ड नंबर 13 से मुनफेद अली और वार्ड नंबर 5 से राकेश कुमार को सर्वसम्मति से चुन लिया गया है। म्युनिसिपल एक्ट के तहत इन सभी सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष का होगा और इसके बाद फिर से दो नए सदस्यों का चुनाव करवाया जाएगा।

चुनाव अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि एफ एंड सीसी के पास एक बार में 50 लाख रुपए तक के विकास कार्यों की मंजूरी देने का अधिकार और पावर होती है। इससे अधिक राशि के विकास कार्यों के लिए उच्च अधिकारियों या संबंधित सरकारी विभाग से मंजूरी लेना पूरी तरह अनिवार्य होता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह यहां केवल चुनाव अधिकारी के रूप में पहुंचे थे और म्युनिसिपल एक्ट के तहत एफ एंड सीसी के सदस्यों का चुनाव करवा दिया गया है। एफ एंड सीसी में कुल चार सदस्य शामिल होते हैं जिनमें चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और चुने गए दो अन्य सदस्य शामिल हैं।

इससे पहले पार्षद श्रीमती उषा और पार्षद कुलदीप चौहान एफ एंड सीसी के सदस्य थे। निवर्तमान एफ एंड सीसी पर परिषद के वाइस चेयरमैन अमित शर्मा के द्वारा कई बार भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि इन कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए किसी भी संबंधित एजेंसी, सरकारी विभाग या अधिकारी के पास लिखित शिकायत देने से हमेशा परहेज किया गया। पटौदी जाटोली मंडी परिषद की सामान्य बैठक नियम के मुताबिक 3 महीने में एक बार होना तय है। परिषद के कुल 22 वार्ड हैं और 50 लाख रुपए की पावर को देखा जाए तो औसतन चार लाख रुपए ही एक पार्षद या एक वार्ड के विकास के लिए मिल सकेंगे।

वाइस चेयरमैन अमित शर्मा यह सरेआम आरोप लगाते रहे हैं कि वार्डों में पूरी तरह मनमर्जी से विकास कार्य करवाए गए हैं और पैसा आवंटित किया गया है। कुछ वार्डों में तो बिल्कुल भी काम न होने के आरोप भी लगाए गए हैं। अब देखना यह बहुत रोचक होगा कि आने वाले समय में किस अनुपात में, किस वार्ड में और किस पार्षद को एफ एंड सीसी के द्वारा विकास राशि आवंटित की जाएगी। सही मायने में यह स्थिति ईमानदारी और निष्पक्षता की बड़ी अग्नि परीक्षा साबित होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान मौके पर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संदीप मलिक, सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि और उनके समर्थक मौजूद रहे। पटौदी जाटोली मंडी परिषद के दूसरे एफ एंड सीसी सदस्यों के चुनाव के समय चुनाव अधिकारी के सख्त निर्देश के अनुसार हाउस में मीडिया को बिल्कुल भी एंट्री नहीं दी गई थी। चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने वाले सभी चुने हुए पार्षदों को अपने मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी और सभी के मोबाइल बाहर ही रखवा दिए गए थे। यह पूरी कार्रवाई इसलिए की गई ताकि चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। मीडिया कर्मियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से पहले हाउस में मौजूद अधिकारियों और सदस्यों की खबरों के संदर्भ में विजुअल और फोटो खींचने की अनुमति दी जाती है और उसके बाद नियमानुसार कक्ष को पूरी तरह बंद कर चुनाव संपन्न कराया जाता है।

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