पटौदी जाटोली मंडी में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी, गंदगी के ढेरों से बढ़ी परेशानी और सरकार विरोधी नारे

पटौदी जाटोली मंडी में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी, गंदगी के ढेरों से बढ़ी परेशानी और सरकार विरोधी नारे

निकाय सफाई कर्मचारियों ने खूब लगाए सरकार विरोधी नारे

पटौदी जाटोली मंडी परिषद के लगभग 100 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर

गंदगी के ढेर पर बदबू से बचाव के सप्रे की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं

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निकाय सफाई कर्मचारियों के मुताबिक हड़ताल 30 अगस्त तक बढ़ाई गई

फतह सिंह उजाला /पटौदी /हेलीमंडी/27 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

सफाई कर्मचारियों की चली आ रही हड़ताल और दूसरी तरफ गंदगी के ऊंचे होते और फैलते हुए ढेर आम जनमानस के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। देखा जाए तो पटौदी जाटोली मंडी परिषद से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार या बीजेपी के नेता ही सत्ता में जनता की सेवा के लिए आम लोगों के द्वारा चुनकर भेजे गए हैं। मानसून के दौरान रुक-रुक कर होने वाली बरसात और बरसाती पानी में कूड़ा करकट गंदगी भीगने के बाद इसकी बदबू आम जनमानस के लिए स्वास्थ्य पर  खतरा बनती जा रही है। महत्वपूर्ण और खास बात यह है कि शुक्रवार को ही भारतीय सनातन संस्कृति का सदियों पुराना रक्षाबंधन का पावन पर्व भी है। गंदगी के ढेर की बदबू और इसकी वजह से फैलने वाले कीड़े मकोड़े कीट पतंगे मिठाइयों की गुणवत्ता को निश्चित रूप से प्रभावित कर रहे होंगे, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि शासन प्रशासन और पूरा सिस्टम कथित रूप से सीजनल बीमारियों के फूटने का शायद इंतजार कर रहा है।

पटौदी जाटोली मंडी परिषद के लगभग 100 सफाई कर्मचारी 6 अगस्त से नियमित रूप से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। कर्मचारी नेताओं और यूनियन सदस्यों के द्वारा प्रतिदिन सरकार विरोधी तथा अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए सरकार की नींद खोलने का नाकाम प्रयास जारी है। हड़ताली कर्मचारियों का साफ-साफ कहना है कि हरियाणा सरकार के द्वारा 13 मई 2026 को कर्मचारी यूनियन और सरकार के बीच हुए समझौते को कर्मचारी हित में बिना देर किए लागू करना चाहिए। ठेका प्रथा खत्म कर कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। 

इसी कड़ी में गंदगी के ढेर और बदबू से परेशान लोगों का कहना है कि परिषद हो, विधायक हो, शासन प्रशासन हो या सरकारी अधिकारी हो, आम जनमानस को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करवाना जिम्मेदारी है । दूसरे शब्दों में स्वच्छ पेयजल शुद्ध हवा शुद्ध पर्यावरण स्वच्छ वातावरण शुद्ध खानपान की वस्तुएं इत्यादि यह आम इंसान का संविधान में दिया गया मौलिक और कानूनी अधिकार भी है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि अपने-अपने वार्ड में ही गंदगी के ढेर और तेजी से फैल रही बदबू पर नियंत्रण के लिए बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के केमिकल स्प्रे इत्यादि करने से भी मुंह मोड़कर आंखें बंद किया बाजार से दिन में कई बार आवागमन करते दिखाई देते हैं ? लोक लुभावन वादे  करके पटौदी जाटोली मंडी परिषद को देश का नंबर एक परिषद का सपना दिखा लोगों के वोट लूटने के बाद जनप्रतिनिधियों का जन सेवा का भूत गायब होता जा रहा है।

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