12 साल पुराने किसान पवन हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, चार दोषियों को फांसी की सजा और जुर्माना

शामली जिले के भभीसा गांव में करीब 12 वर्ष पहले हुए किसान पवन कुमार हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र एवं जिला न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने इस मामले में चार दोषियों को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने विस्तृत 33 पन्नों के फैसले में संगठित अपराध, गैंगस्टर गिरोहों और कानून के शासन को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर अपने आतंक के बल पर शासन स्थापित करने का भ्रम पाल सकते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन केवल संविधान और कानून का होता है। इस सनसनीखेज हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता और कुख्यात गैंगस्टर विपुल उर्फ खूनी पहले ही पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है, जबकि फरार आरोपित अमित की पत्रावली पर न्यायालय में सुनवाई विचाराधीन है।
मां से हुई नोकझोंक बनी हत्या की वजह
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हत्याकांड के पीछे मुख्य वजह कुख्यात विपुल उर्फ खूनी की मां और मृतक पवन कुमार के बेटे आशु उर्फ ढक्कन के बीच हुई नोकझोंक की रंजिश थी। इसी रंजिश को लेकर विपुल ने अपने साथियों के साथ मिलकर पवन कुमार की हत्या की साजिश रची थी। अभियोजन के अनुसार, वारदात में शामिल आरोपित संगठित गिरोह से जुड़े हुए थे। इन सभी ने कुख्यात विपुल उर्फ खूनी के इशारे पर इस वारदात को अंजाम दिया था।
14 जुलाई 2014 की रात गोलियों से दहल उठा था भभीसा गांव
यह पूरा मामला 14 जुलाई 2014 की रात करीब 10:45 बजे का है। अभियोजन के मुताबिक कुख्यात विपुल उर्फ खूनी अपने कई साथियों के साथ गांव के ही अशोक कुमार के घर में घुस गया था। उसके साथ रामवीर निवासी पीरखेड़ा, थाना झिंझाना, शामली, राजीव उर्फ छोटू, अमित निवासी रामनगर बड़ौत, बागपत, राहुल उर्फ बोसी निवासी भभीसा तथा हरेंद्र निवासी कंजरखेड़ी, बाबरी शामिल थे। बदमाशों के हाथों में राइफल, बंदूक और कट्टे थे। घर में घुसते ही उन्होंने उत्पात मचाना शुरू कर दिया था। वे फायरिंग करते हुए लगातार पूछ रहे थे कि “आशु ढक्कन कहां है?” इसके बाद बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं, जिससे परिवार में पूरी तरह अफरा-तफरी मच गई थी।
भाई को बचाने पहुंचे पवन को मारी गोली
फायरिंग के दौरान अशोक कुमार के हाथ में गोली लग गई थी जिससे वह घायल हो गए थे। गोलियों की आवाज और चीख-पुकार सुनकर उनके छोटे भाई पवन कुमार मौके पर पहुंचे थे। अभियोजन के अनुसार, बदमाशों ने पवन कुमार को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वारदात के दौरान करीब 40 राउंड फायरिंग किए जाने की बात सामने आई थी। गोलियों की इस बौछार से पूरा गांव बुरी तरह दहल गया था। अशोक की पत्नी नीलम और उनकी भाभी सोहनवीरी ने कमरे में घुसकर किसी तरह अपनी जान बचाई थी।
पुलिस ने तीन महीने में दाखिल किया था आरोप-पत्र
इस हत्याकांड के तुरंत बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी थी। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने 18 अक्टूबर 2014 को न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया था। इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई शुरू की थी। 18 अगस्त 2015 को आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। करीब 12 वर्ष तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद गुरुवार को न्यायालय ने मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है।
चार दोषियों को अदालत ने सुनाई मृत्युदंड की सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर फैसला सुनाया है। अदालत ने हत्या के दोषी रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ बोसी और हरेंद्र को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने चारों दोषियों पर कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत के इस फैसले के बाद करीब 12 वर्ष पुराने इस चर्चित हत्याकांड में चार दोषियों के खिलाफ सुनवाई पूरी हो गई है।
मुख्य आरोपित विपुल खूनी पुलिस मुठभेड़ में हो चुका है ढेर
इस मामले का मुख्य आरोपित और कुख्यात गैंगस्टर विपुल उर्फ खूनी अब इस दुनिया में नहीं है। वह कुख्यात गैंगस्टर सुशील मूंछ गिरोह का सक्रिय सदस्य और शार्प शूटर बताया गया था। अभियोजन के अनुसार विपुल पर हत्या, लूट और डकैती समेत 30 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। वह जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद न्यायालय में पेश नहीं हो रहा था और लगातार फरार चल रहा था। मुकदमे के वादी अशोक कुमार से भी विपुल ने मुकदमे में खर्च हुए रुपये मांगे थे। यह आरोप है कि रुपये नहीं देने पर उसने अशोक को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद पुलिस ने विपुल पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बाद में 25 जुलाई को मेरठ एसटीएफ और बागपत पुलिस की संयुक्त मुठभेड़ में विपुल उर्फ खूनी मारा गया था।
अदालत ने संगठित अपराध पर की महत्वपूर्ण टिप्पणी
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपने 33 पन्नों के निर्णय में प्रदेश में संगठित अपराध के उभार से लेकर एसटीएफ के गठन तक का उल्लेख किया है। अदालत ने माना कि विपुल उर्फ खूनी कुख्यात सुशील मूंछ गैंग का सक्रिय सदस्य और शार्प शूटर था। पवन हत्याकांड में दोषी ठहराए गए चारों आरोपित भी उसके गिरोह के लिए ही काम करते थे। न्यायालय ने अपने फैसले में कानून के शासन को लेकर स्पष्ट टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि गैंगस्टर अपने आतंक के बल पर शासन स्थापित करने का भ्रम पाल सकते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन केवल संविधान और कानून का ही होता है।
अमित की पत्रावली पर सुनवाई अभी है जारी
इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपित अमित निवासी रामनगर, बड़ौत, बागपत की पत्रावली पर सुनवाई अभी विचाराधीन है। वहीं मुख्य आरोपित विपुल उर्फ खूनी की मुठभेड़ में मौत हो चुकी है। करीब 12 वर्ष तक चली लंबी सुनवाई के बाद चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत का यह फैसला संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को लेकर भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।