प्रलेस हरियाणा का राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन संपन्न, डॉ. रामेश्वर दास अध्यक्ष और डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा बने महासचिव

प्रलेस हरियाणा का राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन संपन्न, डॉ. रामेश्वर दास अध्यक्ष और डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा बने महासचिव

प्रलेस हरियाणा का राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन हुआ संपन्न

डॉ. रामेश्वर दास अध्यक्ष, परमानंद शास्त्री वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा महासचिव निर्वाचित

सतीश बंसल /सिरसा /31 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ प्रलेस हरियाणा राज्य इकाई के कुरुक्षेत्र में संपन्न हुए राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन में आगामी तीन वर्षों के लिए राज्य कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया गया है। इस सम्मेलन के दौरान नव-निर्वाचित कार्यकारिणी की घोषणा की गई है, जिसमें डॉ. रामेश्वर दास को अध्यक्ष, परमानंद शास्त्री को वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा को महासचिव चुना गया है।

इस सम्मेलन में अन्य पदाधिकारियों का भी चयन किया गया है। नव-निर्वाचित कार्यकारिणी के तहत डॉ. अनिल ख़्याल अत्री, भगवंत सिंह सेठी और राजिंदर कौर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा, अरवेल सिंह विर्क, डॉ. कुलविंदर सिंह पदम व डॉ. करनैल चंद को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संगठन के वित्तीय और संगठनात्मक कार्यों को संभालने के लिए भी नियुक्तियां की गई हैं। प्रो. गुरदेव सिंह देव और अनीश कुमार को वित्त सचिव मनोनीत किया गया है। वहीं, प्रो. एस जेड एच नक़वी, डॉ. अतुल यादव व डॉ. शेर चंद को संगठन सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही डॉ. गुरप्रीत सिंह सिंधरा और यादविंदर सिंह को प्रैस सचिव मनोनीत किया गया है।

कार्यकारिणी में कई अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। कार्यकारिणी सदस्यों के रूप में गुरतेज सिंह बराड़, रमेश शास्त्री, कृष्ण अवतार सूरी, डॉ. कुलदीप सिंह बारना, मुख्त्यार सिंह चट्ठा, डॉ. हरमीत कौर, डॉ. हरविंदर कौर, बलजीत कौर, गीता गीतांजलि, डॉ. मीना नवीन, प्रो. दिलराज सिंह, सुरेश बरनवाल, सरबजीत सिंह, डॉ. बलविंदर सिंह, अमनदीप सिंह, डॉ. जोगिंदर सिंह अंबाला, नरेश कुमार, विनोद कुमार एवं नवनीत सिंह रेणू को शामिल किया गया है। इसके अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी बख़्शी क़ानूनी सलाहकार की ज़िम्मेवारी का निर्वहन करेंगे।

राज्य इकाई को और अधिक सशक्त और सुचारु बनाने के लिए विभिन्न मंडलों का भी गठन किया गया है। सुरिंदर सिंह ओबरॉय, प्रो. अमृत लाल madaan, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, डॉ. अशोक भाटिया एवं प्रो. हरभगवान चावला पर आधारित संरक्षण मंडल का गठन किया गया है। इसके साथ ही डॉ. पाल कौर, डॉ. अमरजीत सिंह 'अरपन' एवं तनवीर जाफरी पर आधारित अध्यक्ष मंडल का भी गठन किया गया है।

यह सम्मेलन वरिष्ठ सदस्यों की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता सुरिंदर सिंह ओबेरॉय, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, डॉ. अशोक भाटिया, डॉ. पाल कौर व जनवादी लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जय पाल पर आधारित अध्यक्ष मंडल ने की। इस कार्यक्रम में प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने मुख्य अतिथि व प्रलेस पंजाब इकाई के महासचिव डॉ. कुलदीप सिंह दीप ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की।

सम्मेलन के प्रथम सत्र में एक विशेष विमर्श का आयोजन किया गया। यह विमर्श 'हरियाणा की बहुलवादी सांस्कृतिक विरासत एवं राष्ट्रीय चेतना' पर आधारित था, जिसमें सेवानिवृत्त आईएएस अशोक गर्ग ने मुख्य वक्ता के तौर पर अपने व्याख्यान की प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा की संस्कृति बहुरंगी है और संघर्षशील व्यवहार इसकी मुख्य पहचान है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यहाँ सामंतवादी दबाव कभी हावी नहीं हो पाया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि पाखंड विरोधी स्वभाव के कारण हरियाणा की संस्कृति धर्मभीरुता से काफ़ी हद तक मुक्त रही है।

इस विमर्श को आगे बढ़ाते हुए अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। प्रो. सुभाष सैनी ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति मध्यकालीन भक्तिधारा के संतों से प्रभावित है और हरियाणा का क्षेत्र सूफ़ी परंपरा का प्रवेश द्वार रहा है। उन्होंने कहा कि बहुलतावाद का सम्मान यहाँ के व्यवहार का हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान में इस बहुलतावादी प्रवृत्ति को तहस-नहस करने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रो. सैनी ने यह आह्वान किया कि अपनी बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत को प्रचारित-प्रसारित करने हेतु सक्रिय रूप से संगठित प्रयास करना समय की अनिवार्यता है। इस विमर्श से संबंधित डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा, डॉ. कुलदीप सिंह दीप, संत कुमार, सुरिंदर सिंह ओबरॉय, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, राम मोहन रॉय, हरियाणा तर्कशील सोसायटी के गुरमीत सिंह, डॉ. जोगिंदर सिंह, डॉ. पाल कौर व जलेस राज्य अध्यक्ष जय पाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में राष्ट्रीय महासचिव ने लेखकों की भूमिका पर बात की। प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि लेखकों को अवाम को दरपेश चुनौतियों की पहचान करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेखक आम जन का पक्षधर होता है, सत्ता का चारण नहीं। उन्होंने कहा कि मानव समाज के व्यापक हित में वैचारिक नेतृत्व प्रदान करना लेखकों का दायित्व है।

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर डॉ. रतन सिंह ढिल्लों द्वारा लिखित 'क़ाज़ी हो गए रिश्वतखोर', डॉ. अशोक भाटिया द्वारा लिखित 'अंध विश्वास: रोग और ईलाज़', अशोक गर्ग, मनोज छाबड़ा एवं राम कुमार जांगड़ा द्वारा संपादित 'ज़हर जो हमने पीया', राजेंद्र टोंकी द्वारा संकलित 'स्वामी विवेकानंद के विचार' व गुरदीप सिंह मुक़्दस्स द्वारा लिखित ' ग़ुलामी' पुस्तकों को लोकार्पित किया गया। इसके अलावा, यूनीक प्रकाशन की ओर से विकास साल्याण द्वारा लगाई गई पुस्तक एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

कार्यक्रम का संचालन और उपस्थिति को लेकर जानकारी दी गई है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा व प्रो. गुरदेव सिंह देव ने किया। इस सम्मेलन में प्रलेस व सम-वैचारिक बिरादराना संगठनों के सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

Share:

Comments

Leave a comment