फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने की शिक्षा मंत्री व निकाय मंत्री से बैठक, वर्ष 2011 से पहले संचालित स्कूलों को माना जाए एक्जिस्टिंग स्कूल

फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने की शिक्षा मंत्री व निकाय मंत्री से बैठक, वर्ष 2011 से पहले संचालित स्कूलों को माना जाए एक्जिस्टिंग स्कूल

फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन, हरियाणा ने सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2011 से पहले संचालित होने वाले सभी स्कूलों को एक्जिस्टिंग स्कूल माना जाए। एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि तकनीकी खामियों के चलते निजी स्कूलों पर लगाए गए जुर्माने को पूरी तरह से माफ किया जाए।

शिक्षा मंत्री और निकाय मंत्री से की मुलाकात

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

फेडरेशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा तथा स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से मुलाकात की है। इस प्रतिनिधिमंडल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सतबीर पटेल, सचिव दिनेश जोशी तथा कैशियर ओमप्रकाश भी शामिल रहे थे।

जुर्माना समाप्त करने और पोर्टल की त्रुटियों पर चर्चा

फेडरेशन ने यह मुख्य मांग रखी कि जिन निजी स्कूलों ने सरकार के पोर्टल पर अपनी निर्धारित सीटें दिखाई थीं, लेकिन तकनीकी त्रुटि, पोर्टल की समस्या या किसी अन्य अनजाने कारण से वे सीटें लॉक नहीं हो पाई थीं, उन स्कूलों पर लगाया गया जुर्माना पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। फेडरेशन ने यह स्पष्ट किया कि केवल जानबूझकर सरकारी नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर ही सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री ने इस पूरे विषय पर अपना सकारात्मक रुख अपनाते हुए उचित समाधान निकालने का पूरा आश्वासन दिया है।

लंबित भुगतानों को शीघ्र जारी करने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से यह मांग की कि 134-ए के तहत वर्ष 2015 से लंबित पड़े भुगतान, आरटीई के तहत देय राशि, चिराग योजना के भुगतान तथा कक्षा नौवीं से लेकर 12वीं तक 134-ए के तहत पढ़ाए गए विद्यार्थियों के सभी भुगतान को शीघ्र अति शीघ्र जारी किया जाए। फेडरेशन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से भुगतान के लंबित रहने के कारण निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति और वहां दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

मान्यता और खेल प्रतियोगिताओं के मुद्दों पर बातचीत

उच्च न्यायालय में विभाग द्वारा दिए गए शपथ-पत्र के बिल्कुल अनुरूप आरटीई की निर्धारित दरों पर ही भुगतान करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। फेडरेशन ने वर्ष 2011 से पहले संचालित होने वाले गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को राहत देते हुए उन्हें एक्जिस्टिंग स्कूल के रूप में मान्यता देने तथा पुराने अस्थायी स्कूलों को स्थायी मान्यता प्रदान करने की भी मांग की है। पोर्टल बंद होने की वजह से विद्यार्थियों को खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोके जाने का गंभीर मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। शिक्षा मंत्री ने यह भरोसा दिलाया कि पोर्टल की समस्या के कारण किसी भी विद्यार्थी को खेलों से वंचित नहीं किया जाएगा और उन्होंने प्लेज मनी को न्यूनतम करने का भी आश्वासन दिया है।

स्थानीय निकाय और फायर सेफ्टी से जुड़ी मांगें

स्थानीय निकायों से संबंधित सभी मांगों पर चर्चा करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से यह मांग की कि स्वीकृत कॉलोनियों के अंदर स्थित स्कूलों को अनधिकृत बिल्कुल न दर्शाया जाए और इन स्कूलों पर लगाए जा रहे कमर्शियल टैक्स या चार्जेज को इंस्टीट्यूशनल श्रेणी में ही रखा जाए। स्थानीय निकाय मंत्री ने संबंधित सभी अधिकारियों से बातचीत करके इन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, फेडरेशन ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने की मांग भी रखी है, जिस पर मंत्री ने मांग का उचित परीक्षण करके इस पर सही निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।

Share:

Comments

Leave a comment