पंजाब में गिरते भूजल स्तर में सुधार: नहरी नेटवर्क के कायाकल्प से फसलों की उपज बढ़ी और जल स्तर 5 मीटर तक ऊपर आया - हरपाल सिंह चीमा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा राज्य के जल संकट को दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नहरों के पुनर्जीवन, जलमार्गों की बहाली और भूजल रिचार्ज पहलों के कारण दशकों से गिरते भूजल स्तर में अब सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। इससे पहले उन्होंने पंजाब विधानसभा में प्रोफेसर जसवंत सिंह गज्जण माजरा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के समर्थन में भी अपनी बात रखी थी।
16,000 किमी खालों का पुनर्जीवन और टेल एंड तक पानी
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान पिछले 25-30 वर्षों में अत्यधिक भूजल दोहन से स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी, जिससे किसानों को गहरे बोर करने और बिजली का लोड बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। वर्तमान सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए राज्य के नहरी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने का व्यापक अभियान शुरू किया है। सरकार ने 16,000 किलोमीटर खालों का निर्माण व कायाकल्प किया है और नहरों में लगभग 39,049 क्यूसेक पानी छोड़कर टेल एंड पर स्थित प्रत्येक किसान के खेत तक नहरी पानी की पहुंच सुनिश्चित की है।
भूजल स्तर 3 से 5 मीटर ऊपर आया और फसलों की पैदावार भी बढ़ी
इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों की जानकारी देते हुए चीमा ने बताया कि राज्य के कई ब्लॉकों में भूजल स्तर 3 से 5 मीटर तक ऊपर आया है। इसके अलावा, भूजल की जगह पोषक तत्वों से भरपूर नहरी पानी के उपयोग से गेहूं और धान की पैदावार में 1 से 2 क्विंटल प्रति एकड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे किसानों की आय बढ़ी है, बिजली की खपत घटी है और प्राकृतिक ऊर्जा की भी बचत हुई है।
510 रिचार्ज योजनाएं और रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य
भूजल रिचार्ज के लिए उठाए गए अन्य कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विभिन्न नगर परिषदों और नगर निगमों में नए भवनों के साइट प्लान की मंजूरी के लिए रेन वाटर रिचार्ज पॉइंट को अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने कुल 510 ग्राउंडवाटर रिचार्ज योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी है, जिनमें 192 तालाब-आधारित और 246 नहर-आधारित रिचार्ज योजनाएं शामिल हैं। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार महान गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलते हुए जल संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने जल को केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि संपूर्ण जीव जगत और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य जीवन रेखा माना है।