पंजाब में गहराया बिजली संकट, लुधियाना समेत कई शहरों में 12 से 18 घंटे के लग रहे पावर कट

वडिंग ने लुधियाना जैसे शहरों में 12 घंटे तक बिजली कटौती का मुद्दा उठाया; कहा- उद्योग बंद, धान की फसलें मुरझा रही हैं
आरोप लगाया- पंजाब को अंधेरे में धकेलने का एक और शर्मनाक रिकॉर्ड AAP सरकार के नाम
कहा- लोगों को घरों में रोशनी के लिए मोमबत्तियों का सहारा लेना पड़ रहा है
लुधियाना/12 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब को अंधेरे में धकेलने का एक और शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। राज्य के कई शहरों जैसे लुधियाना में 12 से 18 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। इस कारण लोगों को अपने घरों में रोशनी के लिए मोमबत्तियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
पंजाब में गहराया बिजली संकट
राज्य में बिजली संकट और ज्यादा गहरा गया है। इस संकट के कारण किसान अपनी धान की फसल को बचाने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं। उद्योगों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं। इसके अलावा गांवों में भी लंबे समय तक बिजली कटौती देखने को मिल रही है।
बिजली की मांग और उत्पादन में भारी अंतर
स्थिति बहुत अधिक गंभीर हो चुकी है। पंजाब की पीक बिजली मांग करीब 16,000 मेगावाट है। इसके मुकाबले बिजली का उत्पादन केवल करीब 4,000 मेगावाट ही हो रहा है। इसके बावजूद राज्य बाहर से लगभग 11,500 मेगावाट बिजली ले रहा है। हालांकि मांग और उपलब्धता के बीच का यह बड़ा अंतर एक गंभीर बिजली संकट पैदा कर रहा है।
फसलें सूखने लगीं और उद्योग हो रहे प्रभावित
पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि जिन फसलों को बेटों की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया जाता है, वे अब सूख रही हैं। धान की फसल भी लगातार मुरझा रही है। उन्होंने धान की फसल के इस महत्वपूर्ण सीजन में बिजली की कमी के कृषि पर पड़ रहे प्रभाव को पूरी तरह रेखांकित किया। किसानों को सिंचाई के पंप चलाने के लिए महंगे डीजल जनरेटरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इससे उनकी लागत बहुत बढ़ रही है, जबकि वे पहले से ही बढ़ते कृषि खर्चों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र पर बिजली संकट के प्रभाव को लेकर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उद्योगों को रात 8 बजे से बंद करने के लिए कहा जा रहा है। इसके साथ ही रिहायशी इलाकों में भी लगातार बिजली कटौती हो रही है। लंबे बिजली कटों के कारण घरों में लगे इनवर्टर भी राहत देने में पूरी तरह असमर्थ हो रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों और थर्मल प्लांट्स का हाल
वडिंग के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में स्थिति विशेष रूप से खराब है। गांवों में बार-बार बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे समय में जब किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है, बिजली आपूर्ति में व्यवधान खड़ी धान की फसलों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट की एक-एक यूनिट बंद पड़ी है। इससे राज्य की बिजली मांग पूरी करने की क्षमता और अधिक प्रभावित हुई है। वडिंग ने यह भी कहा कि राजपुरा थर्मल प्लांट में केवल करीब सात दिन का कोयला स्टॉक बचा है। वहीं तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में लगभग चार दिन का ही कोयला शेष बचा हुआ है।
सरकार की विफलता पर सवाल
उन्होंने अंत में कहा कि भगवंत मान सरकार बिजली की मौसमी बढ़ती मांग के लिए पर्याप्त तैयारी करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कृषि, उद्योग तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति को तुरंत बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।