राज इंटरनेशनल स्कूल रेवाड़ी में प्री-प्राइमरी अभिभावकों के लिए सफल परवरिश पर विशेष परामर्श कार्यक्रम आयोजित

अटल हिन्द / मनोज गोयल
रेवाड़ी, 13 सितंबर। राज इंटरनेशनल स्कूल, रेवाड़ी में प्री-प्राइमरी के अभिभावकों के लिए एक विशेष परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के व्यवहार, भावनाओं और आदतों को बेहतर ढंग से समझना और विद्यालय व घर के बीच मजबूत साझेदारी बनाना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित के साथ हुई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बच्चों से जुड़ी आम चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
स्कूल निदेशक नवीन सैनी के बच्चों की परवरिश पर महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम में स्कूल निदेशक नवीन सैनी ने कहा कि स्कूल आते समय बच्चों का रोना या माता-पिता से अलग होने से डरना इस उम्र में सामान्य है। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चे को कभी डराकर स्कूल न भेजें और विदा लेते समय हमेशा सकारात्मक रहें। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों का ध्यान बहुत जल्दी भटकता है, इसलिए उन्हें लंबे समय तक बैठाकर न पढ़ाएँ, बल्कि 10-15 मिनट की छोटी-छोटी गतिविधियों, कहानी, कविता और खेल-खेल में सिखाएँ। मोबाइल और टीवी का अधिक उपयोग बच्चे की नींद, भाषा और व्यवहार को प्रभावित करता है, इसलिए भोजन के समय और सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन पूरी तरह बंद रखें।
व्यवहार, सामाजिक विकास और भाषा कौशल पर विशेष मार्गदर्शन
इस दौरान पुनीत सर ने व्यवहार और सामाजिक विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि जिद करना, गुस्सा दिखाना इस उम्र में आम बात है क्योंकि बच्चे अपनी भावनाएँ सही शब्दों में नहीं बता पाते। ऐसे में अभिभावक स्वयं शांत रहें और अच्छे व्यवहार की तुरंत प्रशंसा करें। भाषा विकास के लिए प्रतिदिन बातचीत करें, बच्चे की बात बीच में न काटें और सोने से पहले कहानी जरूर सुनाएँ। साथ ही बच्चों को कृपया, धन्यवाद, क्षमा जैसे विनम्र शब्द और खिलौने साँझा करना सिखाएँ।
डीन सर द्वारा पढ़ाई के दबाव, गृहकार्य और दिनचर्या पर मार्गदर्शन
इस अवसर पर डीन सर ने पढ़ाई के अनावश्यक दबाव, गृहकार्य और दिनचर्या पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के सीखने की गति अलग होती है, इसलिए तुलना करने से बचें। उन्होंने कहा कि तुलना दबाव पैदा करती है जबकि प्रोत्साहन आत्मविश्वास बढ़ाता है। पेंसिल पकड़ने से पहले रंग भरना, मिट्टी और ब्लॉक्स जैसे खेल कराएँ। गृहकार्य के लिए शांत जगह तय करें, कार्य बच्चे को स्वयं करने दें और गलती पर डांटे नहीं। सोने-जागने का समय निश्चित रखें और सुबह की तैयारी रात में ही कर लें।
डायटीशियन निशा मैम के खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव
इसके साथ ही स्कूल डायटीशियन निशा मैम ने खान-पान और स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि भोजन को रंगीन और आकर्षक बनाकर परोसें और छोटी मात्रा से शुरू करें। हरी सब्जियों को बारीक काटकर दाल, खिचड़ी, सांभर या चीला में मिलाकर दें, चॉकलेट को पुरस्कार न बनाएँ। बच्चों को बड़ों की देखरेख में साफ घास में 5-10 मिनट नंगे पैर चलने और पौधों को पहचानने का अवसर दें। रोगों से लड़ने की क्षमता के लिए अच्छी नींद, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, रोज के सक्रिय खेल, हाथ धोने की आदत और समय पर टीकाकरण ही सबसे मजबूत आधार हैं।
कार्यक्रम का समापन और अभिभावक-शिक्षक संवाद
अंत में अभिभावक-शिक्षक के बीच नियमित संवाद पर जोर दिया गया और सभी ने बच्चों को प्रतिदिन गुणवत्तापूर्ण समय देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल चेयरमैन राजेंद्र सैनी ने सभी आए हुए अभिभावकों को अपना क़ीमती समय निकालकर आने के लिए धन्यवाद दिया और आगे भी ऐसे ही अपना साथ बनाए रखने की कामना की।