गुरुग्राम में 149 बार रक्तदान करने वाले राजेश डुडेजा बने दूसरों के जीवन बचाने वाले योद्धा

भिवानी और गुरुग्राम में इंसानियत की अनोखी मिसाल पेश करने वाले राजेश डुडेजा लगातार रक्तदान कर रहे हैं। वे अब तक कुल 149 बार रक्तदान करके एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। उनके इस अतुलनीय सेवा कार्य और युवाओं को रक्तदान के लिए निरंतर प्रेरित करने के प्रयासों को देखते हुए उपायुक्त साहिल गुप्ता ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया है। क्षेत्र में उन्हें रक्तवीर के नाम से भी जाना जाता है और वे युवाओं के लिए एक बड़े प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।
उपायुक्त साहिल गुप्ता ने की नि:स्वार्थ प्रयासों की प्रशंसा
सम्मान समारोह के दौरान उपायुक्त साहिल गुप्ता ने राजेश डुडेजा के नि:स्वार्थ प्रयासों की खुलकर प्रशंसा की है। उपायुक्त ने कहा कि राजेश डुडेजा जैसे समाजसेवी हमारे जिले और पूरे प्रदेश के लिए बहुत बड़े गौरव का विषय हैं। 149 बार रक्तदान करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जीवन बचाने के प्रति किसी व्यक्ति की गहरी निष्ठा को साफ तौर पर दर्शाता है। एक यूनिट रक्त किसी भी जरूरतमंद परिवार की खुशियां वापस लौटा सकता है। प्रशासन हमेशा ऐसे समाजसेवियों का सम्मान करता है और यह उम्मीद करता है कि युवा वर्ग इनसे प्रेरणा लेकर बढ़-चढ़कर रक्तदान अभियानों में हिस्सा लेगा।
रक्तदान का यह सफर और प्लेटलेट्स डोनेशन
राजेश डुडेजा का यह सेवा सफर केवल एक आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अनगिनत लोगों की जिंदगी बचाने की कहानियां छिपी हुई हैं। अपने इस लंबे सेवा सफर में उन्होंने 98 बार होल ब्लड यानी सामान्य रक्तदान किया है। इसके अलावा आपातकालीन स्थितियों में मरीजों की भारी जरूरत को देखते हुए उन्होंने 51 बार प्लेटलेट्स भी डोनेट की हैं। जब भी किसी अस्पताल में गंभीर मरीजों को प्लेटलेट्स की अति आवश्यकता हुई, राजेश डुडेजा मदद के लिए हमेशा पूरी तरह से तत्पर रहे हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद अनुभव और आगे का लक्ष्य
यह विशेष सम्मान प्राप्त करने के बाद राजेश डुडेजा काफी भावुक और उत्साहित नजर आए और उन्होंने अपना अनुभव सबके साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि उपायुक्त द्वारा मिला यह सम्मान उनके इस सेवा पथ को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने यह राह किसी भी पुरस्कार के लिए नहीं चुनी थी, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य किसी तड़पते मरीज और उसके चिंतित परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लाना था। जब तक उनका स्वास्थ्य अनुमति देगा, वे लगातार रक्तदान करते रहेंगे। उनका लक्ष्य केवल खुद रक्तदान करना नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि रक्तदान पूरी तरह से सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है।