राजीव गांधी स्कॉलरशिप के लिए स्कूलों को अल्टीमेटम, छात्रवृत्ति से चूके तो तय होगी जिम्मेदारी

राजीव गांधी स्कॉलरशिप के लिए स्कूलों को अल्टीमेटम, छात्रवृत्ति से चूके तो तय होगी जिम्मेदारी

चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलने को लेकर स्कूलों की जवाबदेही तय कर दी है। मौलिक शिक्षा निदेशक की तरफ से राज्य के सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार वर्ष 2026-27 के दौरान पात्र विद्यार्थियों का पूरा डाटा 28 सितंबर तक वन स्कूल पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट करना होगा। इस योजना के तहत वार्षिक परीक्षा में पूर्व कक्षा में प्रथम श्रेणी में प्रथम आने वाले एक छात्र और एक छात्रा का डाटा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।

वन स्कूल पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के निर्देश

विभाग ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि डाटा अपलोड करने में किसी भी प्रकार की चूक होती है। यदि इस चूक के कारण कोई भी पात्र विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित रह जाता है। तब इसके लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, बीईओ, स्कूल मुखिया और कक्षा इंचार्ज सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। मौलिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी निर्देशों में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2026-27 के दौरान पात्र विद्यार्थियों का चयन वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर किया जाना है। इसमें पूर्व कक्षा में प्रथम श्रेणी में प्रथम आने वाले एक छात्र और एक छात्रा का चयन होगा।

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डेटा अपलोड की अंतिम तिथि और अधिकारियों की जिम्मेदारी

इन सभी पात्र विद्यार्थियों का पूर्ण डाटा अपडेट करने के लिए वन स्कूल पोर्टल पर एक नया विकल्प उपलब्ध कराया गया है। संबंधित सभी विद्यालयों को इसी नए विकल्प के माध्यम से पात्र छात्र और छात्राओं की आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी। निदेशालय ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। वे अपने अधीनस्थ आने वाले सभी विद्यालयों के मुखियाओं को यह बात सुनिश्चित करें कि पात्र विद्यार्थियों का पूरा डाटा 28 सितंबर तक हर हाल में अपलोड हो जाए। निर्धारित अवधि के बाद निदेशालय स्तर पर पोर्टल से सीधे डाटा डाउनलोड किया जाएगा।

इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को राजीव गांधी स्कॉलरशिप स्कीम के तहत छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का सही समय पर लाभ प्रदान करना है। निदेशालय ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी पात्र विद्यार्थी का डाटा अपलोड होने से रह जाता है। वह छात्रवृत्ति अथवा प्रोत्साहन राशि के लाभ से वंचित रहता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। इसमें संबंधित जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, खंड शिक्षा अधिकारी, विद्यालय के मुखिया और कक्षा इंचार्ज शामिल हैं। इसके अलावा सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को 30 सितंबर तक निदेशालय को एक आवश्यक प्रमाण-पत्र भेजना होगा। इस प्रमाण-पत्र में यहबताना होगा कि उनके जिले के सभी विद्यालयों द्वारा पात्र विद्यार्थियों का पूरा डाटा वन स्कूल पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपडेट कर दिया गया है।

कर्मचारियों के एसीपी मामलों के निपटारे के लिए रिकॉर्ड तलब

दूसरी ओर, शिक्षा विभाग ने अंतर-जिला उदाहरण के आधार पर स्टेपिंग अप का लाभ लेने वाले कर्मचारियों के लंबित एसीपी मामलों के निपटारे के लिए भी जरूरी कदम उठाया है। विभाग ने संबंधित सभी कार्यालयों से आवश्यक रिकॉर्ड तलब किया है। निदेशालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन कर्मचारियों के ऑनलाइन एसीपी मामले स्वीकृति के लिए पहले ही निदेशालय भेजे जा चुके हैं। उन सभी मामलों का पूरा रिकॉर्ड आगामी सात दिनों के भीतर विभाग को उपलब्ध करवाया जाए।

जारी किए गए नए निर्देशों के अनुसार संबंधित कर्मचारियों की मूल सेवा पंजिका और पर्सनल फाइल को मंगाया गया है। इसके साथ ही संबंधित अनुभाग अधिकारी की बिंदुवार स्पष्ट टिप्पणी तथा अनुशंसा रिपोर्ट भी भेजना अनिवार्य किया गया है। निदेशालय ने संबंधित सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वे सभी दस्तावेज तय की गई समय-सीमा के भीतर उपलब्ध करवाएं। ऐसा इसलिए ताकि अंतर-जिला उदाहरण के आधार पर स्टेपिंग अप का लाभ लेने वाले कर्मचारियों के सभी एसीपी मामलों का नियमानुसार सही समय पर निपटारा किया जा सके।

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