Rajsthan में सत्ता का नशा -नौकरी करनी है तो चाकरी करनी ही पड़ेगी।

नौकरी करनी है तो चाकरी करनी ही पड़ेगी।
चिकित्सा मंत्री के पुत्र के रुतबे पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के ट्वीट का मामला।
सत्ता का नशा सिर चढ़ कर बोलता है। अब क्या कहेंगे राहुल गांधी।
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If you want to do a job, you have to do it.
Case of BJP state president’s tweet on the status of son of medical minister.
The intoxication of power speaks up. What will Rahul Gandhi say now?

अजमेर(Atal HInd)
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा के पुत्र सागर शर्मा ने 20 अप्रैल को अजमेर के जिला कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा को कोरोनो वायरस के प्रकोप के मद्देनजर सैनेटाइज, मास्क आदि सामग्री भेंट की। यह दावा किया कि यह सामग्री मंत्री शर्मा को मिलने वाले वेतन में से खरीदी गई है। यह दावा मंत्री का है, इसलिए विश्वास तो करना ही पड़ेगा। लेकिन जिस रुतबे से मंत्री पुत्र कलेक्टर से मिले, उस पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में पूनिया ने दो फोटो भी लगाए हैं।

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एक फोटो मंत्री पुत्र की तिरंगा झंडा लगी कार का कलेक्ट्रेट पोर्च में खड़ी तथा दूसरा मंत्री पुत्र कलेक्टर के साथ साथ सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे हैं। पूनिया ने अब मंत्री पुत्र की हैसियत पर सवाल उठाए हैं। लेकिन जवाब तो बहुत आसान है। अफसरों को नौकरी करनी है तो मंत्री पुत्र की चाकरी तो करनी ही पड़ेगी। अब मंत्री पुत्र कलेक्ट्रेट में आएंगे तो पोर्च से कलेक्टर की कार को तो हटाना ही पड़ेगा। क्या फर्क पड़ता है यदि पुत्र की कार कलेक्टर की कार वाले पोर्च में खड़ी हो जाए तो? यदि मंत्री इसी से खुश हो तो कलेक्टर का क्या बिगड़ता है।

India-इतनी बड़ी तैयारी है तो वाकई हम खतरनाक स्थिति की ओर हैं !।

 

रोज तो कलेक्टर की कार ही खड़ी होती है। अब मंत्री पुत्र रोजाना तो कलेक्टर की कार हटवा कर अपनी कार खड़ी करेंगे नहीं। आखिर अजमेर में कलेक्ट्री भी तो करनी है। एक कलेक्टर की इससे ज्यादा समझदारी और क्या हो सकती है। जहां तक ऑफिशियल प्रेस कॉन्फ्रेंस का सवाल है तो कलेक्ट्रेट के बाहर पिं्रट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जमावड़ा लगा ही रहता है। जब चाहो तब बुला लो। डॉ. रघु शर्मा प्रदेश के सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री भी हैं, इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाना और फिर खबरें प्रसारित करना मजबूरी है।

 

 

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आखिर चैनलो और अखबारों में सरकारी विज्ञापन जनसम्पर्क विभाग ही देता है। पूनिया को यह भी समझना चाहिए कि सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोलता है। यदि सत्ता का नशा नहीं होता तो रघु शर्मा कांग्रेस के किसी पदाधिकारी के माध्यम से राहत सामग्री कलेक्टर को भिजवाते। यदि कार्यकर्ता के साथ सामग्री भिजवाई जाती तो कांग्रेस पार्टी का सम्मान होता।

 

 

 

असल में रघु शर्मा भी जानते हैं कि कार्यकर्ता को दरी बिछाने और उठाने के लिए ही होता है। सत्ता का सुख भोगने के लिए तो बेटा ही होगा। और फिर संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को क्यों श्रेय दिया जाएगा, क्योंकि अजमेर में तो अधिकांश पदाधिकारी प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के समर्थक हैं। मंत्री पुत्र के सामने जिस प्रकार पूरा कलेक्ट्रेट नतमस्तक हो गया, उस पर अब अजमेर के भाजपा नेताओं को भी नाराजगी है।

 

 

गत दिनों अजमेर शहर के कांग्रेस और भाजपा के पार्षद खाद्य सामग्री के वितरण को लेकर कलेक्टर से मिलने गए थे, लेकिन दो घंटे बाहर खड़े रहने पर भी पार्षदों को कलेक्ट्रेट परिसर में घुसने नहीं दिया गया। पार्षदों के साथ मेयर धर्मेन्द्र गहलोत और कांग्रेस के पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल भी थे। बाद में सभी पार्षदों को हिरासत में लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर से हटवा दिया गया। अब कांग्रेस और भाजपा के नेता भले ही चिल्ल-पौं करते रहे, लेकिन प्रशासन ने समझा दिया है कि वह किसकी चाकरी कर रहा है।

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